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आप टेंशन मत लीजिए। पैसे जमा कीजिए, फॉर्म भरिए, हम बिना कैंडिडेट के आए ही आर्म्स ट्रेनिंग सर्टिफिकेट दे देंगे। कैंडिडेट किसी भी राज्य का हो कोई दिक्कत नहीं है। हम बिना गन चलाए उसे सर्टिफिकेट दे देंगे कि उसे ट्रेनिंग दी गई है। अगर आपके पास मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट भी नहीं होगा तो वो भी हम यहीं से बनवा देंगे। हमने पहले से डॉक्टर की साइन और मोहर लगी रिपोर्ट तैयार रखी है। बस उस पर आपका नाम भरना होगा। एक घंटे में सारा काम करके आर्म्स ट्रेनिंग सर्टिफिकेट आपके हाथ में रख देंगे। भास्कर रिपोर्टर से ये दावा आर्म्स ट्रेनिंग सेंटर में स्पोर्ट्स शूटिंग सर्टिफिकेट जारी करने वाले कर्मचारियों ने किया है। बिहार में गन लाइसेंस के लिए आर्म्स ट्रेनिंग सर्टिफिकेट जरूरी है। इस सर्टिफिकेट के लिए कैंडिडेट को 3 दिन गन चलाने की ट्रेनिंग लेनी होती है, लेकिन सेंटर बिना ट्रेनिंग के ये सर्टिफिकेट जारी कर रहे हैं। ऐसा तब है, जब बिहार राइफल एसोसिएशन के सचिव खेल मंत्री श्रेयसी सिंह के चाचा हैं। बिहार राइफल एसोसिएशन के स्टाफ ने बताया कि यहां का सारा कामकाज पहले मंत्री के पिता देखते थे। अब उनके चाचा देख रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक, बिहार में 80 हजार लोगों के पास आर्म्स लाइसेंस हैं। वहीं, प्रत्येक साल 2500 लाइसेंस जारी किए जाते हैं। भास्कर इन्वेस्टिगेशन में पढ़िए और देखिए किस तरह बिहार में बिना गन ट्रेनिंग के दिए जा रहे आर्म्स ट्रेनिंग सर्टिफिकेट… रिपोर्टर – सर, मुझे हथियार का लाइसेंस बनवाना है। पहली बार अप्लाई कर रहा हूं। प्रक्रिया समझनी है।
तरुण – सबसे पहले आप हथियार लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाला फॉर्म ले लीजिए। उसी फॉर्म में पूरी जानकारी दी गई है कि कौन-कौन से डॉक्यूमेंट लगेंगे, क्या नियम हैं और आवेदन कैसे करना है। रिपोर्टर – आवेदन के साथ कौन-कौन से डॉक्यूमेंट देने होंगे?
तरुण – सबसे जरूरी आर्म्स ट्रेनिंग सर्टिफिकेट है। उसके बिना आवेदन एक्सेप्ट नहीं होगा। इसके अलावा मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट और फॉर्म में जो दूसरे जरूरी दस्तावेज लिखे हैं, वो भी लगाने होंगे। रिपोर्टर – ये आर्म्स ट्रेनिंग सर्टिफिकेट कहां से बनता है?
तरुण – किसी मान्यता प्राप्त राइफल एसोसिएशन या आर्म्स ट्रेनिंग सेंटर से ट्रेनिंग लेनी होगी। बिहार राइफल एसोसिएशन भी ट्रेनिंग कराता है। पटना में इसका सेंटर है। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद वहीं से सर्टिफिकेट मिलता है। रिपोर्टर – पहले भी ये सर्टिफिकेट जरूरी था या बाद में नियम बदला?
तरुण – पहले ऐसा नहीं था। पहले बिना ट्रेनिंग सर्टिफिकेट के भी लाइसेंस बन जाता था। लेकिन 2016 से नियम बदल गया। अब आर्म्स ट्रेनिंग सर्टिफिकेट अनिवार्य है। रिपोर्टर – मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट भी देना पड़ेगा?
तरुण – जी, बिल्कुल। मेडिकल सर्टिफिकेट तय फॉर्मेट में बनवाना होगा। तरुण से बातचीत के बाद हम पटना के लव-कुश टावर में बिहार राइफल एसोसिएशन के ऑफिस पहुंचे, जहां हमारी मुलाकात राजेश से हुई। राजेश ने बताया कि सरकार ने गन लाइसेंस लेने के लिए कम से कम 3 दिन की ट्रेनिंग लेने का नियम बनाया है। आपको सिर्फ पैसे देने हैं, 15 मिनट में ही आपको सर्टिफिकेट मिल जाएगा। साथ ही मेडिकल फिटनेस भी बिना डॉक्टर की जांच किए बना देने की बात कही। रिपोर्टर – सर्टिफिकेट की कुल फीस कितनी लगेगी?
