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बिहार में 20 लाख आबादी बाढ़ की चपेट में:सहरसा में नमक-सत्तू पर गुजारा, आंगन में डेढ़ फीट पानी, कोसी-गंगा-महानंदा से 5 जिलों में बिगड़ेंगे हालात




“मैंने NDRF, एसडीआरएफ और आपदा प्रबंधन से जुड़ी सभी टीमों को हाई अलर्ट पर रखा है, करीब 4000 सैंडबैग का स्टॉक तैयार किया गया है। सभी जेई को 24×7 ड्यूटी पर रहने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल बैराज में पानी की स्थिति कंट्रोल में है, लेकिन नेपाल में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश हमारी चिंता बढ़ा रही है। इसलिए हर हालात पर पल-पल नजर रखी जा रही है। कोसी में अगर ढाई लाख क्यूसेक से पानी ऊपर हुआ, तो सहरसा, पुर्णिया, मधेपुरा और कटिहार में हालत बिगड़ सकते हैं।” सुपौल के डीएम सावन कुमार ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कोसी के बढ़ते जलस्तर, नेपाल में जारी भारी बारिश और संभावित बाढ़ के खतरे को लेकर खुलकर जानकारी दी। नेपाली पानी से बिहार के कितने जिलों में अलर्ट है? कोसी-गंगा और महानंदा का जलस्तर फिलहाल किस स्थिति में है? कोसी किन-किन जिलों के कितने इलाकों को प्रभावित कर रही है? बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग क्या कह रहे हैं? और प्रशासन ने किस स्तर की तैयारियां कर रखी हैं? पढ़िए पूरी ग्राउंड रिपोर्ट… पहले कोसी में जलस्तर की तस्वीरें… सहरसा और कटिहार में हालात बेहत खराब कोसी बिहार में 5 जिलों से होकर बहती है, इन जिलों के 35 प्रखंडों में हर साल किसी न किसी तरह तबाही मचाती है। पिछले एक हफ्ते से लागातार बारिश और नेपाल में मुसलाधार वर्षा के कारण को लेकर दैनिक भास्कर की जिला रिपोर्टर की टीम इन जिलों के हालात को जानने के लिए ग्राउंड पर पहुंची, जहां पता चला कि सुपौल, सहरसा, कटिहार और किशनगंज में करीब 20 लाख से ज्यादा की आबादी बाढ़ और आपदाओं से प्रभावित हैं। सबसे ज्यादा सहरसा और कटिहार में हालात खराब है। नमक-सत्तू पर जिंदा हैं, मवेशी तीन दिन से भूखा
सहरसा के केदली पंचायत के रहने वाले रामदेव शर्मा ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बाढ़ और अपने इलाकों की समस्याओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछले एक हफ्ते से नमक और सत्तू पर जिंदा हैं, मवेशी तो तीन से भूखा है, आंगन में डेढ़ फीट पानी है, जाए तो जाए कहां, हमलोगों को एक नाव और प्लास्टिक का इंतजाम आपलोग करवा दीजिए, ताकि हम खुद से ही कोई व्यवस्था कर लें, प्रशासन सूद लेने नहीं आया, पानी सूखने के बाद कागज पर हस्ताक्षर कराने आएंगे तब उनसे पूछेंगे, हर बार वो यही करते हैं। सहरसा में के नवहट्टा, महिषी और सलखुआ के 30 पंचायतों में करीब 3 लाख की आबादी बहुत बुरी हालत में है। रात में ठीक था, सुबह उठे तो सब जगह पानी-पानी हो गया
केतली पंचायत के रामदेव शर्मा ने कहा कि “सोमवार तक पानी नहीं था। हम लोग बिल्कुल नॉर्मल जिंदगी जी रहे थे। लेकिन मंगलवार सुबह से ही जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा, जिसके बाद हम लोगों का जीना मुहाल हो गया है। घर के चारों तरफ पानी जमा हो गया है, जिससे बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है। अब तक नाव की कोई व्यवस्था नहीं कराई गई है। नीचे से बाढ़ का पानी और ऊपर से बारिश, दोनों ने हम लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है। जिला प्रशासन से हमारी मांग है कि जल्द से जल्द नाव और प्लास्टिक की व्यवस्था कराई जाए।” नेता कागज पर ही नाव चलवाते हैं
