![]()
कटिहार जिला मुख्यालय से करीब 5 किलोमीटर दूर मोंगरा गांव में स्थित प्राचीन वन देवी सार्वजनिक दुर्गा मंदिर गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल है। यहां मां दुर्गा की पूजा विधि-विधान से होती है। मंदिर के तीन ओर मुस्लिम बहुल आबादी है, फिर भी हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग आपसी भाईचारे के साथ पूजा में सहयोग करते हैं। 1805 में हुई थी मंदिर की शुरुआत मंदिर अध्यक्ष अरुण कुमार आजाद ने बताया कि दुर्गा मंदिर की स्थापना 1805 में हुई थी। करीब 220 साल पुराने इस मंदिर का स्वरूप समय के साथ बड़ा होता गया। सरपंच दिनेश मोहन ठाकुर के अनुसार, शुरुआत छोटी थी, लेकिन धीरे-धीरे मंदिर का विस्तार हुआ। वर्तमान में मंदिर परिसर 29 डिसमिल में फैला है। नवमी-दशमी को रात्रि जागरण, लगता है मेला मंदिर के सचिव संत कुमार बारिक ने बताया कि पूजा के दौरान परिसर में विशाल मेला लगता है। महानवमी और दशमी को रात्रि जागरण का भी आयोजन होता है। महानवमी पर माता के दरबार में बलि प्रदान पूजा की जाती है। हिंदू-मुस्लिम मिलकर संभालते हैं पूजा की व्यवस्था पूजा कमेटी से जुड़े मो राजा खान और भुट्टू ने बताया कि मंदिर सभी के लिए आस्था का केंद्र है। उन्होंने कहा कि हिंदू-मुस्लिम समुदाय के लोग बिना किसी भेदभाव, जात-पात या धर्म के अंतर के आपसी भाईचारे के साथ पूजा को सफल बनाने में जुटे रहते हैं। उनके अनुसार, सभी लोग तन-मन-धन से सहयोग करते हैं और दिन-रात मिलकर कार्यक्रम की व्यवस्था संभालते हैं। मोंगरा गांव का यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ आपसी सद्भाव और भाईचारे की परंपरा को भी आगे बढ़ा रहा है।
Source link
कटिहार में हिंदू-मुस्लिम मिलकर करते हैं पूजा:220 साल पुराने दुर्गा मंदिर में भाईचारे की मिसाल, नवमी-दशमी पर लगता है मेला