राजेश- 22 हजार रुपए लगेंगे। रिपोर्टर – मेरे पास बाकी सभी दस्तावेज तो हैं, लेकिन मेडिकल फिटनेस नहीं है। वह कैसे बनेगा?
राजेश – किसी डॉक्टर के पास जाइए और उनसे कहिए कि आर्म्स शूटिंग के लिए मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट बनाना है। रिपोर्टर – मतलब मेडिकल फिटनेस बाहर के किसी डॉक्टर से बनवा कर देना होगा?
राजेश – यहां से भी बन जाएगा, लेकिन उसके एक्स्ट्रा 500 रुपए लगेंगे। रिपोर्टर – इसे कैसे आप दे देते हैं? यह तो डॉक्टर देंगे ना?
राजेश – मेरे पास सब डॉक्टर का ही है। डॉक्टर ने पहले ही मोहर और सिग्नेचर करके मुझे रिपोर्ट दे दी है। इसमें सिर्फ आपका नाम भरकर दे देना है। रिपोर्टर – हमें किसी डॉक्टर से आंखों की भी जांच करानी होगी क्या?
राजेश – नहीं, उसकी जरूरत नहीं है। आप 22 हजार रुपए दीजिए। आपको कुछ नहीं करना है आपको सर्टिफिकेट मिल जाएगा। रिपोर्टर – सर्टिफिकेट मिलने में कितना समय लगता है?
राजेश – अभी कुछ समय लगेगा, क्योंकि यहां बांकीपुर में चुनाव चल रहा है, यहां आचार संहिता लागू है। रिपोर्टर – बैक डेट में कर दीजिए।
राजेश – बैक डेट में कैसे कर दें? ट्रेनिंग देते हुए एक फोटो तो लेनी पड़ेगी, खानापूर्ति के लिए। रिपोर्टर – क्या पूरे बिहार में आपकी ही ब्रांच है?
राजेश – पहले अलग-अलग जगहों पर सेंटर चल रहे थे, लेकिन कई जगह फर्जी काम होने लगे, इसलिए उन्हें बंद करा दिया गया। बिहार में यही मेन है, सर्टिफिकेट भी यहीं से जारी होता है। रिपोर्टर – बिहार में बाकी जगह ट्रेनिंग दी जा रहा है, क्या वह फर्जी हो रही है?
राजेश – कई जगह फर्जी बन रहा है। ऐसे मामलों के रिकॉर्ड हमारे पास भी आते हैं। इसलिए सावधानी रखिए। हम कैंसिल भी कर देंगे। हालांकि बिहार में जहां भी राइफल क्लब या ट्रेनिंग सेंटर है सब यहीं से मान्यता प्राप्त हैं। आप बिहार में कहीं भी ट्रेनिंग लीजिए, सर्टिफिकेट यहीं से जारी होगा। रिपोर्टर – ट्रेनिंग के लिए कितने दिन आना होगा?
राजेश – सिर्फ एक दिन आना होगा। आधे घंटे से एक घंटे तक ट्रेनिंग रहती है। लेकिन सरकारी कर्मचारी को तीन दिनों की छुट्टी लेनी होगी। बाकी काम तो एक ही दिन में हो जाएगा, कुछ घंटों में। रिपोर्टर – सरकार के नियम में तो 3 दिन की ट्रेनिंग लिखी है?
राजेश – नियम 3 दिन का है, लेकिन प्रक्रिया एक दिन में पूरी करा दी जाती है। कागजों में 3 दिन का रिकॉर्ड रहता है। रिपोर्टर – पैसे कब देने होंगे?
राजेश – फॉर्म भरते समय ऑनलाइन भुगतान करना होगा। रिपोर्टर – यहां से कोई प्लेयर निकला है कि नहीं?
राजेश – यहां से श्रेयसी सिंह ही निकली हैं। उनसे बड़ा प्लेयर कौन है? अभी इसके अध्यक्ष इनके चाचा ही हैं। रिपोर्टर – सर्टिफिकेट बनवाने के लिए कहां-कहां से लोग आते हैं?
राजेश – हमारे पास पंजाब से भी लोग सर्टिफिकेट बनवाने आए हैं। रिपोर्टर – यह सेंटर किसका है?