नवहट्टा प्रखंड के असे गांव की सुनीता देवी ने कहा, “आंगन में पानी भरा हुआ है। एक से डेढ़ फीट पानी हो जाने की वजह से हम लोगों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि अब कैसे रहेंगे। अब तक नाव का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। वार्ड सदस्य से लेकर जनप्रतिनिधि तक सभी लोग सिर्फ कागज पर ही नाव चला लेते हैं। अगर इस बार गांव के जनप्रतिनिधि हम लोगों से हस्ताक्षर लेने आएंगे, तो हम लोग हस्ताक्षर भी नहीं करेंगे। रात करीब 12 बजे से पानी बढ़ना शुरू हुआ था और धीरे-धीरे पूरा गांव पानी से भर गया।” सुपौल में कोसी बांध से सटे इलाकों में हालत खराब
सुपौल जिले के बसंतपुर, निर्मली, सरायगढ़, किशनपुर, मरौना और सुपौल सदर प्रखंड के कोसी तटबंध के भीतर बसे गांव हर साल बाढ़ से प्रभावित होते हैं। हालांकि फिलहाल इन गांवों में बाढ़ जैसी स्थिति नहीं है। अभी नदी में ही पानी है। सिर्फ कुछ ऐसे परिवार प्रभावित हैं, जिन्होंने नदी के भीतर या निचले इलाकों में घर बना रखे हैं। प्रशासन का कहना है कि कोसी में करीब ढाई लाख क्यूसेक से अधिक पानी आने पर हालात बिगड़ने शुरू होंगे। इधर, बड़हा गांव के देव नारायण मंडल ने बताया, “बाढ़ का पानी घर के दरवाजे तक पहुंच गया है। आने-जाने के लिए कोई सरकारी व्यवस्था नहीं है। मजबूरी में निजी नाव का सहारा लेना पड़ता है। नदी पार कराने के लिए प्रति व्यक्ति 50 रुपये लिए जाते हैं। रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है।” बाढ़ प्रभावित इलाके के लोगों का कहना है कि आने-जाने का एकमात्र सहारा नाव है। कई जगहों तक पहुंचने में करीब दो घंटे लग जाते हैं। जहां नाव नहीं पहुंचती, वहां कपड़े भिगोकर पानी पार करना पड़ता है। ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक प्रशासन या किसी विभाग का कोई अधिकारी हाल जानने नहीं पहुंचा है। खाने-पीने का इंतजाम भी लोगों को अपने दम पर ही करना पड़ रहा है। मधेपुरा में एक दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में
मधेपुरा के चौसा और आलमनगर प्रखंड के करीब एक दर्जन गांवों में कोसी नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। फिलहाल निचले इलाकों में पानी घुसना शुरू हो गया है। अभी ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन जैसे-जैसे कोसी का जलस्तर बढ़ेगा, लोगों की मुश्किलें भी बढ़ती जाएंगी। नदी किनारे कई जगहों पर तेज कटाव भी हो रहा है। मंगलवार को डीएम अभिषेक रंजन कटाव प्रभावित इलाके में पहुंचे और हालात का जायजा लिया। उन्होंने फ्लड फाइटिंग के सहायक अभियंता को तुरंत जरूरी काम शुरू करने का निर्देश दिया। संवेदनशील इलाकों नजर रखी जा रही है डीएम ने कहा कि संभावित बाढ़ और कटाव को देखते हुए सभी विभाग पूरी तरह अलर्ट रहें। राहत और बचाव के सभी इंतजाम पहले से तैयार रखें और जरूरत के सभी संसाधन उपलब्ध रहें। साथ ही संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखने और बाढ़ से पहले की सभी तैयारियां समय पर पूरी करने के निर्देश भी दिए। निरीक्षण के दौरान डीएम ने गांव के लोगों और जनप्रतिनिधियों से बात कर बाढ़, कटाव और दूसरी समस्याओं की जानकारी ली। उन्होंने भरोसा दिलाया कि लोगों की सुरक्षा जिला प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी की गई है। कटिहार में कई बीघा जमीन पानी में समाई
इधर, कटिहार में गंगा का जलस्तर भी बढ़ता दिखा है, जिले में कोसी और गंगा के जलस्तर बढ़ने से कुर्सेला प्रखंड के तटीय इलाकों में कटाव तेज हो गया है। नदी की तेज धार में किसानों की कई बीघा उपजाऊ जमीन देखते ही देखते बह गई। कटाव तेजी से गांवों की ओर बढ़ रहा है, जिससे तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते कटाव नहीं रोका गया, तो कई घर भी नदी में समा सकते हैं। जेसीबी से मिट्टी काटकर धार मोड़ने की कोशिश
