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ठेला लगाने से मना किया, युवक ने फांसी लगाई:घर में फंदे से लटका मिला बॉडी, अस्पताल में डेड घोषित




सीवान के नगर थाना क्षेत्र के जय प्रकाश नगर में बुधवार को दुकान के सामने ठेला लगाने से मना किए जाने और बेरोजगारी के तनाव में एक युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन आनन-फानन में युवक को फंदे से नीचे उतारकर सदर अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। युवक की मौत के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। मृतक की पहचान नगर थाना क्षेत्र के जय प्रकाश नगर निवासी वृजमोहन प्रसाद का बेटा विशु कुमार (24) के रूप में हुई है। घर के अंदर पंखे से लगाई फांसी परिजनों के अनुसार विशु थाना रोड में ठेला लगाकर सामान बेचता था और इसी से अपने जीवन का गुजर-बसर करता था। परिवार के लिए उसकी छोटी सी कमाई भले ही बड़ी रकम नहीं थी,लेकिन यही उसके रोजगार और जीवन का सहारा थी। परिजनों ने बताया कि बीते दिनों जिस दुकान के सामने विशु अपना ठेला लगाकर सामान बेचता था,वहां के दुकानदार ने उसे ठेला लगाने से मना कर दिया। इसके बाद वह वहां अपना ठेला नहीं लगा पा रहा था। रोजगार का साधन छिन जाने के बाद विशु घर पर ही रहने लगा था।परिजनों के मुताबिक वह खुद को बेरोजगार समझकर तनाव में रहने लगा था। बुधवार को परिवार के अन्य सदस्य किसी काम से घर से बाहर निकले थे। इसी दौरान विशु ने घर के अंदर पंखे से फांसी लगा ली। पोस्टमार्टम के लिए भेजा शव कुछ देर बाद जब परिवार के लोग वापस घर पहुंचे तो उसे पंखे से लटका देखकर उनके होश उड़ गए। परिजन तत्काल उसे नीचे उतारकर इलाज की उम्मीद में सदर अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। युवक की मौत की सूचना मिलने के बाद सदर अस्पताल टीओपी प्रभारी सुजीत कुमार इमरजेंसी वार्ड पहुंचे। उन्होंने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा तैयार किया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। T.O.P. प्रभारी सुजीत कुमार ने बताया कि सदर अस्पताल से सूचना मिली थी कि एक युवक ने आत्महत्या कर ली है। सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। सभी पहलुओं पर जांच कर रही पुलिस प्रथम दृष्टया युवक द्वारा तनाव में आकर आत्महत्या किए जाने की बात सामने आ रही है। हालांकि मामले के अन्य सभी बिंदुओं पर नगर थाना पुलिस द्वारा जांच की जा रही है। एक ओर परिवार ने अपना जवान बेटा खो दिया, तो दूसरी ओर महज रोजगार का एक साधन छिन जाने के बाद बढ़ा तनाव उसकी जिंदगी पर ही भारी पड़ गया। 24 साल की उम्र में विशु की जिंदगी खत्म होने की घटना परिवार के साथ-साथ समाज के लिए भी एक गंभीर सवाल छोड़ गई है कि बेरोजगारी और मानसिक तनाव से जूझ रहे युवाओं को समय रहते भावनात्मक सहारे और मदद की कितनी जरूरत है।



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