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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने हंग काओ को नेवी सेक्रेटरी बनाने का फैसला किया है। उन्होंने बुधवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि ‘सच्चे वॉरियर’ हैं। वह अमेरिकी नौसेना और मरीन कॉर्प्स को दुनिया की सबसे मजबूत सेना बनाए रखने के लिए सही व्यक्ति हैं। काओ को सैन्य अनुभव वाला अधिकारी माना जाता है। वह 31 साल तक अमेरिकी नौसेना में रहे हैं और इराक, अफगानिस्तान और सोमालिया जैसे इलाकों में मिशन का हिस्सा रहे हैं। काओ का जन्म 1971 में दक्षिण वियतनाम के साइगॉन में हुआ था। जब वे 4 साल के थे तब दक्षिण वियतनाम में अमेरिका समर्थक सरकार गिर गई थी। उस पर उत्तर वियतनाम की कम्युनिष्ट सरकार ने कब्जा कर लिया था। इसके बाद काओ का परिवार भागकर अमेरिका पहुंचा था। नौसेना से रिटायर होने के बाद राजनीति में उतरे, दो बार हार मिली काओ ने 1989 में अमेरिकी नौसेना में अपना करियर शुरू किया। उनका काम समुद्र के अंदर खतरनाक मिशन करना और बम या दूसरे विस्फोटकों से जुड़े खतरों से निपटना था। उन्होंने इराक, अफगानिस्तान और सोमालिया में कई सैन्य मिशनों में काम किया। अंडरवॉटर मिशनों की कमान संभाली और स्पेशल ऑपरेशंस से जुड़े काम भी किए। करीब तीन दशक के सैन्य करियर के बाद वह 2021 में कैप्टन के पद से रिटायर हुए। नौसेना से रिटायर होने के बाद काओ ने राजनीति में कदम रखा। उन्होंने 2022 में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और 2024 में सीनेट के लिए वर्जीनिया से चुनाव लड़ा। हालांकि, दोनों चुनावों में उन्हें हार मिली। अक्टूबर 2025 में काओ को अमेरिकी नौसेना का अंडरसेक्रेटरी नियुक्त किया गया। यह नौसना में दूसरा सबसे बड़ा पद था। अप्रैल 2026 में ट्रम्प ने तत्कालीन नेवी सेक्रेटरी जॉन फेलन को पद से हटा दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक फेलन और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बीच नहीं बन रही थी। इसके बाद काओ को कार्यवाहक सेक्रेटरी की जिम्मेदारी दी गई थी। तब से काओ अमेरिकी नौसेना की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब ट्रम्प उन्हें इसी पद पर स्थायी रूप से नियुक्त करना चाहते हैं। हंग काओ स्थायी नेवी सेक्रेटरी कैसे बनेंगे? काओ की नियुक्ति अभी पक्की नहीं हुई है। दरअसल, राष्ट्रपति का काम नेवी सेक्रेटरी के पद के लिए नामित करना है। अंतिम मंजूरी अमेरिकी सीनेट देती है। 1. नामांकन सीनेट के पास जाएगा
ट्रम्प का आधिकारिक नामांकन सीनेट को भेजा जाएगा। इसके बाद काओ के रिकॉर्ड और उनकी योग्यता की जांच की जाएगी। 2. सीनेट की सुनवाई होगी
काओ को सीनेट की समिति के सामने पेश होना पड़ सकता है। वहां उनसे उनकी सोच, नौसेना की नीतियों, जहाज निर्माण, सैन्य तैयारियों और दूसरे मुद्दों पर सवाल पूछे जा सकते हैं। 3. समिति फैसला करेगी
सुनवाई और जांच के बाद समिति उनके नामांकन को आगे बढ़ा सकती है। इसके बाद मामला पूरी सीनेट के सामने जाएगा। 4. वोटिंग होगी
