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JDU के मोकामा विधायक अनंत सिंह ने पटना स्नातक MLC चुनाव में अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार की बजाय निर्दलीय डॉ. अनुज सिंह का समर्थन करने का ऐलान कर दिया है। हालांकि इसे लेकर 7 सिंतबर को जदयू दफ्तर में प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा के नेतृत्व में अनंत सिंह और नीरज कुमार की बैठक भी हुई थी, लेकिन अनंत सिंह का हालिया बयान बताता है कि मोकामा विधायक अपने स्टैंड पर कायम हैं। अनंत सिंह ने एक मीडिया चैनल से बात करते हुए कहा कि मैं डॉ.अनुज का समर्थन कर रहा हूं। उनसे जब जदयू दफ्तर में हुई मीटिंग के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं हैं। उन्होंने नीरज कुमार का नाम तो नहीं लिया, लेकिन कहा कि उसने (नीरज) 4 विधानसभा चुनाव में मेरा विरोध किया है। तब तो कोई मीटिंग नहीं हुई। उस वक्त पार्टी की तरफ से कुछ नहीं कहा गया। अनंत सिंह ने कहा कि उसने (नीरज कुमार) ही कहा है कि व्यक्ति कुछ नहीं होता पार्टी होती है। तो वो व्यक्ति कैसे हो गया था। 3 सिंतबर 2026 को अनंत सिंह बाढ़ दौरे पर गए थे। उस दौरान उनके साथ पटना स्नातक विधान परिषद सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे डॉ. अनुज सिंह भी थे। नीरज कुमार का साथ देने से इनकार पत्रकारों से बातचीत के दौरान अनंत सिंह ने JDU के MLC नीरज कुमार को समर्थन देने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, ‘एक ही दल JDU में रहने के बावजूद नीरज कुमार ने कभी चुनाव में हमारी मदद नहीं की। इसलिए हम भी इस चुनाव में उनकी मदद नहीं करेंगे। इसी दौरान अनंत सिंह ने अपने विधानसभा क्षेत्र मोकामा के सभी 26 पंचायतों के समर्थकों से निर्दलीय प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह का समर्थन करने की घोषणा कर दी। अनंत सिंह की इस घोषणा से पार्टी के अंदर कलह शुरू हो गई। दरअसल, 16 नवंबर 2026 को बिहार विधान परिषद की 8 सीटें (4 स्नातक, 4 शिक्षक कोटे) की खाली हो रही है। इसमें MLC नीरज कुमार की भी सीट है। अब जानिए विधायक अनंत सिंह के तेवर जदयू MLC नीरज कुमार को लेकर इतने तल्ख क्यों है? बात 24 जून 2015 की है, जब पुटुस हत्याकांड में पटना के तत्कालीन SSP विकास वैभव ने JDU विधायक अनंत सिंह को गिरफ्तार किया। यह वह दौर था जब नीतीश कुमार और लालू यादव एक हो चुके थे और 5 महीने बाद विधानसभा चुनाव था। नीतीश कुमार के सत्ता में आने के बाद अनंत सिंह पहली बार जेल गए थे। अनंत सिंह के करीबी इस कालखंड को उनका सबसे मुश्किल दौर बताते हैं। नवंबर 2015 में विधानसभा चुनाव हुआ तो JDU ने मोकामा सीट से अनंत सिंह को टिकट नहीं दिया। नीरज कुमार को कैंडिडेट बना दिया। अनंत सिंह जेल से ही निर्दलीय चुनाव लड़े और नीरज कुमार को 18,348 वोटों के अंतर से हरा दिया। इस चुनाव में नीरज कुमार ने अनंत सिंह पर कई व्यक्तिगत हमले किए। 28 अक्टूबर 2015 को चुनाव प्रचार के दौरान नीरज ने कहा था, ‘अनंत सिंह राजनीति के नासूर और आपराधिक गिरोह के सरगना हैं। कानून उनके दरवाजे पर दस्तक दे चुका है, अब वे अपने अंतिम दिन गिन रहे हैं।’ जेल जाने के बाद अनंत सिंह ने JDU से नाता तोड़ लिया। करीब 2 साल बाद नवंबर 2017 में वह जेल से बाहर आए। इसके बाद उनकी नजदीकी RJD से बढ़ी। 2019 लोकसभा चुनाव में अनंत सिंह ने अपनी पत्नी नीलम देवी को मुंगेर लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर ललन सिंह के खिलाफ चुनाव लड़वाया। हार गईं। इसके बाद अनंत सिंह का दूसरा सबसे कठिन समय 2019 लोकसभा चुनाव के बाद आया। अगस्त 2019 में उनके पैतृक आवास लदमा से AK-47, कारतूस और हैंड ग्रेनेड बरामद हुआ। इसके बाद उन पर UAPA के तहत केस दर्ज किया गया। इस केस में उन्होंने दिल्ली के साकेत कोर्ट में सरेंडर किया। इस घटना के बाद नीरज कुमार ने अनंत सिंह पर व्यक्तिगत हमला और तेज कर दिया। उन्होंने उनका नामकरण तक कर दिया। इंटरव्यू में उनको पुदिना सिंह कहकर संबोधित करने लगे। 2025 विधानसभा चुनाव से पहले अनंत सिंह वापस JDU में आ गए। इसको लेकर भी नीरज कुमार ने टिका-टिप्पणी की। पार्टी ने मोकामा से अनंत सिंह को चुनावी मैदान में उतारा तब नीरज कुमार प्रचार करने नहीं गए। उन्होंने कहा, ‘हम आपराधिक चरित्र वाले व्यक्ति के समर्थन में चुनाव प्रचार नहीं करेंगे।’ अंदरखाने चर्चा है कि अनंत सिंह की जब सोनू-मोनू गैंग से झड़प हुई थी तब नीरज कुमार कथित तौर पर सोनू-मोनू के साथ थे। चर्चा है यह भी है कि नीरज कुमार की दिली ख्वाहिश है कि वह मोकामा विधानसभा सीट से JDU के टिकट पर चुनाव लड़े और विधायक बने। चूंकि, नीरज कुमार मोकामा के ही रहने वाले हैं। जदयू ने मीटिंग बुलाई लेकिन नहीं माने अनंत सिंह इस पूरे विवाद पर बिहार JDU अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और मंत्री श्रवण कुमार ने 7 सितंबर को अनंत सिंह और नीरज कुमार के साथ बैठक की। इसमें पार्टी के सीनियर नेता भी थे। बैठक करीब 32 मिनट तक चली। बैठक के बाद अनंत सिंह पत्रकारों से बिना बात किए चुपचाप निकल गए। वहीं, नीरज कुमार और मंत्री श्रवण कुमार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि संगठन और NDA में कोई मनमुटाव नहीं है। मंत्री श्रवण कुमार ने अनंत के विरोध की बात को नकारा। कहा- हम विधान परिषद की इस बार हो रही सभी सीटों को जीतेंगे। मीटिंग के 24 घंटे के अंदर फिर अनुज को दिया आशीर्वाद 7 सिंतबर को जदयू की मीटिंग के बाद अनंत सिंह बिना बोले निकल गए, लेकिन 8 सितंबर उन्होंने अपना स्टैंड साफ कर दिया। अनंत सिंह 8 सितंबर को बिहटा में स्वतंत्रता सेनानी जगदीश सिंह की श्रद्धांजलि सभा में पहुंचे। उनके साथ मंच पर डॉ. अनुज सिंह फिर दिखे। अनुज सिंह ने अनंत सिंह साफ तौर पर कह का एमएलसी चुनाव में दादा का आशीर्वाद मिल गया है। अनंत स्टेज पर हंसते दिखे। उसके बाद से अनंत सिंह लगातार अपने बयानों से यह साफ कर रहे हैं कि उनका फैसला बदलने वाला नहीं है।
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क्या JDU के खिलाफ जाएंगे अनंत सिंह!:बाहुबली बोले- नीरज ने 4 बार मेरा विरोध किया तब मीटिंग क्यों नहीं हुई; मैं अनुज के साथ
