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रजिस्टर में बदली जेंडर एंट्री, नवजात गायब:निजी अस्पताल का लाइसेंस होगा रद्द, 3 साल पुराने मामले में सुस्ती पर पुलिस को हाईकोर्ट की फटकार




बिहार शरीफ के नवजीवन शिशु अस्पताल से 3 साल पहले एक नवजात गायब हो गया था। जांच में पता चला कि डॉक्टर ने खुद एंट्री रजिस्टर में ओवरराइटिंग की और ‘मेल’ (लड़का) शब्द के आगे ‘फी’ अक्षर जोड़कर उसे ‘फीमेल’ (लड़की) बना दिया था। पुलिस जांच में यह भी पाया गया कि अस्पताल के एनआईसीयू वार्ड में न तो कोई सीसीटीवी था और न ही वहां कोई सुरक्षा गार्ड था। प्रवेश-निकास रजिस्टर भी ठीक से मेंटेन नहीं किए जा रहे थे। दस्तावेजों को फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजने में सुस्ती बरती गई। जिसपर हाईकोर्ट ने पुलिस को कड़ी फटकार लगाई हैं। उच्च न्यायालय ने डीएम उदिता सिंह को निर्देश दिया है कि 2 सप्ताह में उचित आदेश पारित करें। वहीं, एसपी भरत सोनी ने जिलाधिकारी को अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव भेज दिया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर तय की है, जिसमें एसपी को अपनी कार्रवाई रिपोर्ट एक सीलबंद लिफाफे में पेश करने के निर्देश दिए। 2023 में बच्चा जन्म लिया था ​अदालत में सुनवाई के दौरान नालंदा के पुलिस अधीक्षक ने जानकारी दी कि अस्पताल के प्रभारी डॉ. ब्रजेश कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोप सत्य पाए गए हैं। जांच-जब्त किए गए दस्तावेजों से यह स्पष्ट हुआ है कि 26 मार्च 2023 को अस्पताल में 3.450 किलोग्राम के जीवित बालक का जन्म हुआ था। जन्म के बाद नवजात को लगभग 17 दिनों तक आईसीयू में रखा गया और इस दौरान परिजन को उससे मिलने की अनुमति बिल्कुल नहीं दी गई।
अस्पताल का लाइसेंस रद्द न होने पर कोर्ट ने जताई नाराजगी न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति रमेश चंद मालवीय की खंडपीठ ने पुलिस की प्रारंभिक जांच में हुई लापरवाही को गंभीरता से लिया है और अस्पताल के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उच्च न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय की ओर से ‘पिंकी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि मानव तस्करी के ऐसे मामलों में अस्पताल का लाइसेंस तुरंत निलंबित किया जाना चाहिए। पुलिस की ओर से आरोप सत्य पाए जाने के बावजूद अब तक अस्पताल का लाइसेंस रद्द न होने पर न्यायालय ने गहरी नाराजगी जताई। रजिस्टर को एफएसएल को सौंपा कोर्ट की फटकार के बाद नालंदा के एसपी ने अदालत को बताया कि विवादित रजिस्टर को एफएसएल पटना के हस्तलेखन विंग को सौंप दिया गया है। अदालत में ऑनलाइन उपस्थित हुए हस्तलेखन विंग के निदेशक ने आश्वासन दिया है कि जांच कर 10 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। एसपी ने न्यायालय को यह भी जानकारी दी कि मामले में पूर्व में लापरवाही बरतने वाले जांच अधिकारी के खिलाफ आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।



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