सीनेटर काओ के नाम पर वोट करेंगे। सीनेट में 100 सदस्य होते हैं, अगर उन्हें 51 वोट मिले तो उन्हें यह जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी। ईरान युद्ध के बीच क्यों अहम है काओ की भूमिका? काओ ऐसे समय में नौसेना की स्थायी जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं, जब अमेरिकी सेना का ईरान के खिलाफ अभियान चल रहा है। इस दौरान अमेरिकी नौसेना की तैनाती और उस पर काम का दबाव बढ़ा है। अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन नौ महीने से ज्यादा समय तक समुद्र में तैनात रहा। इस दौरान उसका एक बड़ा हिस्सा ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान के समर्थन में बीता। इतनी लंबी तैनाती के कारण जहाज पर मौजूद सैनिकों की थकान, मानसिक सेहत और जरूरी सामान की कमी को लेकर सवाल उठे। अमेरिकी सांसदों ने भी पेंटागन से इन हालात पर जवाब मांगा। अगस्त में काओ ने अब्राहम लिंकन की लंबी तैनाती का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि मिशन की जरूरत के कारण जहाज की तैनाती बढ़ाई गई और सैनिकों की सुरक्षा सबसे अहम है। इसलिए नेवी सेक्रेटरी बनने के बाद काओ के सामने युद्ध के दौरान नौसेना की तैयारियां बनाए रखने के साथ-साथ सैनिकों पर पड़ रहे दबाव को संभालने की भी चुनौती होगी। जॉन फेलन से कैसे अलग हैं काओ? काओ से पहले जॉन फेलन नेवी सेक्रेटरी थे। फेलन की सैन्य पृष्ठभूमि नहीं थी। उनके कार्यकाल में अमेरिकी नौसेना के जहाज निर्माण को लेकर पेंटागन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मतभेद सामने आए थे। फेलन नई युद्धपोत क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े निवेश की वकालत कर रहे थे। ट्रम्प प्रशासन ने इसके बाद ‘गोल्डन फ्लीट’ योजना को आगे बढ़ाया। इसमें नए युद्धपोत बनाने पर बड़ा खर्च शामिल है। अप्रैल में फेलन को पद से हटा दिया गया था। रिपोर्टों के मुताबिक, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के साथ भी उनके मतभेद थे। इसके उलट काओ को हेगसेथ के करीब माना जाता है। खासकर सेना से जुड़े सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर दोनों की सोच में समानता बताई जाती है। ऐसे में काओ की नियुक्ति से ट्रम्प प्रशासन को नौसेना के शीर्ष पद पर सैन्य अनुभव वाले अधिकारी के साथ-साथ मौजूदा रक्षा नेतृत्व के साथ बेहतर तालमेल रखने वाला व्यक्ति मिलेगा। काओ के सामने होंगी ये बड़ी चुनौतियां नेवी सेक्रेटरी के तौर पर काओ के सामने कई बड़ी चुनौतियां होंगी। इनमें नौसेना की युद्धक क्षमता बनाए रखना, नए जहाजों का निर्माण बढ़ाना और लंबे सैन्य अभियानों के दौरान सैनिकों पर पड़ने वाले दबाव को कम करना शामिल है। अमेरिका चीन के साथ नौसैनिक ताकत की होड़ में भी जुटा है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी बढ़ाना ट्रम्प प्रशासन की बड़ी प्राथमिकताओं में है। दूसरी ओर, ईरान युद्ध ने मध्य-पूर्व में अमेरिकी नौसेना के सामने एक और बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। काओ का लंबा सैन्य अनुभव इन हालात में उनके लिए मददगार हो सकता है। हालांकि, उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती ट्रम्प प्रशासन की बड़ी जहाज निर्माण योजनाओं और मौजूदा सैन्य अभियानों के बीच संतुलन बनाने की होगी।
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ट्रम्प ने अमेरिकी नौसेना मजबूत करने के लिए वॉरफाइटर चुना:हंग काओ को दी जिम्मेदारी, पिता के साथ वियतनाम से भागकर अमेरिका आए थे