राजेश – यह सेंटर श्रेयसी सिंह के चाचा का है। पहले इसका संचालन उनके पिता ही करते थे। इसके बाद हमारी इन्वेस्टिगेशन टीम का दूसरा साथी बिहटा का बिजनेसमैन बनकर राजेश से मिला और आर्म्स ट्रेनिंग सर्टिफिकेट के लिए बात की। रिपोर्टर- मुझे गन का लाइसेंस लेना है, उसके लिए ट्रेनिंग का सर्टिफिकेट चाहिए।
राजेश- मिल जाएगा। आपको खुद चाहिए या किसी और के लिए चाहिए। रिपोर्टर- मेरा भाई और मेरे पिताजी बिजनेस देखते हैं। तो भाई के लिए चाहिए।
राजेश- मिल जाएगा। टोटल 22 हजार रुपए लगेंगे। रिपोर्टर- लेकिन मेरा भाई आंख से हैंडीकैप है। क्या उसका बन जाएगा?
राजेश- अगर आंख से हैंडीकैप है तो सर्टिफिकेट में दिक्कत होगी। गन चलाने के लिए आंख का सही होना बहुत जरूरी है। आपको यह सर्टिफिकेट किस काम के लिए चाहिए? रिपोर्टर- गन का लाइसेंस लेने के लिए।
राजेश- तब तो और नहीं हो पाएगा, क्योंकि अगर हम यहां से दे भी देंगे तो जब वेरिफिकेशन में जाएगा और डीएम साहब बात करेंगे तो वह आंख का देखकर तुरंत रिजेक्ट कर देंगे। क्योंकि आंख से हैंडीकैप आदमी तो सामने से ही दिख जाता है। रिपोर्टर- तब मेरे पापा के नाम से ही बना दीजिए।
राजेश- हां, उनके नाम से सबसे बेहतर रहेगा। रिपोर्टर- कितने दिन में सर्टिफिकेट मिल जाएगा? इसके लिए कहां ट्रेनिंग करनी पड़ेगी और कितने दिन की ट्रेनिंग होती है?
राजेश- राजेंद्र नगर मोइनुल हक स्टेडियम के पास शूटिंग रेंज है। हम वहीं ट्रेनिंग कराते हैं। आपको तीन दिन की ट्रेनिंग दी जाएगी। रिपोर्टर- तो क्या उनको तीनों दिन आना पड़ेगा?
राजेश- हां, आना तो पड़ेगा। रिपोर्टर- उनका बिजनेस है। उनको आने में दिक्कत है। बिजनेस छोड़कर वह एक दिन के लिए भी नहीं आ सकते हैं। कोई उपाय हो तो कीजिए।
राजेश- तीन दिन नहीं तो एक दिन के लिए तो आना ही पड़ेगा। जब तक नहीं आएंगे तब तक नहीं होगा। रिपोर्टर- उनके साथ परेशानी है कि अगर वह बिजनेस छोड़कर यहां आएंगे तो सब चौपट हो जाएगा। वही सब कुछ देखते हैं।
राजेश- देखिए, यहां फोटो खींची जाती है। वही फोटो गन का लाइसेंस लेने के लिए भी देना पड़ता है। जब तक फोटो नहीं लेंगे तब तक कैसे होगा। आप उनको एक घंटे के लिए ही लेकर आ जाइएगा। रिपोर्टर- उनको आने में ही दिक्कत है। बाकी कोई दिक्कत नहीं है।
राजेश- आप सिर्फ 15 मिनट के लिए लेकर आइएगा। हम सिर्फ एक फोटो लेंगे सिखाते हुए। उसी समय गन की बेसिक बात बता देंगे। उसके बाद चले जाएंगे। बाकी सब हम मैनेज कर लेंगे। रिपोर्टर- सर्टिफिकेट देंगे उसपर कितने दिन की ट्रेनिंग लिखी रहती है।
राजेश- हम 3 दिन की ट्रेनिंग की सर्टिफिकेट देंगे। आपको सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए आना होगा। रिपोर्टर- बाकी डॉक्यूमेंट में क्या-क्या चाहिए।
राजेश- आधार कार्ड, पैन कार्ड, मेडिकल फिटनेस, कैरेक्टर सर्टिफिकेट। रिपोर्टर- मेडिकल फिटनेस नहीं है उनका।
राजेश- आप बाकी सब डॉक्यूमेंट लेकर आइएगा, मेडिकल फिटनेस के लिए 500 रुपए एक्स्ट्रा दे दीजिएगा। हम यहां से बना देंगे। रिपोर्टर- हम चाहते हैं कि मेरा गन वाला काम भी आप ही करवा देते। हमारा सब काम यहीं से हो जाता।
राजेश- वह तो आपको खुद करना होगा। क्योंकि लाइसेंस तो डीएम साहब देते हैं। रिपोर्टर- उसके लिए क्या-क्या चाहिए?
