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बिहार सरकार के पूर्व उद्योग मंत्री और राष्ट्रीय वैश्य महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष समीर महासेठ ने देशभर में चल रहे छात्र आंदोलनों पर केंद्र सरकार से संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं का समाधान बल प्रयोग से नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए। मधुबनी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए महासेठ ने इन आंदोलनों को ‘आजादी के बाद पहली बार अंग्रेज शासनकाल जैसी स्थिति’ बताया। महासेठ ने स्पष्ट किया कि युवाओं की आवाज को लाठीचार्ज, आंसू गैस या किसी भी प्रकार के बल प्रयोग से दबाना उचित नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि यदि छात्रों की कोई मांग या समस्या है, तो सरकार को लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करते हुए उनसे बातचीत करनी चाहिए और उनकी बात गंभीरता से सुननी चाहिए। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में पटना सहित देश के विभिन्न हिस्सों में छात्रों द्वारा प्रदर्शन किए गए हैं। महासेठ ने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने और अपनी चिंताओं को शांतिपूर्ण ढंग से व्यक्त करने का अधिकार है। छात्रों का अपनी समस्याओं को सरकार के समक्ष रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का प्रतीक है, इसलिए उनकी आवाज को अनसुना नहीं किया जाना चाहिए। पूर्व मंत्री ने भारत सरकार से विनम्र निवेदन किया कि वह छात्रों के प्रतिनिधियों से शीघ्र संवाद स्थापित करे और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करे। उन्होंने एक ऐसे सकारात्मक और व्यावहारिक समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया, जिससे किसी भी छात्र को शारीरिक या मानसिक कष्ट का सामना न करना पड़े। समीर महासेठ ने अंत में कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति संवाद, विश्वास और सहभागिता में निहित होती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार और छात्रों के बीच सकारात्मक बातचीत से हर समस्या का शांतिपूर्ण समाधान संभव है।
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वैश्य महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष छात्र आंदोलन पर दिया बयान:समीर महासेठ बोले- "देशभर में छात्र आंदोलनों पर बल प्रयोग गलत"