कटाव रोकने के लिए प्रशासन ने नदी किनारे जेसीबी से करीब 10 मीटर तक मिट्टी हटाकर नदी की धार मोड़ने और उसकी रफ्तार कम करने का काम शुरू कराया। लेकिन काम शुरू होते ही कुछ ग्रामीणों ने विरोध कर दिया। उनका कहना था कि इससे कटाव रुकने के बजाय और बढ़ सकता है। विरोध के बाद जेसीबी को कुछ देर के लिए वापस लौटना पड़ा। मामले की जानकारी मिलने पर एसडीएम प्रद्युम्न सिंह यादव मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से बात की और बताया कि यह काम तकनीकी सलाह के आधार पर कराया जा रहा है। अधिकारियों के समझाने और भरोसा दिलाने के बाद ग्रामीण मान गए, जिसके बाद दोबारा कटाव रोकने का काम शुरू कराया गया। ग्रामीण बोले- हमारा गांव छोड़िए, घर बचा लीजिए कटिहार के तिनघड़िया प्रखंड के रहने वाले रमानंद ठाकुर ने कहा कि नदी का कटाव तेजी से हमारे गांव की ओर हो रहा है, हम लोग बस इतना कहना चाह रहे हैं, कि हमारा गांव तो डूब जाएगा, लेकिन हमारा घर बचा लीजिए, क्योंकि घर रहेगा, तभी हमलोग भी रह पाएंगे। चुनाव के टाइम में नेताओं ने कहा था कि 240 करोड़ से कटाव को रोकने की प्रयोजनाए आएगी, लेकिन अभी तक किसी का कुछ पता नहीं है। कुर्सेला के प्रमोद कुमार ने कहा कि पानी घर से 100 मीटर की दूरी पर पहुंच गया है, एक जेसीबी बस भेज दिया गया है, जिससे कुछ होने वाला नहीं है। चुनाव के टाइम में 240 करोड़ का ढिंढोरा पीटा गया। बोला गया कि न्यू टेक्नोलॉजी के आधार पर दिसंबर-जनवरी तक काम स्टार्ट हो जाएगा लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। किशनगंज के 4 नदियों में बढ़ रहा जलस्तर
किशनगंज जिले से होकर गुजरने वाली महानंदा, मेची, कनकई और रतुआ नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इसके चलते जिले में बाढ़ और कटाव का खतरा गहरा गया है। नदियों का पानी धीरे-धीरे निचले इलाकों की ओर बढ़ने लगा है, जिससे लोगों की चिंता बढ़ गई है। कई जगहों पर पानी आबादी वाले इलाकों तक पहुंचने लगा है। हालात को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट पर है। उधर, शहर की लाइफलाइन मानी जाने वाली रमजान नदी भी उफान पर है। जलस्तर बढ़ने से नदी का पानी निचले इलाकों में घुस गया है। सबसे ज्यादा असर माझिया और खगड़ा इलाके में देखने को मिल रहा है, जहां दोनों इलाकों को जोड़ने वाला डायवर्सन पूरी तरह पानी में डूब गया है। माझिया और खगड़ा के बीच संपर्क टूटा
डायवर्सन पर पानी चढ़ने से माझिया और खगड़ा के बीच संपर्क पूरी तरह टूट गया है। लोगों का आना-जाना बंद हो गया है। रोजमर्रा के काम, कारोबार और जरूरी सेवाएं भी प्रभावित होने लगी हैं। स्थानीय निवासी अली का कहना है कि अगर इसी तरह जलस्तर बढ़ता रहा, तो कई और बस्तियों में भी बाढ़ का पानी घुस सकता है। वहीं नदी किनारे रहने वाले परिवार कटाव को लेकर डरे हुए हैं। प्रशासन लगातार जलस्तर पर नजर बनाए हुए है। संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है और लोगों से नदी किनारे बेवजह नहीं जाने की अपील की गई है। मौसम विभाग ने भी लगातार बारिश और ऊपरी इलाकों से पानी आने के कारण आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ने की आशंका जताई है। फिलहाल जिले के कई हिस्सों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है।



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