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‘सुबह 3 बजे मैं खाना बनाने के लिए उठी थी। कुछ देर बाद गोलियों की तड़तड़ाहट सुनाई दी। लगा जैसे कोई पटाखा फोड़ रहा हो। रुक-रुक कर गोली चलने की आवाज आ रही थी। डर के मारे हम लोग अपनी झोपड़ी में दुबके हुए थे। उजाला हुआ तो बाहर आए। देखा कि हर ओर पुलिस वाले हैं। पीपल के पेड़ के पास तीन लाशें पड़ीं थी, पुलिस वाले उन्हें उठा रहे थे, पूरे गांव में दहशत थी। कोई भी वहां जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था।’ ये दहशत है, मनेर के दियारा इलाके में रहने वाली अनीता देवी की, जहां सुबह करीब चार बजे तीन शूटर्स का एनकाउंटर हुआ। 7 बजे तक पूरे इलाके में खौफ रहा। पुलिस के जवानों की भारी तैनाती रखी गई। एनकाउंटर कितने समय हुआ? गांव की क्या स्थिति थी? गांव वाले क्या कहते हैं? अस्पताल का हाल क्या रहा? पढ़िए दैनिक भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट…। एनकाउंटर के बाद ग्राउंड जीरो से कुछ तस्वीरें देखिए…
सबसे पहले जानिए मनेर में क्या हुआ? शुक्रवार सुबह पटना के मनेर थाना क्षेत्र के शेरपुर गंगा घाट के पास मुठभेड़ हुई। करीब 20 मिनट चले एनकाउंटर में 40 राउंड गोलियां चलीं। अपराधियों ने पुलिस पर 24 राउंड फायरिंग की, जवाब में पुलिस की ओर से 18 राउंड गोलियां चलाई गईं। फायरिंग में राजा शर्मा, बबलू कुमार यादव और जेपी यादव घायल हो गए। अस्पताल पहुंचने से पहले तीनों की मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, तीनों पेशेवर शूटर थे और सुपारी लेकर मर्डर करते थे। मारे गए आरोपियों के परिजनों ने एनकाउंटर पर सवाल उठाते हुए अस्पताल में करीब 5 घंटे तक हंगामा किया।
अब आपको एनकाउंटर वाली जगह ले चलते हैं राजधानी पटना से करीब 20 किलोमीटर दूर भास्कर टीम शेरपुर पहुंची। गांव में दहशत का माहौल था। कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं था। घटना स्थल पर सिर्फ खून के निशान, आसपास के लोग स्पॉट पर खड़े तो थे, लेकिन कैमरे पर आने को तैयार नहीं हुए। भास्कर टीम ने कैमरे को हटाकर लोगों से बात शुरू की। वहां खड़े एक युवक बताया, ‘सुबह-सुबह की बात है। हम लोग गहरी नींद में थे। तीन से चार बजे का टाइम रहा होगा। अचानक गोली चलने की आवाज सुनाई देने लगी। हम लोग बाहर निकले तो पुलिस ही पुलिस दिखाई पड़ रही थी। हम लोग आगे आए तो कुछ पुलिस वालों ने उधर जाने से रोक दिया। इसके बाद गांव के और भी लोग आने लगे, तब तक पांच बज गया और उजाला होने लगा। हमने देखा कि पीपल के पेड़ के पास 3 डेड बॉडी पड़ी हुई थी। चारों तरफ कारतूस के खोखे दिखाई पड़ रहे थे। पुलिस की कई गाड़ियां खड़ी थीं। पुलिस वाले वहां पीली पट्टी लगाकर लोगों को हटा रहे थे। खेत में बस खून के निशान दिखाई दे रहे थे। गांव में दहशत थी कि पता नहीं कौन लोग हैं, किसको मार दिया गया है। इसी बीच पुलिस की और गाड़ियां आईं और तीनों की बॉडी उठाकर ले जाने लगीं।’ तीन बजे लगा जैसे पटाखे फूट रहे हैं घटना स्थल के पास एक ईंट भट्ठा है। यहां मजदूर गीली मिट्टी से कच्चे ईंट बनाते दिखे। ये मजदूर रात में ईंट भट्ठा के पास बनी झोपड़ियों में रहते हैं। मुठभेड़ के वक्त घटना स्थल के सबसे करीब ये लोग ही थे। यहां काम कर रहीं, अनीता देवी ने कहा, ‘करीब 20 मिनट तक तेज आवाज आती रही। डर के मारे कोई उधर नहीं जा रहा था। हमलोग ईंट बनाते हैं। यहां आए तो पता चला कि पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ हुई है। कई पुलिस वाले अपराधी को पकड़ने के लिए गंगा के पानी में उतर गए थे। हालांकि, गंगा नदी में कोई अपराधी छिपा नहीं था।’ उन्होंने कहा, ‘हमलोग सुबह 5 बजे ईंट बनाने के लिए पहुंचे, लेकिन प्रशासन ने ईंट भट्ठा पर जाने से रोक दिया। मैंने अपने ठेकेदार से फोन पर बात की। ठेकेदार ने कहा कि पुलिस के लोग मना कर रहे हैं तो आज काम बंद कर दो। थोड़ी देर बाद हमलोगों ने फिर प्रशासन से काम करने की इच्छा जताई। प्रशासन ने हमारी बात सुन ली और फिर हमलोग भट्ठे पर आकर काम करने लगे।’ यहीं काम कर रहे धीरेंद्र ने बताया, ‘घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। दियारा इलाके में सिर्फ पुलिस के जवान दिख रहे हैं। हमलोग सुबह से गोलियों की तड़तड़ाहट की आवाज सुन रहे हैं। बड़ी हिम्मत के बाद काम करने के लिए पहुंचे हैं। पुलिस के जवान ने हमलोगों को घर वापस लौटने के लिए बोला था। थोड़ी देर बाद मामला शांत हुआ तो हमलोग काम करने पहुंचे।’
पीपल के पेड़ के पीछे छिपकर अपराधियों ने चलाई गोली हमने घटना स्थल का मुआयना किया। FSL की टीम ने मौके पर कुछ सामग्री बरामद की। जमीन पर ग्लव्स और कागज के टुकड़े मिले। कागज के टुकड़े पर वन कंट्री मेड जैसे कुछ लाइन लिखे हुए हैं। हमने देखा कि मौके पर अपराधियों और पुलिस के पैरों के निशान मौजूद हैं। गोलियों के कई खोखे भी वहां गिरे हुए दिखे। अपराधी पीपल के पेड़ के पीछे छिपकर गोलियां बरसा रहे थे। पुलिस भी जवाबी कार्रवाई करते हुए फायरिंग कर रही थी। मौके पर एक ही पेड़ था। पीपल के इस पेड़ में भी गोली लगी है। पेड़ के नीचे मारे गए तीन अपराधियों के शरीर से निकले खून के निशान मिले। पीपल के पेड़ में खून के धब्बे लगे हुए थे। घटना के बाद पूरे इलाके की पुलिस ने घेराबंदी कर दी है। किसी भी व्यक्ति को वहां जाने की अनुमति नहीं है। अब जानिए अस्पताल का हाल, मृतकों के परिजनों ने किया हंगामा तीनों के शवों को पुलिस पहले दानापुर अनुमंडलीय अस्पताल ले गई। यहां मृतकों के परिजनों ने हंगामा किया। परिवार का आरोप है कि जिस पैक्स अध्यक्ष की हत्या के आरोप में पुलिस ने एनकाउंटर किया, उसकी हत्या से जुड़े FIR में इनका नाम नहीं था। अस्पताल में मृतकों के परिजनों और उनके साथ आए लोगों ने हंगामा और पथराव किया। हॉस्पिटल के पास खड़ी कार का शीशा तोड़ दिया गया। लोग पुलिस-प्रशासन के खिलाफ लगातार नारेबाजी कर रहे थे। पुलिस ने हंगामा कर रहे लोगों को खदेड़ा और हॉस्पिटल कैंपस खाली कराया। हंगामे के बीच मारे गए जेपी यादव के बड़े भाई रामाशीष यादव को पुलिस ने पकड़ लिया। करीब आधे घंटे बाद पुलिस ने उन्हें छोड़ा। रामाशीष ने एनकाउंटर पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘जिस मर्डर केस में कार्रवाई की बात कही जा रही है, उसमें उनके भाई का नाम भी नहीं था।’ राजद सांसद मीसा भारती अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने हंगामा कर रहे लोगों को समझाया। एनकाउंटर की जांच की मांग करते हुए कहा कि एक जाति के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। एनकाउंटर के करीब 10 घंटे बाद शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए पटना एम्स भेजा गया। दानापुर एएसपी अजीत कुमार ने बताया कि शवों का पोस्टमॉर्टम पटना एम्स में होगा। डॉक्टरों की एक पैनल बनाकर पोस्टमॉर्टम किया जाएगा। सभी के परिजन भी मौजूद रहेंगे। पटना SSP कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि तीनों अपराधियों का क्राइम रिकॉर्ड पुराना है। अपराधियों के खिलाफ मनेर समेत कई अन्य थानों में मामला दर्ज है। तीनों पेशेवर शूटर थे और सुपारी लेकर मर्डर करते थे।
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