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बेगूसराय- पीएचसी में टूटे पैर पर प्लास्टर की जगह कार्टन:सड़क हादसे में घायल हुआ था ट्रक ड्राइवर, गत्ता बांधकर सदर अस्पताल किया रेफर




बेगूसराय के साहेबपुर कमाल पीएचसी में एक मरीज के पैर में प्लास्टर की जगह कार्टन बांधने का मामला सामने आया है। दरअसल, सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल ट्रक ड्राइवर का बाया पैर टूट गया था। इसके बाद उसे इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया था। इलाज के लिए डॉक्टरों ने प्लास्टर करने के बजाए टूटे हुए पैर में गत्ता यानी कार्टन बांध दिया और उसे सदर अस्पताल रेफर कर दिया। शनिवार को ट्रैक्टर और ट्रक की टक्कर में घायल हुआ था ड्राइवर दरअसल शनिवार की सुबह साहेबपुर कमाल थाना क्षेत्र में NH-333 (B) पर सड़क हादसा हो गया था। रामपुर से गिट्टी लादकर छपरा जा रहे ट्रक के ड्राइवर सुरेंद्र राय के साथ यह दर्दनाक दुर्घटना घटी। पीड़ित ड्राइवर सुरेंद्र राय ने बताया कि घटना शनिवार सुबह करीब पांच बजे की है। एक ट्रैक्टर अचानक ओवरटेक कर अनियंत्रित गति से आगे आ गया। उसे बचाने के लिए ब्रेक लगाया तो उनकी गाड़ी रोल कर गई। बचने का कोई अन्य रास्ता न मिलने के कारण ट्रक के नीचे उनका पैर बुरी तरह दब गया और गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया। पीछे से ट्रक लेकर आ रहे उनके भांजे ने इमरजेंसी सेवा डायल-112 पर फोन किया तो पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस टीम ने तत्परता दिखाते हुए निकाल कर इलाज के लिए साहेबपुर कमाल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया‌। अस्पताल में गंभीर हालत में पहुंचे घायल ट्रक ड्राइवर के पैर में फ्रैक्चर होने के बावजूद वहां प्लास्टर या मेडिकल स्प्लिट लगाने की कोई व्यवस्था नहीं मिली। पीएचसी प्रभारी से नहीं हो पाया संपर्क मरीज के पैर में प्लास्टर की की जगह कार्टन बांधने के संबंध जब पीएचसी प्रभारी से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया। इस संबंध में जिला रोगी कल्याण समिति के सदस्य अरुण कुमार महतो ने कहा कि यदि किसी आपात स्थिति में मरीज की जान बचाने के लिए कोई तात्कालिक उपाय करना पड़े, तो बांस की फट्टी या गत्ते का इस्तेमाल फर्स्ट ऐड के रूप में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ड्यूटी के समय डॉक्टरों की ओर से बरती जाने वाली लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जानी चाहिए। इस घटना के समय ड्यूटी पर तैनात रहे चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मियों की संलिप्तता की गहन जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर डॉक्टर ड्यूटी से गायब थे और सिर्फ ड्रेसर या नर्सों ने ही इस तरह का गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाया है, तो यह सीधे तौर पर विभागीय लापरवाही का बड़ा उदाहरण है।



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