राजेश- अगर आपका बिजनेस है तो हर साल का ITR, फिर GST, पहले किसी ने आपके ऊपर कोई हमला किया है तो उसकी FIR और मेडिकल रिपोर्ट। साथ में उस केस का स्टेटस भी। बाकी कैरेक्टर, मेडिकल फिटनेस, आधार, पैन आपका लगेगा। आपको एक पीला वाला फॉर्म भरना होगा। फॉर्म का एसडीएम, एसपी, थाना के स्तर से वेरिफिकेशन होता है। रिपोर्टर- वेरिफिकेशन में ही अटक जाता होगा।
राजेश- हां, यही होता ही है। आपको पता भी नहीं चलेगा कि मेरे पेपर कब किस अधिकारी के पास गए हैं। रिपोर्टर- वहां भी पैसे देने पड़ते होंगे।
राजेश- देने ही पड़ते हैं। जब एसपी के पास जाएगा तो वहां के कर्मी आप से पैसे लेंगे, एसडीएम के पास भी लगता है और थाने में भी लगता है। थाने में तो आपके पिताजी को खुद जाना पड़ेगा। हर जगह 2000 से 5000 हजार रुपए लगेंगे। रिपोर्टर- वेरिफिकेशन वाला काम आप करवा सकते हैं क्या?
राजेश- हां, मेरे पास आदमी है, यह वाला काम हम करवा देंगे। क्योंकि मेरे पास जो आदमी है, उसको सब पता होता है कि कौन कागज किस अधिकारी के पास कब पहुंचा है। लेकिन थाने में आपके पिताजी को खुद जाना पड़ेगा, क्योंकि वह लोकल का मामला है। रिपोर्टर- ठीक है, थाना तो हम देख लेंगे। बाकी आप करवा दीजिए। इसमें कितने पैसे लगेंगे।
राजेश- टोटल 30 हजार लगेंगे। एसपी और एसडीएम वाला काम हो जाएगा। रिपोर्टर- उसके बाद हमको क्या करना होगा।
राजेश- जब डीएम के पास फाइल चली जाएगी, तब तो मामला डीएम के हाथ में रहेगा। वह आपके पिताजी से सामने बैठकर बात करेंगे। अगर उनको लगेगा कि देने लायक है तो दे देंगे। राजेश ने बातचीत के दौरान सीवान का भी जिक्र किया। स्पोर्ट्स शूटिंग सर्टिफिकेट की पड़ताल में हमारी टीम सीवान के चनौर स्थित विज्ञानानंद राइफल ट्रेनिंग सेंटर पहुंची। यहां ट्रेनर चंद्रप्रकाश ने दावा किया कि औपचारिकताएं पूरी कर दो तो कुछ ही घंटों में सर्टिफिकेट मिल जाएगा। रिपोर्टर – आर्म्स सर्टिफिकेट के लिए डॉक्यूमेंट तैयार कराना है।
चंद्रप्रकाश – यह फॉर्म लीजिए, पहले इसे भरिए। रिपोर्टर – पहले यह तो बता दीजिए कि क्या-क्या डॉक्यूमेंट लगेंगे?
चंद्रप्रकाश – पहले फॉर्म भरिए। रिपोर्टर – पहले बता दीजिए कि क्या-क्या लगेगा, तभी तो आगे बढ़ेंगे।
चंद्रप्रकाश – सर्टिफिकेट आज ही चाहिए या सिर्फ जानकारी लेने आए हैं? रिपोर्टर – आज ही चाहिए, लेकिन इसके लिए डॉक्यूमेंट भी देने होंगे न?
चंद्रप्रकाश – हां। आपको पासपोर्ट साइज फोटो चाहिए। अगर फोटो नहीं है तो मैं यहीं बनवा देता हूं। इसके साथ पैन कार्ड और आधार कार्ड देना होगा। एक फॉर्मेट मैं आपको दे दूंगा, उसे भी भरकर जमा कर दीजिएगा। रिपोर्टर – सर्टिफिकेट कितने दिन में मिल जाएगा?
चंद्रप्रकाश – आधे घंटे में मिल जाएगा। रिपोर्टर – मतलब आधे घंटे में?
