पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने अपनी करीब 30 साल की क्रिकेट यात्रा और सफलता के बारे में खुलकर बात की।
क्रिकेटर से नेता बने हरभजन सिंह ने पहली बार आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर BJP में जाने की वजह बताई। हरभजन सिंह उर्फ भज्जी ने एक न्यूज एजेंसी से बातचीत में कहा- जब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उन्हें AAP में शामिल होने के लिए कहा था, तब उनका मकसद राज्यसभा म
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हरभजन ने कहा- मैं जिस काम के लिए AAP में शामिल हुआ था, वह हो ही नहीं रहा था। अगर मेरे सुझाए रास्ते पर छोटा सा कदम भी उठाया जाता तो मैं पार्टी नहीं छोड़ता। लेकिन पार्टी में शामिल होने का मेरा मूल मकसद ही पूरा नहीं हो रहा था। इसलिए मैंने पार्टी छोड़ दी, क्योंकि मेरे सुझावों पर कोई प्रतिक्रिया तक नहीं मिल रही थी।
उन्होंने कहा कि जिस काम के लिए वह पार्टी में शामिल हुए थे, वही पूरा नहीं हो रहा था। “अगर मेरे सुझावों की दिशा में छोटा सा कदम भी उठाया जाता तो मैं पार्टी नहीं छोड़ता। लेकिन मेरी बातों का कोई जवाब नहीं मिला, इसलिए मैंने AAP छोड़ दी। पार्टी के सामने अपना विजन रखने की लगातार कोशिश के बावजूद उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा था, जिससे आखिरकार वह परेशान हो गए।
प्रदर्शन करने वाले कौन, सब जानते हैं AAP छोड़ने के बाद पार्टी की ओर से उन पर विश्वासघात के आरोप लगाए गए थे। हरभजन के घर के बाहर प्रदर्शन भी हुआ और उनका पुतला जलाया गया। इस पर उन्होंने कहा कि वह किसी का नाम नहीं लेना चाहते। उन्होंने कहा कि सभी जानते हैं कि प्रदर्शन करने वाले लोग कौन थे और कहां से आए थे। हरभजन ने कहा कि देश के आम लोग उन्हें उनके क्रिकेट के लिए जानते हैं और उन्होंने उन्हें बहुत प्यार दिया है।
किसी के कहने से मैं गद्दार नहीं हो जाता हरभजन सिंह ने कहा- इस देश का आम आदमी मुझे मेरे क्रिकेट के लिए जानता है और उसने मुझे इतना प्यार दिया है। फिर वे मेरा पुतला क्यों जलाएंगे या मेरे घर के बाहर ‘गद्दार’ क्यों लिखेंगे? मैंने किससे गद्दारी की है?” उन्होंने सवाल किया। हरभजन सिंह ने AAP पर पलटवार करते हुए कहा, “मेरा उनसे सवाल है कि पंजाब की जनता से किए गए बड़े-बड़े वादों का क्या हुआ? आपने पंजाब के लिए क्या किया? यहां गद्दार कौन है? क्या आपने मुझसे पूछा कि मैंने जो किया, वह क्यों किया? सिर्फ मुझे गद्दार कह देने से मैं गद्दार नहीं हो जाता। इसी तरह अगर आप मुझे चोर कह दें तो मैं चोर नहीं बन जाता।
किसी के कहने से मुझे फर्क नहीं पड़ता हरभजन ने कहा, “मेरा दिल भारत और पंजाब के लिए धड़कता है। अपनी मातृभूमि के लिए मेरे मन में जो प्यार है, उसे किसी और से प्रमाणित कराने की जरूरत नहीं है। जो लोग जो कहना चाहते हैं, कहते रहें, इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। अगर मैं इन बातों में उलझकर अपना ध्यान भटकने दूंगा, तो मैं अपना काम नहीं कर पाऊंगा। हरभजन सिंह ने पंजाब में बढ़ती नशे की समस्या पर भी चिंता जताई।
हरभजन बोले- मैं कपिल देव बनना चाहता था इसके अलावा जालंधर के रहने वाले पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने अपनी करीब 30 साल की क्रिकेट यात्रा और सफलता के बारे में खुलकर बात की। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि बचपन में वह कपिल देव जैसा बनना चाहते थे, लेकिन उनकी बॉडी तेज गेंदबाजी के लिए सही नहीं थी।
