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हर घर तिरंगा अभियान के लिए तैयार हो रहा तिरंगा:बेगूसराय में जीविका दीदियों को झंडे का ऑर्डर, 72 से महिलाएं बनाएंगी 1.20 लाख झंडा




हर घर तिरंगा अभियान के तहत जीविका दीदियों द्वारा तैयार किए गए तिरंगे झंडों की जिलेभर में व्यापक मांग देखने को मिल रही है। विभिन्न सरकारी विभागों, औद्योगिक संस्थानों, सामुदायिक संगठनों तथा आम नागरिकों की ओर से जीविका दीदियों के उत्पादित 1 लाख 20 हजार से अधिक तिरंगे झंडों की खरीद के लिए आदेश दिए गए हैं। प्राप्त आदेशों के आलोक में जीविका दीदियाँ बेगूसराय सदर प्रखंड के पचंबा और बरौनी स्थित सिलाई केंद्रों में बड़े पैमाने पर तिरंगे झंडों का निर्माण कर रही हैं। यह अभियान न केवल राष्ट्रभक्ति की भावना को सशक्त कर रहा है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और आय सृजन का महत्वपूर्ण माध्यम भी बनकर उभरा है। झंडे के प्रोड्क्शन, डिमांड से जीविका दीदियां उत्साहित जीविका की ओर से संचालित जिज्ञासा जीविका दीदी सिलाई घर (सदर) तथा प्रतिज्ञा दीदी सिलाई घर (बरौनी) में 72 जीविका दीदियां तिरंगे झंडों के निर्माण में जुटी हुई हैं। तैयार किए गए झंडों की आपूर्ति आईओसीएल, एचयूआरएल, एनटीपीसी, जिला प्रशासन, विभिन्न सामुदायिक संगठनों सहित अन्य संस्थानों और आम लोगों को की जा रही है। अब तक आईओसीएल द्वारा 50 हजार, एचयूआरएल द्वारा 40 हजार तथा एनटीपीसी द्वारा 30 हजार तिरंगे झंडों का क्रय आदेश दिया गया है। झंडों के उत्पादन और सफल बिक्री से जुड़ी जीविका दीदियां काफी उत्साहित हैं। जीविका के गैर-कृषि प्रबंधक श्याम सुन्दर भगत ने बताया कि पचंबा स्थित स्टिचिंग यूनिट और बरौनी यूनिट में 72 से अधिक जीविका दीदियां इस कार्य से जुड़ी हुई हैं। जीविका दीदियों ने बताया कि हर घर तिरंगा अभियान के तहत विभिन्न विभागों और संस्थानों से लगभग 1.20 लाख तिरंगे झंडों की आपूर्ति का आदेश प्राप्त हुआ। सिलाई केंद्रों से जुड़ी दीदियों ने निर्धारित समय-सीमा के भीतर झंडों का निर्माण कर संबंधित संस्थानों को समय पर आपूर्ति करने के लिए लगातार कार्य किया। जिले के विभिन्न प्रखंडों से भी झंडों की अतिरिक्त मांग प्राप्त हुई, जिसकी पूर्ति में जिला प्रशासन का सराहनीय सहयोग मिला। जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक अविनाश कुमार ने बताया कि जीविका दीदियों द्वारा तैयार किए गए तिरंगे झंडों ने हर घर तिरंगा अभियान को नई गति प्रदान की है। यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए आय सृजन, रोजगार के अवसर, महिला उद्यमिता और आर्थिक सशक्तीकरण का प्रभावी माध्यम बनकर सामने आई है। स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिल रहा है।



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