चंद्रप्रकाश – ऐसा मानकर चलिए कि दो घंटे में सब कुछ फाइनल हो जाएगा। रिपोर्टर – अभी तो आपने आधे घंटे कहा था।
चंद्रप्रकाश – सर्टिफिकेट तो बन जाएगा, लेकिन कुछ खानापूर्ति भी करनी होती है। आपकी कुछ फोटो खींची जाएगी, शूटिंग करते हुए भी फोटो लेनी होगी। रिपोर्टर – उसकी क्या जरूरत है?
चंद्रप्रकाश – जरूरी है। ऊपर तक डाटा भेजना होता है, इसलिए यह सब खानापूर्ति करनी पड़ती है। रिपोर्टर – कितना खर्च आएगा?
चंद्रप्रकाश – 22… रिपोर्टर – 22 सौ?
चंद्रप्रकाश – नहीं, 22 हजार। यह फॉर्म लीजिए और भरिए। रिपोर्टर – पेमेंट ऑनलाइन होगा या कैश?
चंद्रप्रकाश – जैसे आपकी सुविधा हो, वैसे कर दीजिए। जब रिपोर्टर ने बताया कि सर्टिफिकेट उसके भाई के नाम पर बनवाना है और वह खुद मौजूद नहीं है, तो चंद्रप्रकाश ने पहले इसे नियमों के खिलाफ बताया। कुछ देर की आपसी बातचीत और फोन कॉल के बाद रुख बदल गया। इसके बाद रिपोर्टर को भरोसा दिलाया गया कि काम हो जाएगा। रिपोर्टर – दरअसल, सर्टिफिकेट मेरे भाई को बनवाना है। मैं पटना किसी जरूरी काम से आया था, तो उसने कहा कि जानकारी लेकर आ जाऊं।
चंद्रप्रकाश – देखिए, उन्हें तो आना पड़ेगा। हथियार के बारे में जानकारी दी जाती है। फायरिंग करानी पड़ती है, उसकी फोटो भी लेते हैं। हथियार चलाने और सुरक्षा से जुड़ी पूरी जानकारी दी जाती है। रिपोर्टर – मतलब यह सब एक दिन में हो जाता है?
चंद्रप्रकाश – असल में ट्रेनिंग तीन दिन की होती है, लेकिन हम लोग एक दिन में भी सब कुछ करा देते हैं। अब यह आपके ऊपर है कि तीन दिन आकर ट्रेनिंग करें या एक ही दिन में काम कराकर सर्टिफिकेट ले जाएं। ज्यादातर लोगों के पास समय नहीं होता, इसलिए वे एक ही दिन में पूरा काम कराकर चले जाते हैं। आखिर हथियार लेना है तो उसके बारे में जानकारी होनी भी जरूरी है। रिपोर्टर – इसमें कुछ गुंजाइश है?
चंद्रप्रकाश – देखता हूं… हो जाएगा। आप मेरे साथ आइए। इसके बाद चंद्रप्रकाश रिपोर्टर को एक अलग कमरे में ले गया। वहां उसकी मुलाकात एक व्यक्ति से कराई गई, जिसका नाम संजय बताया गया। चंद्रप्रकाश (संजय से) – ये मोतिहारी से आए हैं। इनके भाई का शूटिंग सर्टिफिकेट बनवाना है। पहले तो संजय ने साफ शब्दों में कहा कि दूसरे व्यक्ति की जगह किसी और को सर्टिफिकेट देना नियम के अनुसार संभव नहीं है। इसके बाद संजय और चंद्रप्रकाश आपस में धीमी आवाज में काफी देर तक बातचीत करते रहे। दोनों कभी रिपोर्टर को देखते, कभी आपस में चर्चा करते। कुछ देर बाद उन्होंने रिपोर्टर से सवाल-जवाब शुरू किए। चंद्रप्रकाश – कहां से आए हैं?
रिपोर्टर – मोतिहारी से। चंद्रप्रकाश- भाई क्या करते हैं?
रिपोर्टर – ठेकेदार हैं। चंद्रप्रकाश – कहां ठेकेदारी करते हैं?
रिपोर्टर – मोतिहारी और अन्य जगहों पर। चंद्रप्रकाश – मोतिहारी में कहां?
रिपोर्टर – उत्तर बिहार के लगभग सभी नगर परिषद और नगर निगम में उनका काम चलता है। चंद्रप्रकाश – सरकारी ठेकेदार हैं?
