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कैमूर जिले के एक दर्जन से अधिक गांवों के किसानों ने औद्योगिक पार्क के लिए जमीन अधिग्रहण के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। किसानों का आरोप है कि प्रशासन ने उनकी उपजाऊ और सिंचित भूमि को गलत तरीके से सर्वे कर ‘बंजर और असिंचित’ बताया है। किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर अपनी समस्याओं और विरोध से अवगत कराया।
संवैधानिक तरीके से उग्र आंदोलन की चेतावनी किसान नेता हेमंत चौबे और करजांव पंचायत के मुखिया राधेश्याम पाल ने मीडिया को बताया कि लगभग 781 एकड़ उपजाऊ जमीन को धोखे से और किसानों को बिना जानकारी दिए अधिग्रहित करने की कोशिश की जा रही है। किसानों का कहना है कि यह जमीन उनकी आजीविका का एकमात्र साधन है। वे किसी भी कीमत पर अपनी पुरखों की जमीन नहीं देंगे। किसानों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे सड़क से लेकर सदन तक संवैधानिक तरीके से उग्र आंदोलन करेंगे। समस्या का उचित समाधान निकालने की मांग वहीं, जिलाधिकारी ने किसानों को आश्वासन दिया है कि मामले की दोबारा जांच के लिए एक अलग टीम बनाई जाएगी। री-सर्वे कराकर इस समस्या का उचित समाधान निकाला जाएगा। हालांकि, किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी एक इंच जमीन भी सरकार को नहीं सौंपेंगे।
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कैमूर में औद्योगिक पार्क के लिए जमीन अधिग्रहण का विरोध:सड़क से लेकर सदन तक उग्र आंदोलन की चेतावनी दी