इसके बाद किसी ने उन्हें स्पिन गेंदबाजी करने की सलाह दी। उस समय उन्हें यह तक नहीं पता था कि स्पिन बॉलिंग क्या होती है, लेकिन किसी के कहने पर उन्होंने गेंद को घुमाने की कोशिश शुरू कर दी।
उन्होंने बताया कि उनके पड़ोस में रहने वाले गुरशरण ने उन्हें स्पिन गेंदबाजी की सलाह दी थी। हरभजन ने इसके लिए उन्हें धन्यवाद भी दिया। हरभजन ने अपनी बल्लेबाजी को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि जब वह क्रिकेट में आए थे तो गेंद को अच्छी तरह हिट कर लेते थे, लेकिन बल्लेबाजी में अक्सर जल्दबाजी करते थे। अगर उन्होंने थोड़ा धैर्य दिखाया होता तो इंटरनेशनल क्रिकेट में दोगुने रन बना सकते थे।
करियर के बाद के दौर में उन्होंने बल्लेबाजी को गंभीरता से लिया और लगातार दो शतक भी लगाए। हालांकि, उनका कहना है कि गेंदबाजी जितनी मेहनत उन्होंने बल्लेबाजी में की होती तो टीम के लिए और ज्यादा रन बना सकते थे।
हरभजन ने साल 2016 में भारत के लिए आखिरी मैच खेला था। इसके बाद 24 दिसंबर 2021 में क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास ले लिया था। इसके बाद मार्च 2022 में राजनीति में एंट्री की। उन्हें AAP सरकार ने पंजाब से राज्यसभा सांसद बनाया। हालांकि 24 अप्रैल 2026 को वे AAP छोड़कर BJP में शामिल हो गए।

हरभजन सिंह की 3 बड़ी बातें…
- 32 विकेट चटकाना वाहेगुरु की मर्जी का परिणाम: पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने एक इंटरव्यू में कहा- भारत के लिए 100 टेस्ट मैच खेलना, टेस्ट क्रिकेट में देश की पहली हैट्रिक लेना और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऐतिहासिक सीरीज में 32 विकेट चटकाना वाहेगुरु की मर्जी और परिवार के त्याग का परिणाम हैं। व्यक्ति जीवन में जो भी हासिल करता है, उसमें उसकी अपनी भूमिका केवल एक माध्यम की होती है। असली दिशा और आशीर्वाद ऊपर वाले का होता है।
- बहनों के तप के कारण ही मुझे सम्मान मिला: उन्होंने कहा कि मेरे पिता का आशीर्वाद, मां का दुलार और बहनों के तप के कारण ही मुझे जीवन में ये तमाम खुशियां और सम्मान हासिल हुआ है। यह कितना बड़ा वहम था कि मैं अहम था, खुदा के बंदे उस वाहेगुरु का शुक्र कर, यह तो उसका तेरे ऊपर रहम था।
- वाहेगुरु की मर्जी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता: उन्होंने कहा कि जब इंसान को यह लगने लगता है कि उसने सब कुछ स्वयं हासिल कर लिया है, तब उसे यह समझना चाहिए कि वाहेगुरु की मर्जी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता। 30 साल तक क्रिकेट को समर्पित रहने के बाद भी मैं अपनी सफलताओं का श्रेय अपनी मेहनत से ज्यादा वाहेगुरु की मेहर और अपने प्रशंसकों व परिवार के समर्थन को देता हूं।
1998 में खेला था पहला टेस्ट
हरभजन सिंह ने अपना पहला टेस्ट मैच 1998 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला था। उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट 2015 में श्रीलंका के खिलाफ खेला था। इसके अलावा पहला वनडे मैच न्यूजीलैंड के खिलाफ 1998 में खेला था। उनका आखिरी वनडे मुकाबला 2015 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ था।
2016 एशिया कप में आखिरी मुकाबला खेला
2016 में हरभजन ने यूएई के खिलाफ एशिया कप में अपना आखिरी टी-20 मैच खेला था। यही उनका आखिरी इंटरनेशनल मैच भी था। IPL में हरभजन के नाम 163 मैच में 150 विकेट दर्ज है। वे मुंबई इंडियंस, चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए खेल चुके हैं।
हरभजन से जुड़े 5 पुराने विवाद जानिए….