रिपोर्टर – ठेकेदार सरकारी नहीं होता, सरकारी काम करता है। इसके बाद चंद्रप्रकाश ने किसी को फोन लगाया। चंद्रप्रकाश (फोन पर) – सर, एक व्यक्ति मोतिहारी से आए हैं। लेकिन जिनका सर्टिफिकेट बनना है, वे नहीं आए हैं। उनके बड़े भाई आए हैं। छोटा भाई ठेकेदारी करता है। दोनों सगे भाई हैं… फोन के दूसरी तरफ कौन था, यह स्पष्ट नहीं हो सका। हालांकि, बातचीत के दौरान रिपोर्टर के बारे में विस्तार से जानकारी ली गई। फोन कटने के बाद रिपोर्टर को दूसरे कमरे में बैठाकर करीब 15 मिनट तक इंतजार कराया गया। करीब 15 मिनट बाद रिपोर्टर को फिर बुलाया गया। चंद्रप्रकाश – अभी आपका काम हो जाएगा। हां, जरूरत पड़ी तो जिस दिन बुलाया जाएगा, उस दिन सिर्फ पांच मिनट के लिए आना होगा। हो सकता है कि एक फोटो खिंचवानी पड़े। फिलहाल आप पैसे और डॉक्यूमेंट जमा कर दीजिए। आधे घंटे में सर्टिफिकेट मिल जाएगा। रिपोर्टर- मेरे भाई का सर्टिफिकेट बनवाना है। वो यहां नहीं आ सकते हैं।
संजय – काम हो जाएगा। देखिए, बहुत रेयर केस में ही दोबारा बुलाना पड़ता है। अगर किसी ने कोई शिकायत कर दी या कोई ऑब्जेक्शन आ गया, तब आना पड़ेगा। वरना जरूरत नहीं पड़ेगी। उस स्थिति में भी सिर्फ 30 मिनट का काम रहेगा। रिपोर्टर -ऐसा कुछ तो नहीं होगा?
संजय – जब ऐसा कुछ नहीं है, तो फिर आपको आने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। रिपोर्टर – फिलहाल आज मिल जाएगा ना?
संजय – हां, आज ही सर्टिफिकेट मिल जाएगा। आप जल्दी से फॉर्म भरिए और पैसा जमा कर दीजिए। इसके बाद जब रिपोर्टर वहां से निकलने के लिए उठा, तो उसे बार-बार रोककर बैठा लिया गया। लगातार कहा जाने लगा जल्दी फॉर्म भर दीजिए, आपका काम तुरंत हो जाएगा। रिपोर्टर ने बहाना बनाया कि उसके पास फिलहाल जरूरी डॉक्यूमेंट नहीं हैं, जिन्हें वह मंगवा रहा है। इस पर चंद्रप्रकाश ने कहा, कोई दिक्कत नहीं। मेरे वॉट्सऐप पर सारे डॉक्यूमेंट मंगा लीजिए। बातचीत के दौरान रिपोर्टर ने बताया कि उसके पास फिलहाल कैरेक्टर सर्टिफिकेट और मेडिकल सर्टिफिकेट नहीं है। इस पर चंद्रप्रकाश ने कहा, मेडिकल सर्टिफिकेट की चिंता मत कीजिए, वह मैं बनवा दूंगा। फिलहाल आप सर्टिफिकेट ले जाइए। कैरेक्टर सर्टिफिकेट बाद में भी जमा कर सकते हैं। दो घंटे के अंदर आपका सर्टिफिकेट तैयार हो जाएगा। आगे हम मुजफ्फरपुर के सरैया में स्थित मुजफ्फरपुर राइफल क्लब में पहुंचे। वहां हमारी मुलाकात राइफल क्लब के संचालक विशाल कुमार से हुई है। विशाल ने रिपोर्टर को महज 15 मिनट में सर्टिफिकेट दे देने की बात कही। रिपोर्टर- मुझे गन शूटिंग ट्रेनिंग का सर्टिफिकेट चाहिए, इसके लिए क्या करना होगा और कैसे मिलेगा?
विशाल- यहां दो तरह की ट्रेनिंग कराई जाती है। पहली ट्रेनिंग वह होती है जिसमे गेम खेला जाता है। उसके लिए आपको यहां की मेंबरशिप लेनी होगी। हर रोज शूटिंग की प्रैक्टिस होगी। यह पूरी तरीके से गेम होता है। दूसरी ट्रेनिंग होती है, जिसमे आप सिर्फ गन का लाइसेंस ले सकते हैं। रिपोर्टर- क्या गेम खेलने वाले सर्टिफिकेट से लाइसेंस मिल सकता है?
