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बांका के रजौन थाना क्षेत्र के खिड़्डी गांव में बिहार क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की रिकवरी टीम ने पुलिस के साथ मिलकर किसान को गलत वारंट पर एक घंटे तक बंधक बनाए रखा। टीम ने किसान से जबरन 21 हजार रुपए भी वसूल लिए, जबकि वारंट किसी और के नाम पर था। मंगलवार को बैंक की रजौन शाखा से रिकवरी टीम वारंट धारकों से ऋण वसूली के लिए गांव पहुंची थी। वारंट नीलेश कुमार सिंह, पिता जवाहर प्रसाद सिंह के नाम पर जारी हुआ था। लेकिन, बैंकर्स और पुलिस की टीम विनोद कुमार सिंह के बेटे नीलेश कुमार सिंह के घर पहुंच गई। टीम ने निर्दोष किसान नीलेश कुमार सिंह को हिरासत में लेने की बात कही। परिजन और किसान लगातार कहते रहे कि यह उनका वारंट नहीं है और उन्हें कभी कोई नोटिस नहीं मिला। इसके बावजूद टीम ने किसान को करीब एक घंटे तक अपनी हिरासत में रखा और दुर्व्यवहार किया। रिकवरी टीम 50 हजार लेने की बात पर अड़ी शोरगुल सुनकर ग्रामीण इकट्ठा हो गए और वारंट की पुष्टि करने की बात कहने लगे। किसान ने बार-बार कहा कि उनका कोई लोन नहीं है और टीम को ब्रांच से पुष्टि करने को कहा। लेकिन, रिकवरी टीम 50 हजार रुपए जमा करने पर ही किसान को छोड़ने पर अड़ी रही। किसान के परिजनों ने मजबूर होकर 21 हजार रुपए जमा किए, तब जाकर उसे आजाद किया गया। टीम ने कहा कि आज ही बैंक में 50 हजार रुपए जमा करें। किसान को 21 हजार रुपए की रसीद भी दी गई। बाद में किसान के परिजन जब ग्रामीण बैंक रजौन शाखा पहुंचे और जांच की, तो पता चला कि वारंट दूसरे नीलेश कुमार सिंह (पिता जवाहर प्रसाद सिंह) के नाम पर निकला था। रिकवरी टीम बिना पहचान किए ही कार्रवाई कर रही थी, जबकि रिकवरी लिस्ट में नीलेश कुमार सिंह, पिता जवाहर प्रसाद सिंह, खिड़्डी साफ लिखा था। 21 हजार रुपए लौटाकर मामला खत्म करने की कोशिश की शाखा प्रबंधक ने अपने केबिन में ही मौखिक रूप से 21 हजार रुपए लौटाकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की। इस घटना से यह सवाल उठता है कि टीम में कई पढ़े-लिखे अधिकारी होने के बावजूद इस तरह का दुर्व्यवहार और किसी निर्दोष को परेशान करना कितना सही है। पीड़ित किसान ने जिलाधिकारी व उच्च अधिकारियों से इस तरह की पुनरावृत्ति ना हो ऐसी टीम पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। आगे परिजनों ने बताया कि किसी निर्दोष के घर में 10-12 की संख्या में पुलिस के साथ बेवजह हर एक रूम की तलाशी लेना घर का फोटो और वीडियो ग्राफी करना किसी के भी मान सम्मान पर आंच है। जब पता चला कि किसान निर्दोष है तो सभी रिकवरी टीम के होश उड़ गए। इस मामले को लेकर बिहार ग्रामीण बैंक के शाखा प्रबंधक से दूरभाष पर संपर्क किया गया तो कुछ भी कहने से इनकार करते हुए फोन को डिस्कनेक्ट कर दिया। खेती किसानी में सभी पैसे हुए खर्च इन दिनों बैंक के द्वारा इस तरह के बिना पहचान के लोगों को वारंट का भय दिखाकर दुर्व्यवहार से किसान मजदूर भयभीत व खासे चिंतित हैं। अभी खेती किसानी में सभी पैसे खर्च हो गए हैं, कर्ज लेकर खेती हो रही है और बैंकर्स द्वारा किसान मजदूरो को परेशान किया जा रहा है। किसानों के अनुसार अभी नरमी बरतते हुए फसल कटाई के समय सघन वसूली होनी चाहिए। इस संदर्भ में एलडीएम रंजय कुमार ने कहा कि बगैर पहचान निर्दोष किसान से दुर्व्यवहार नहीं करनी चाहिए। मामले की जांच की जायेगी।
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गलत वारंट पर किसान को 1 घंटा बंधक बनाया:बांका में रिकवरी टीम ने 21 हजार रुपए वसूले, बाद में पता चला दूसरे का था वारंट
