4 घंटे पहले
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आज (14 सितंबर) गणेश चतुर्थी है। गणेश पूजा का यह उत्सव 25 सितंबर तक है। इन दिनों में भगवान गणपति की विशेष पूजा की जाती है। गणेश पूजा हो, किसी अन्य देवी-देवता का पूजन या कोई भी अन्य धार्मिक कार्य शुरुआत स्वास्तिक चिह्न बनाकर की जाती है। यह शुभ चिह्न आमतौर पर सिंदूर या कुमकुम से बनाते हैं। माना जाता है कि स्वास्तिक बनाकर किसी काम की शुरुआत करते हैं, तो वह काम बिना किसी बाधा के पूरा हो जाता है। यह शुभ चिह्न गणेश जी का प्रतीक माना जाता है।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, स्वास्तिक दो शब्दों से मिलकर बना है- सु यानी शुभ और अस्ति यानी होना, अर्थात् सब कुछ शुभ हो। ये चिह्न शुभता और सकारात्मक बढ़ाने वाला माना जाता है।
स्वास्तिक की चार रेखाएं हैं चारों पुरुषार्थ की प्रतीक
शास्त्रों में चार पुरुषार्थ बताए गए हैं- धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष। स्वास्तिक का आकार गणित के धन चिह्न (+) के समान होता है, जो सकारात्मकता दर्शाता है। इसकी चार रेखाएं चारों पुरषार्थ को दर्शाती हैं। इसके अलावा शास्त्रों में चार आश्रम– ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, संन्यास बताए हैं। चार युग- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग, कलियुग हैं।


