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बिहारशरीफ के 64 मौजों का बनेगा मास्टर प्लान:84.77 वर्ग किमी में होगा शहर का विस्तार; सड़क, पार्किंग और जलनिकासी पर रहेगा जोर




नालंदा जिला आयोजना क्षेत्र प्राधिकार के तत्वावधान में समाहरणालय परिसर स्थित हरदेव भवन में बुधवार को ‘जीआईएस आधारित मास्टर प्लान फॉर बिहारशरीफ प्लानिंग एरिया (स्टेज-5)’ को लेकर हितधारक परामर्श बैठक हुई। पटना प्रमंडल के प्रमंडलीय आयुक्त-सह-अध्यक्ष, नालंदा जिला आयोजना क्षेत्र प्राधिकार की अध्यक्षता में हुई बैठक में बिहारशरीफ के अगले दशकों के सुनियोजित विकास की प्राथमिकताओं पर चर्चा की गई। बैठक में नालंदा सांसद कौशलेंद्र कुमार, बिहारशरीफ विधायक डॉ. सुनील कुमार, राजगीर विधायक, नगर निगम की महापौर अनीता देवी, उप-महापौर आयशा शाहीन, विधान पार्षद, ग्रामीण विकास मंत्री के प्रतिनिधि, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। बिहारशरीफ नगर निगम के 36 और बाहर के 28 मौजे होंगे शामिल मास्टर प्लान तैयार करने वाली परामर्शी एजेंसी डीडीएफ कंसल्टेंट्स ने प्रस्तावित विकास योजनाओं का प्रस्तुतीकरण दिया। इसमें आयोजना क्षेत्र की भौगोलिक संरचना, संभावित भूमि उपयोग, आधारभूत ढांचे के विस्तार और भविष्य की शहरी जरूरतों की जानकारी दी गई। मास्टर प्लान का कुल दायरा करीब 84.77 वर्ग किलोमीटर होगा। इसमें बिहारशरीफ नगर निगम के 40.13 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले 36 मौजे और नगर निगम सीमा से बाहर के 28 ग्रामीण मौजे शामिल होंगे। इस तरह कुल 64 राजस्व ग्रामों को आयोजना क्षेत्र में शामिल किया जाएगा। इसमें बिहारशरीफ, नूरसराय और रहुई प्रखंड के आशा नगर, बरियारपुर, बाजिदपुर, भैसासुर काजी, चक हजियाइन, चानपुरा, चिश्तियाना, देवी सराय, कोसुक, मगरा, माही खंदक, पीर पहाड़ी, राणा बिगहा, सोहडीह, तकिया कलां, बसमान बिगहा, लखरावां, तुंगी, मोरातालाब, सिकंदरपुर दिगपुरा और मंगराबाद समेत 64 राजस्व ग्राम शामिल हैं। सड़क चौड़ीकरण, पार्किंग और जल निकासी पर रहेगा फोकस प्रस्तुतीकरण के बाद जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने शहर की मौजूदा समस्याओं और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सुझाव दिए। बैठक में सुगम यातायात व्यवस्था, प्रमुख सड़कों के चौड़ीकरण, पार्किंग, बेहतर जल निकासी, सीवरेज सिस्टम, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और घर-घर शुद्ध पेयजल आपूर्ति को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। इसके अलावा अनियंत्रित शहरीकरण रोकने के लिए आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों का स्पष्ट सीमांकन करने का सुझाव दिया गया। नए शिक्षण और स्वास्थ्य संस्थानों की स्थापना के साथ पार्कों, खुले स्थानों और स्थानीय जलाशयों के संरक्षण पर भी चर्चा हुई। आम लोग और भू-स्वामी भी दर्ज करा सकेंगे आपत्तियां बैठक में बताया गया कि मास्टर प्लान को बिहार शहरी आयोजना एवं विकास अधिनियम, 2012 के तहत वैधानिक रूप से लागू किया जाएगा। यह भविष्य में भूमि उपयोग के नियमन का कानूनी आधार बनेगा। अधिकारियों के अनुसार, जनप्रतिनिधियों से मिले सुझावों को प्रारूप में शामिल करने के बाद इसे सार्वजनिक किया जाएगा। इसके बाद स्थानीय नागरिक, किसान, व्यापारी और भू-स्वामी अपनी आपत्तियां और सुझाव दर्ज करा सकेंगे। सरकार के सक्षम स्तर से अनुमोदन और राजपत्र में प्रकाशन के बाद ही मास्टर प्लान अंतिम रूप से लागू होगा। इससे बिहारशरीफ और आसपास के ग्रामीण इलाकों का सुनियोजित, संतुलित और सतत विकास करने की योजना है।



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