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बाढ़ के बीच बोट क्लीनिक से पहुंच रहा इलाज:कटिहार में 24 मेडिकल कैंपों में 1700 से अधिक लोगों का उपचार, गर्भवती महिलाओं पर नजर




कटिहार में बाढ़ के कारण मुश्किल हालात बने हुए हैं। कई इलाकों में सड़क संपर्क बाधित होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने इलाज की व्यवस्था को प्रभावित नहीं होने दिया है। जिन गांवों तक सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल है, वहां बोट क्लीनिक और बोट एंबुलेंस के जरिए स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 24 मेडिकल कैंप संचालित किए जा रहे हैं, जहां अब तक 1,700 से अधिक लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं दी जा चुकी हैं। देखें, मौके से आई तस्वीरें… बाढ़ प्रभावित इलाकों में मंत्री ने लिया जायजा बिहार सरकार के आपदा मंत्री रत्नेश सादा ने बुधवार को कटिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने मेडिकल कैंप, बोट क्लीनिक और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान मंत्री ने स्वास्थ्य विभाग की ओर से की गई व्यवस्थाओं पर संतोष जताया और बाढ़ के बीच लोगों तक चिकित्सा सुविधा पहुंचाने के प्रयासों की सराहना की। 4 प्रखंडों में बोट से पहुंचाई जा रहीं स्वास्थ्य सेवाएं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कुरसेला, अहमदाबाद, मनिहारी और बरारी के लिए चार बोट की व्यवस्था की गई है। इनके माध्यम से स्वास्थ्यकर्मी, जरूरी दवाएं और अन्य चिकित्सा सामग्री उन गांवों तक पहुंचाई जा रही है, जहां पानी भरने के कारण सड़क मार्ग से आवागमन बाधित है। विभाग की कोशिश है कि बाढ़ के कारण किसी भी जरूरतमंद को इलाज से वंचित न रहना पड़े। गर्भवती महिलाओं की सुरक्षित डिलीवरी पर नजर बाढ़ के बीच गर्भवती महिलाओं की सुरक्षित डिलीवरी स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है। सितंबर और अक्टूबर में प्रसव की संभावित तिथि वाली गर्भवती महिलाओं की सूची तैयार की जा रही है। अहमदाबाद में 29, आजमनगर में 165, बलरामपुर में 149 और बरारी में 110 गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी की जा रही है। मैदानी स्वास्थ्यकर्मियों और बीसीएम को निर्देश दिया गया है कि प्रसव की संभावित तिथि से पहले महिलाओं को सुरक्षित तरीके से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) तक पहुंचाया जाए। इसके लिए आशा कार्यकर्ताओं और एंबुलेंस की मदद ली जा रही है। सांप-कुत्ते के काटने की दवाओं से बचाव बाढ़ प्रभावित इलाकों में सांप और कुत्ते के काटने की दवाओं के अलावा ब्लीचिंग पाउडर, हैलोजन टैबलेट और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सामग्री उपलब्ध कराई गई है। आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से ग्रामीणों को जलजनित बीमारियों से बचाव के लिए जागरूक किया जा रहा है। लोगों से पानी उबालकर पीने, भोजन को ढककर रखने और बासी या ठंडा भोजन नहीं करने की अपील की जा रही है। PHED के साथ समन्वय कर ट्यूबवेलों में हैलोजन टैबलेट के उपयोग और वितरण की व्यवस्था भी की जा रही है। PMSMA में 2 हजार गर्भवती महिलाओं की जांच बाढ़ के बीच नियमित स्वास्थ्य कार्यक्रम भी जारी हैं। बुधवार को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के तहत जिले की विभिन्न स्वास्थ्य इकाइयों में गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच की गई। करीब 2,000 गर्भवती महिलाओं की ANC जांच हुई। अभियान के दौरान 21 हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (HRP) वाली एनीमिक महिलाओं को चिह्नित किया गया। आशा कार्यकर्ताओं और एंबुलेंस की मदद से इन्हें स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार FCM इंजेक्शन दिया गया। एनीमिया से ग्रसित तीन धात्री महिलाओं को भी विशेष स्वास्थ्य सेवाएं दी गईं। जांच के साथ महिलाओं को सुरक्षित मातृत्व, पोषण, एनीमिया से बचाव और प्रसव की तैयारी को लेकर काउंसलिंग भी दी गई। आपदा में भी स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह सक्रिय जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि बाढ़ जैसी विषम परिस्थितियों में भी स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित नहीं होने दिया जाएगा। एंबुलेंस, बोट एंबुलेंस, मेडिकल कैंप और मैदानी स्वास्थ्यकर्मियों के माध्यम से जरूरतमंदों तक लगातार स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। जिलाधिकारी के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग आपदा प्रबंधन के साथ नियमित स्वास्थ्य कार्यक्रमों को भी जारी रखे हुए है। विभाग का लक्ष्य है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का कोई भी व्यक्ति इलाज से वंचित न रहे और स्वास्थ्य सुविधा अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचे।



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