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आज (26 सितंबर) भाद्रपद (भादौ) मास की पूर्णिमा है और आज पूर्णिमा तिथि पर मृत सदस्यों के लिए श्राद्ध कर्म किए जाएंगे। कल यानी 27 सितंबर से आश्विन मास शुरू होगा। आश्विन कृष्ण पक्ष में पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) मनाते हैं। इन दिनों में पितरों के तर्पण और पिंडदान जैसे शुभ कर्म किए जाते हैं। मान्यता है कि पितृ पक्ष में पितरों के लिए श्राद्ध कर्म करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, पितृ पक्ष की सभी तिथियों का विशेष महत्व है। सामान्यतः जिस व्यक्ति की मृत्यु जिस तिथि पर हुई हो, पितृ पक्ष में उसी तिथि पर उस मृत व्यक्ति के नाम पर श्राद्ध कर्म किया जाता है। जिन लोगों की मृत्यु तिथि की जानकारी नहीं है, उनके लिए पितृ पक्ष की अलग-अलग तिथियां बताई गई हैं। जानिए किस तिथि पर किसका श्राद्ध किया जा सकता है… जिन लोगों की मृत्यु किसी भी माह की पूर्णिमा तिथि पर हुई हो, उनका श्राद्ध इस दिन किया जाता है। पूर्णिमा श्राद्ध से ही पितृ पक्ष का आरंभ माना जाता है। इस तिथि पर उन लोगों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु प्रतिपदा तिथि पर हुई हो। यदि नाना-नानी के परिवार में किसी का देहांत हुआ हो और उसकी मृत्यु तिथि ज्ञात न हो, तो उनका श्राद्ध भी इसी तिथि पर किया जाता है। इन तिथियों पर मृत लोगों का श्राद्ध कर्म किया जाता है, जिनकी मृत्यु इन तिथियों पर हुई हो। पंचमी तिथि पर मृत व्यक्ति का श्राद्ध किया जाता है। जिन अविवाहित व्यक्ति लोगों की मृत्यु तिथि मालूम नहीं है, उनका श्राद्ध कर्म भी इसी तिथि पर किया जाता है। जिन लोगों की मृत्यु इन तिथियों पर हुई हो, उनका तर्पण और श्राद्ध कर्म इस दिन किया जाता है। इस तिथि पर घर-परिवार की उन महिलाओं का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु तिथि मालूम नहीं है। किसी भी महीने की दशमी तिथि पर मृत लोगों का श्राद्ध इस दिन किया जाता है। इस तिथि पर उन लोगों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु इस तिथि पर हुई है। इनके अलावा इस दिन मृत संन्यासियों का श्राद्ध भी किया जाता है। द्वादशी तिथि पर मृत लोगों का श्राद्ध इस दिन किया जाता है। यदि किसी छोटे बच्चे या शिशु की मृत्यु हो गई हो, तो उनका श्राद्ध त्रयोदशी तिथि पर करने का विधान है। जिन लोगों की मृत्यु किसी दुर्घटना, शस्त्र-घात, विष, अकाल मृत्यु या हिंसक घटना में हुई हो, उनका श्राद्ध पितृ पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर किया जाना चाहिए। यह तिथि पितृ पक्ष का अंतिम दिन है। सर्वपितृ अमावस्या पर परिवार के उन सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों के लिए श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु तिथि मालूम नहीं है या किसी कारणवश हम पितृ पक्ष में श्राद्ध करना भूल गए हैं।
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भाद्रपद पूर्णिमा आज और 10 अक्टूबर तक रहेगा पितृ पक्ष:पितरों के लिए श्राद्ध-तर्पण करने से घर-परिवार में बनी रहती है सुख-समृद्धि, जानिए किस तिथि पर किसका श्राद्ध करें
