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गोपालगंज में अधिकतम तापमान 34°C, न्यूनतम 28°C दर्ज:मौसम वैज्ञानिक बोले-'मानसून पर ट्रफ रेखा का प्रभाव',डिहाइड्रेशन से बचने की सलाह




गोपालगंज में इन दिनों मौसम का मिजाज पूरी तरह अनिश्चित बना हुआ है। दिन की शुरुआत तेज धूप से होती है, लेकिन अचानक आसमान में घने बादल छा जाते हैं, जिससे छांव हो जाती है। मौसम के इस तेजी से बदलते रूप ने आम लोगों के साथ-साथ कृषि से जुड़े किसानों को भी हैरान कर दिया है। जिले में अधिकतम तापमान 34°C और न्यूनतम तापमान 28°C दर्ज किया गया है। छिटपुट बूंदाबांदी से बढ़ी उमस मानसून के इस दौर में नमी का स्तर अत्यधिक बढ़ जाने के कारण जिले में उमस भरी गर्मी अपने चरम पर है। सुबह की कड़ी धूप लोगों को पसीने से बेहाल कर देती है, और बादलों की आवाजाही से बारिश के आसार नजर आते हैं। हालांकि, कुछ इलाकों में केवल छिटपुट या रिमझिम बूंदाबांदी होती है, जिससे गर्मी से कोई स्थायी राहत नहीं मिल पा रही है। धूप का अचानक गायब होकर बादलों का घिर आना और फिर बिना पर्याप्त बारिश के धूप खिल जाना दैनिक दिनचर्या को प्रभावित कर रहा है। हवा में नमी होने के कारण चिपचिपाहट मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, वातावरणीय परिस्थितियों और मानसून ट्रफ रेखा के प्रभाव से जिले में स्थानीय स्तर पर बादलों का निर्माण हो रहा है। इस वजह से तापमान में कोई बड़ी गिरावट दर्ज नहीं की जा रही है। लगातार तापमान में मामूली अंतर और हवा में अधिक नमी के मेल से चिपचिपाहट वाली गर्मी लोगों को परेशान कर रही है। वायरल बुखा और सिरदर्द का खतरा बढ़ डॉक्टरों ने मौसम के इस लगातार बदलते मिजाज को देखते हुए स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है। दिन में बार-बार बदलते तापमान की वजह से वायरल बुखार, सिरदर्द और डिहाइड्रेशन जैसी मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और कड़ी धूप में अचानक बाहर निकलने से बचने का सुझाव दिया है। जानें, क्या होती है ट्रफ लाइन… मौसम की गतिविधियों को करती है प्रभावित मौसम विज्ञान में ट्रफ लाइन वायुमंडल में कम वायुदाब का एक लंबा और अपेक्षाकृत संकरा क्षेत्र होता है। मानसून के दौरान ट्रफ लाइन मौसम की गतिविधियों को प्रभावित करने वाली महत्वपूर्ण प्रणालियों में से एक होती है। मानसून ट्रफ सामान्यतः उत्तर-पश्चिम भारत से लेकर उत्तर भारत होते हुए बंगाल की खाड़ी तक फैली रहती है। इसकी स्थिति में बदलाव का सीधा असर बारिश के वितरण पर पड़ता है। जब ट्रफ लाइन किसी क्षेत्र के करीब या उसके दक्षिण की ओर सक्रिय होती है, तो वहां बादल बनने और बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। बारिश के पूर्वानुमान में ट्रफ लाइन पर नजर ट्रफ लाइन के आसपास हवा के ऊपर उठने की प्रक्रिया तेज होने से बादल बनने और वर्षा की संभावना बढ़ जाती है। यही कारण है कि मानसून के दौरान मौसम विभाग बारिश के पूर्वानुमान में ट्रफ लाइन की स्थिति पर विशेष नजर रखता है। हालांकि, केवल ट्रफ लाइन ही भारी बारिश का कारण नहीं होती। बंगाल की खाड़ी में बनने वाले निम्न दबाव के क्षेत्र, चक्रवाती परिसंचरण, नमी और अन्य मौसमी प्रणालियां भी बारिश की तीव्रता को प्रभावित करती हैं।



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