विशाल- हां, दोनों सर्टिफिकेट से लाइसेंस मिलता है। अगर आप यहां हर रोज प्रैक्टिस करते है और अपने डिस्ट्रिक्ट, स्टेट और नेशनल लेवल का गेम खेल लिया तो आपको आसानी से गन का लाइसेंस मिल जाएगा। इसमें आपको एक साथ 14 हथियार रखने का लाइसेंस मिलता है। इसमें आप विदेशी हथियार भी रख सकते हैं। रिपोर्टर- 3 दिन की ट्रेनिंग का सर्टिफिकेट लेते हैं तो उसमें किस तरह का लाइसेंस मिलेगा?
विशाल- इसमें आपको सेल्फ डिफेंस के लिए हथियार का लाइसेंस मिलता है। इसमें आपको सिर्फ दो हथियार रखने का लाइसेंस मिलता है। इसमें आप विदेशी हथियार नहीं रख सकते हैं। रिपोर्टर- मैं बिजनेसमैन हूं। मुझे तो बस अपने पास एक हथियार रखना है। उसी हथियार का लाइसेंस लेना है। उसके लिए मुझे क्या करना होगा।
विशाल- इसके लिए आप 3 दिन के ट्रेनिंग वाला सर्टिफिकेट ले लीजिए। इस सर्टिफिकेट से आपको हथियार का लाइसेंस मिल जाएगा। वहां सिर्फ यही दिखाना होता है कि मैंने गन चलाने की ट्रेनिंग ली है। मुझे गन चलाना आता है और मैं सेल्फ डिफेंस कर सकता हूं। रिपोर्टर- यह सर्टिफिकेट आप कितने दिन में दे देंगे?
विशाल- ट्रेनिंग तो तीन दिन की होती है। अगर आप चाहते है तो तीन दिन यहां आकर ट्रेनिंग कर सकते हैं। रिपोर्टर- मैं बिजनेस वाला आदमी हूं। मेरे साथ दिक्कत है कि तीन दिन तक यहां नहीं आ सकते हैं।
विशाल- उसकी कोई दिक्कत नहीं है। आप अपने डॉक्यूमेंट और पैसे जमा कर दीजिएगा। हम यहां से सर्टिफिकेट बना देंगे। रिपोर्टर- यह कैसे बनेगा?
विशाल- हम ट्रेनिंग देते हुए आपकी एक फोटो ले लेंगे, जो इस बात का सबूत हो जाएगा कि आपने गन चलाने की ट्रेनिंग ली है। आपको गन की जो भी बेसिक जानकारी है उसको दे देंगे, जिससे आप गन को रखना और चलाना जान जाएंगे। रिपोर्टर- इससे कोई दिक्कत तो नहीं न होगी?
विशाल- कोई दिक्कत नहीं होगी। आपको जो सर्टिफिकेट देंगे उस सर्टिफिकेट पर मेंशन रहेगा कि आपने मेरे क्लब में तीन दिन तक ट्रेनिंग की है। उसको कोई नहीं काट सकता है। अगर आप सरकारी जॉब में रहते तो तीन दिन का लीव भी लेना होगा, ताकि हम दिखा सके कि आपने तीन दिन तक मेरे पास ट्रेनिंग की है। आप डॉक्यूमेंट और पैसे दे दीजिए हम तुरंत आपका सर्टिफिकेट दे देंगे। रिपोर्टर- अगर वेरिफिकेशन होता है तो कोई दिक्कत तो नहीं होगी?
विशाल- कहीं कोई दिक्कत नहीं है। वेरिफिकेशन के लिए मेरे पास ही आएगा। वैसे यह सर्टिफिकेट बिहार राइफल क्लब से इश्यू होता है। बिहार में जितने भी राइफल क्लब हैं, सब के सब बिहार राइफल क्लब के अधीन हैं। वहां भी कोई दिक्कत नहीं है। रिपोर्टर- सर्टिफिकेट वहां भी जाएगा क्या?
विशाल- बिहार के हर क्लब का सर्टिफिकेट बिहार राइफल क्लब के नाम से ही जारी होता है। सिर्फ आपका ट्रेनिंग सेंटर मुजफ्फरपुर के मुजफ्फरपुर राइफल क्लब मेंशन रहेगा। ज्यादातर लोग तो इसी तरह के सर्टिफिकेट को लगाते है। कोई तीन दिन तक ट्रेनिंग नहीं लेता है। कई लोग तो किसी क्लब से ट्रेनिंग भी नहीं लेते हैं और फर्जी सर्टिफिकेट लगा देते है। इसमें से कई लोग पकड़े भी गए हैं। रिपोर्टर- कोई पकड़ा गया है क्या?
