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Supreme Court on CBSE 3-Language Policy


नई दिल्ली8 घंटे पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि कोई भी भाषा सीखना कभी बेकार नहीं जाता है।

साथ ही इसे लागू करने में आने वाली चुनौतियों को लेकर सरकार और सीबीएसई से 10 दिन में जवाब मांगा है। अब 14 दिन बाद 29 जुलाई को इस मामले में सुनवाई होगी।

दरअसल, थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी मौजूदा 2026-27 सेशन से लागू कर दी गई है। नई पॉलिसी के मुताबिक स्टूडेंट्स को 2 भारतीय भाषाएं और एक विदेशी भाषा पढ़नी होगी। ऐसे में उन्हें वे भाषाएं छोड़नी पड़ेंगी, जिन्हें वे क्लास 5 से लगातार पढ़ रहे हैं।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि CBSE ने तैयारी के बिना तीन-भाषा नीति लागू कर दी है। स्कूलों में पर्याप्त टीचर, किताबें और जरूरी एकेडमिक इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद नहीं है, जिससे स्टूडेंट-टीचर को परेशानी हो रही है।

थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी से जुड़े सवाल-जवाब, जो आपको जानना जरूरी है

1. मामला क्या है? जवाब: सुप्रीम कोर्ट में CBSE के उस नियम को चुनौती दी गई है, जिसके तहत 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया है। इनमें कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। हालांकि, CBSE ने थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर 6 जून को यूटर्न लिया और नई गाइडलाइन जारी की थी। इसके मुताबिक, इस साल 10वीं में पढ़ रहे छात्रों को तीसरी भाषा की परीक्षा नहीं देनी होगी।

7वीं, 8वीं और 9वीं के वे छात्र, जिन्होंने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुनी हैं, वे अपनी वही भाषाएं जारी रख सकेंगे। हालांकि, उन्हें इसके साथ एक भारतीय भाषा भी पढ़नी होगी। पूरी खबर पढ़ें

2. नए नियम में क्या बदलाव हुआ है? जवाब: पहले कई छात्र अंग्रेजी के साथ एक भारतीय और एक विदेशी भाषा (जैसे फ्रेंच, जर्मन) पढ़ते थे। अब नियम कहता है कि तीन में से कम-से-कम दो भाषाएं भारतीय होनी चाहिए। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में ही ली जा सकेगी।

3. याचिकाएं किसकी तरफ से लगाई गई थीं? जवाब: याचिकाएं छात्र यशिका भंडारी, अमनदीप कौर और अर्पण रॉय चौधरी ने दायर की थीं। याचिकाकर्ताओं की तरफ से सीनियर एडवोकेट आनंद ग्रोवर, सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी और गोपाल शंकरनारायणन ने पैरवी की। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने सुनवाई की।

4. याचिकाकर्ताओं की आपत्ति क्या है? जवाब: नियम अचानक लागू कर दिया गया। कई भाषाओं की किताबें अभी उपलब्ध नहीं हैं। स्कूलों में संबंधित भाषाओं के शिक्षक नहीं हैं। इससे छात्रों और स्कूलों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

5. कोर्ट में किताबों को लेकर क्या दलील दी गई? जवाब: सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने पर रोक लगनी चाहिए। सीनियर एडवोकेट आनंद ग्रोवर, सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने कहा कि 22 भारतीय भाषाओं में से अभी केवल 3 भाषाओं की किताबें उपलब्ध हैं। ऐसे में बाकी भाषाओं में पढ़ाई कैसे शुरू होगी?

6. शिक्षकों को लेकर क्या समस्या बताई गई? जवाब: वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि अगर किसी स्कूल में नई भारतीय भाषा पढ़ानी होगी, तो उसके लिए प्रशिक्षित शिक्षक चाहिए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इतने कम समय में शिक्षक और बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना संभव नहीं है।

7. क्या विदेशी भाषा पूरी तरह बंद हो जाएगी? जवाब: नहीं। छात्र फ्रेंच, जर्मन, जापानी जैसी विदेशी भाषाएं पढ़ सकते हैं, लेकिन पहले उन्हें दो भारतीय भाषाएं पढ़नी होंगी। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में होगी।

8. तीसरी भाषा (R3) का बोर्ड एग्जाम होगा? जवाब: नहीं। CBSE ने कहा है कि कक्षा 10 के बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा (R3) का बोर्ड एग्जाम नहीं होगा, ताकि छात्रों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।

10. अभी आगे क्या होगा? जवाब: केंद्र, CBSE और NCERT अपना जवाब दाखिल करेंगे। इसके बाद 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि इस नीति पर आगे क्या आदेश देना है।

34 साल बाद नई शिक्षा नीति 2020 लाई गई

नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) को भारत सरकार ने 29 जुलाई, 2020 को मंजूरी दी थी। यह 34 साल बाद भारत की शिक्षा नीति में एक बड़ा बदलाव है। इससे पिछली नीति 1986 में बनाई गई थी, जिसे 1992 में अपडेट किया गया था। इसका उद्देश्य भारत की शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुसार ढालना है, ताकि छात्र व्यावहारिक ज्ञान मिले और वे स्किल सीखें।

नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए केंद्र ने 2030 तक का लक्ष्य रखा है। शिक्षा संविधान में समवर्ती सूची का विषय है, जिसमें राज्य और केंद्र सरकार दोनों का अधिकार होता है। इसलिए यह जरूरी नहीं कि राज्य सरकारें इसे पूरी तरह अप्लाई करें। टकराव होने पर दोनों पक्षों को आम सहमति से विवाद सुलझाने का सुझाव दिया गया है।

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CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में 19 लोगों के एक ग्रुप ने चुनौती दी। इनमें स्टूडेंट्स, पेरेंट्स और टीचर्स शामिल हैं।

ये याचिका क्लास 9वीं में थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू किए जाने के विरोध दायर की गई। इसके खिलाफ SC अगले हफ्ते सुनवाई करेगा। CBSE ने 15 मई को एकेडमिक सेशन 2026-27 से थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने का सर्कुलर जारी किया था। पूरी खबर पढ़ें…

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