- मंकीगेट विवाद (2008): साल 2008 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर सिडनी टेस्ट के दौरान ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर एंड्रयू साइमंड्स ने हरभजन सिंह पर नस्लीय टिप्पणी करने का आरोप लगाया। साइमंड्स का दावा था कि हरभजन ने उन्हें ‘मंकी’ (बंदर) कहा। इस घटना को क्रिकेट इतिहास में ‘मंकीगेट’ के नाम से जाना जाता है। मैच रेफरी ने हरभजन पर तीन मैचों का प्रतिबंध लगा दिया था, जिसके विरोध में भारतीय टीम ने दौरा रद्द करने की चेतावनी दी। बाद में अपील के बाद यह साबित नहीं हो सका कि टिप्पणी नस्लीय थी, जिसके बाद प्रतिबंध हटाकर केवल मैच फीस का 50 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया।
- आईपीएल थप्पड़कांड (2008): इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के पहले सीजन में मुंबई इंडियंस और किंग्स इलेवन पंजाब के बीच खेले गए मैच के बाद एक अभूतपूर्व विवाद खड़ा हो गया। मैच खत्म होने के बाद हरभजन सिंह ने पंजाब के तेज गेंदबाज एस. श्रीसंत को मैदान पर ही थप्पड़ मार दिया, जिसके बाद श्रीसंत कैमरे पर रोते हुए दिखे। इस गंभीर अनुशासनहीनता के चलते बीसीसीआई और आईपीएल गवर्निंग काउंसिल ने कड़ा रुख अपनाया। हरभजन सिंह को आईपीएल के बाकी बचे पूरे सीजन से निलंबित कर दिया गया और उन पर पांच अंतरराष्ट्रीय मैचों का प्रतिबंध भी लगाया गया।
- रॉयल स्टैग विज्ञापन और पगड़ी विवाद (2006): साल 2006 में हरभजन सिंह एक शराब ब्रांड (रॉयल स्टैग) के टीवी विज्ञापन में बिना पगड़ी के खुले बालों के साथ नजर आए। इस विज्ञापन के सामने आते ही सिख समुदाय में भारी रोष पैदा हो गया। अकाल तख्त और विभिन्न सिख धार्मिक संगठनों ने इसे सिख धर्म की मर्यादा और परंपराओं का उल्लंघन बताया। मामले की गंभीरता को देखते हुए और चौतरफा विरोध के बाद हरभजन सिंह को सिख समुदाय से सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी थी। इसके बाद उस विज्ञापन को भी तुरंत प्रभाव से हटा दिया गया था।
- रवींद्र जडेजा के साथ मैदान पर बहस (2013): साल 2013 में वेस्टइंडीज में खेली गई त्रिकोणीय श्रृंखला के एक मैच के दौरान हरभजन सिंह और भारतीय टीम के साथी खिलाड़ी रवींद्र जडेजा के बीच मैदान पर ही तीखी बहस हो गई। वेस्टइंडीज की पारी के दौरान जडेजा की गेंद पर कैच छूटने के बाद दोनों खिलाड़ियों के बीच कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते आक्रामक रूप लेने लगी। स्थिति बिगड़ती देख मैदान पर मौजूद अन्य खिलाड़ियों और कप्तान को बीच-बचाव करना पड़ा। टीवी कैमरों में कैद हुई इस घटना से भारतीय टीम के अनुशासन और ड्रेसिंग रूम के माहौल पर सवाल उठे थे।
- नेशनल क्रिकेट अकादमी (NCA) से निष्कासन (2000): करियर के शुरुआती दौर यानी साल 2000 में हरभजन सिंह को बेंगलुरु स्थित नेशनल क्रिकेट अकादमी (NCA) से बाहर कर दिया गया था। तत्कालीन एनसीए निदेशक और पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव ने उन पर अनुशासनहीनता, शिकायतें नजरअंदाज करने और ट्रेनिंग के नियमों का पालन न करने का आरोप लगाया था। इस विवाद के कारण उनका करियर शुरू होने से पहले ही संकट में आ गया था। हालांकि, इस झटके के बाद हरभजन ने अपने रवैये में सुधार किया और 2001 की ऑस्ट्रेलिया सीरीज से भारतीय टीम में शानदार वापसी की।
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पूर्व क्रिकेटर और आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़ भाजपा में गए राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह की ओर से सोशल मीडिया पर 2 युवकों का नशे में झूमते हुए वीडियो शेयर करने पर विवाद खड़ा हो गया है। सांसद ने राज्य में नशे की स्थिति और सरकारों की नीतियों पर दुख जाहिर किया था। (पढ़ें पूरी खबर)
