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सहरसा में कार्रवाई के विरोध में डॉक्टरों का आक्रोश:सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं ठप, डॉक्टर-पत्रकार में हुआ था विवाद




सहरसा सदर अस्पताल में डॉक्टरों और पत्रकार के बीच हुए विवाद के बाद सरकार की दंडात्मक कार्रवाई से बिहार भर के डॉक्टरों में आक्रोश है। बिहार राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) ने कार्रवाई को एकतरफा करार देते हुए पूरे राज्य में अनिश्चितकालीन ओपीडी बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। सरकारी अस्पतालों में दोपहर 3 बजे के बाद ओपीडी सेवाएं बंद कर दी गई। इसको लेकर आज बेगूसराय सदर अस्पताल में हुए भासा की बैठक में सदस्यों ने कहा कि सहरसा सदर अस्पताल में पत्रकार के साथ हुए विवाद के बाद राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तत्कालीन प्रभारी अधीक्षक डॉ. एसके आजाद और चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रौशन लाल को उनके पदों से हटाकर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया। किसी भी लोकसेवक पर दंडात्मक कदम उठाने से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत शो-कॉज (स्पष्टीकरण) जारी किया जाना चाहिए था और निष्पक्ष जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ही निर्णय लिया जाना चाहिए था। सभी वर्ग के लोगों डॉक्टर, मरीज, जनता और मीडिया के लिए मर्यादा और मापदंड निर्धारित होने चाहिए, जिससे ऐसी अप्रिय घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। जांच कमेटी का गठन होना चाहिए था डॉ. रामरेखा ने कहा कि सहरसा में डॉक्टरों और पत्रकारों के बीच हुई घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण थी, लेकिन इसके बाद बिहार सरकार ने बिना किसी जांच, बिना किसी शो-कॉज नोटिस और बिना स्पष्टीकरण मांगे डॉक्टरों को हटाकर मुख्यालय बुला लिया। यह तरीका पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण और एकतरफा है। सरकारी सेवा संहिता के अनुसार निष्पक्ष जांच कमेटी का गठन होना चाहिए था। जांच कमेटी किसी डॉक्टर को दोषी ठहराती और कार्रवाई की सिफारिश करती, तो संघ को कोई आपत्ति नहीं होती। हमारी आपत्ति केवल इस गलत प्रक्रिया को लेकर है। अमर्यादित भाषा का समर्थन नहीं किया जा सकता। कई बार अत्यधिक मानसिक दबाव और तनावपूर्ण माहौल में ऐसी स्थिति बन जाती है। समाज में डॉक्टरों और पत्रकारों दोनों को एक-दूसरे के कार्यक्षेत्र को सम्मान देना चाहिए। ‘पत्रकारों के लिए सीमा तय होना चाहिए’ डॉ. रामरेखा ने स्वास्थ्य संस्थानों में पत्रकारों के प्रवेश और डॉक्टरों के काम करने के माहौल को लेकर एक व्यापक नियमावली (Directives) बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि पत्रकारों के अस्पतालों में आने, कवरेज करने और डॉक्टरों से संवाद करने की एक निश्चित समय-सीमा तय होनी चाहिए। संवेदनशील क्षेत्र ऑपरेशन थिएटर (OT) या आपातकालीन कक्ष में बिना अनुमति सीधे प्रवेश करने पर रोक और स्पष्ट सीमा रेखा होनी चाहिए। मौके पर उपस्थित संघ के डॉक्टरों ने यह स्पष्ट किया है कि अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार केवल ओपीडी (OPD) सेवाओं तक ही सीमित रहेगा। मरीजों की जान-माल की सुरक्षा और जनहित को ध्यान में रखते हुए इमरजेंसी (आपातकालीन) सेवाएं, आईसीयू और प्रसव कक्ष जैसी अति-आवश्यक सेवाएं निर्बाध रूप से चालू रहेंगी।



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