विशाल- हां, एक-दो आदमी पकड़े गए हैं। बाद में उनका लाइसेंस कैंसिल हो गया है। रिपोर्टर- आप जो देंगे, वो फर्जी तो नहीं रहेगा।
विशाल- नहीं, यह तो हम आपको पूरा रजिस्टर मेंटेन करके देंगे। रिपोर्टर- क्या-क्या देना होगा?
विशाल- इसके लिए आप आधार कार्ड, पैन कार्ड, 4 फोटो और एक मेडिकल सर्टिफिकेट दे दीजिए और 25 हजार रुपए फीस जमा कर दीजिए। इसके बाद रिपोर्टर ने फोन पर पंजाब के तीन लोगों के सर्टिफिकेट दिलाने की बात की। बातचीत में विशाल ने बताया की इंडिया के किसी भी कोने का आदमी रहेगा तो हम यहां से सर्टिफिकेट दे देंगे। हालांकि जिस आदमी के नाम से सर्टिफिकेट जारी होगा, उस व्यक्ति को एक दिन के लिए आना पड़ेगा। उसको हम ट्रेनिंग देते हुए फोटो लेंगे और उसको हथियार की बेसिक जानकारी देंगे। उस व्यक्ति के सर्टिफिकेट पर हम तीन दिन की ट्रेनिंग का मेंशन करेंगे। मंत्री श्रेयसी सिंह ने नहीं की बात बिहार राइफल एसोसिएशन के सचिव खेल मंत्री के च्चाचा हैं। इसलिए इस पूरे मामले में हमने मंत्री श्रेयसी सिंह का पक्ष जानने के लिए उनको फोन किया, लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई। हमने श्रेयसी सिंह के PA को फोन किया और मामले की जानकारी देते हुए मंत्री से बात करवाने को कहा। PA ने पहले तो कहा कि हम आपकी बात करवाते हैं, लेकिन बाद में इस मामले में बात करने से इनकार कर दिया। मंत्री के चाचा बोले- ऐसे स्टाफ पर एक्शन लेंगे मंत्री के PA से बात करने के बाद हमने बिहार स्टेट राइफल एसोसिएशन के सचिव और श्रेयसी सिंह के चाचा त्रिपुरारी सिंह से फोन पर बात की। इस पूरे मामले पर उन्होंने कहा कि आर्म्स लाइसेंस के लिए कम से कम 3 दिन की ट्रेनिंग की जरूरत होती है। यहां से मिला इन्वेस्टिगेशन का इनपुट बिहार सरकार ने सभी जिले के पुलिस अधिकारियों और जिलाधिकारियों को पंचायत जनप्रतिनिधियों के आर्म्स लाइसेंस के लिए आवेदन करने के 60 दिन के अंदर प्रक्रिया पूरी करने को कहा है। 30 दिन के अंदर पुलिस वेरिफिकेशन पूरा कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। बिहार सरकार ने पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों के ऊपर हो रहे लगातार हमले को लेकर उन्हें सेल्फ डिफेंस के लिए आर्म्स लाइसेंस देने का फैसला लिया है। हालांकि जनप्रतिनिधि को आर्म्स का लाइसेंस देना है या नहीं इसका अंतिम फैसला जिले के डीएम को लेना होता है। इस निर्देश के बाद पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधि आवेदन करने लगे। आर्म्स लाइसेंस लेने के लिए सभी के पास गन चलाने के की प्रॉपर ट्रेनिंग होनी चाहिए। इसके लिए 3 दिन की राइफल क्लब या शूटिंग ट्रेनिंग सेंटर पर ट्रेनिंग होती है जिसके सर्टिफिकेट को आवेदन के समय अटैच किया जाता है। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम को इनपुट मिला कि जब से आर्म्स के लिए आवेदन की संख्या बढ़ी है, बिहार के राइफल क्लब और शूटिंग ट्रेनिंग सेंटर वाले पैसे लेकर बिना ट्रेनिंग दिए ट्रेनिंग का सर्टिफिकेट दे रहे हैं। इसी सर्टिफिकेट से लोग गन का लाइसेंस ले रहे हैं। यह काम इतनी बारीकी से की जा रही है कि सर्टिफिकेट पर कोई भी सवाल नहीं खड़ा कर सकता है।
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बिहार के आर्म्स ट्रेनिंग सेंटर एक्सपोज-22000 में सर्टिफिकेट:मंत्री श्रेयसी सिंह के चाचा का सेंटर भी, एजेंट बोले- फोटो खिंचाइए, देश में कहीं लीजिए हथियार लाइसेंस
