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रूसी ड्रोन से बचने गैस पाइपलाइनों में छिपे यूक्रेनी सैनिक:महीनों तक अंडरग्राउंड सुरंगों में रहने को मजबूर; रूस-यूक्रेन जंग पांचवें साल में भी जारी




रूस-यूक्रेन जंग अब अपने पांचवे साल में भी जारी है। ऐसे में रूस के लगातार ड्रोन हमलों ने यूक्रेन के सैनिकों के लिए जमीन पर खुलेआम चलना मुश्किल कर दिया है। वे पुरानी गैस पाइपलाइनों के अंदर छिपकर रह रहे हैं। करीब 4 फीट चौड़ी इन सुरंगों में सैनिकों को कई हफ्तों से लेकर दो महीने तक गुजारने पड़ते हैं। कभी रूस से यूरोप तक गैस पहुंचाने वाली ये पाइपलाइन अब यूक्रेनी सैनिकों को खाना, हथियार और दूसरी जरूरी चीजें पहुंचाने का रास्ता बन गई हैं। 129 किमी लंबी पाइपलाइन से पहुंच रहा सामान यूक्रेन के कुपियांस्क इलाके में पुरानी गैस पाइपलाइनों का करीब 129 किलोमीटर लंबा नेटवर्क है। रूस ने पिछले साल यूक्रेन के इलाके में घुसपैठ करने के लिए इनका ही इस्तेमाल किया था। इसके बाद यूक्रेन की नेशनल गार्ड की खुफिया इकाई ने इन पाइपलाइनों के नक्शे जुटाए। साथ ही, इन्हें बनाने वाले पुराने गैस विशेषज्ञों की मदद से भूमिगत रास्तों का इस्तेमाल करने की योजना तैयार की। अब इन पाइपलाइनों के जरिए सैनिकों तक खाना और गोला-बारूद पहुंचाया जाता है। इसके लिए छोटी इलेक्ट्रिक गाड़ियों का इस्तेमाल होता है। दिन में इन गाड़ियों से जरूरी सामान अंदर भेजा जाता है, जबकि रात में खुदाई से निकली मिट्टी की बोरियां बाहर लाई जाती हैं। सैनिक संकरे रास्तों के कारण घुटनों पर रेंगते हैं इन पाइपलाइनों के अंदर सैनिकों को काफी मुश्किल हालात में रहना पड़ता है। रास्ते इतने संकरे हैं कि उन्हें झुककर या घुटनों के बल रेंगते हुए आगे बढ़ना पड़ता है। वहां न सूरज की रोशनी पहुंचती है और न ही ताजी हवा मिलती है। शौचालय के लिए सैनिक प्लास्टिक के बैग और बोतलों का इस्तेमाल करते हैं। पाइपलाइनों में गैस के बचे हुए अंश, धूल और हवा की कमी भी उनके लिए खतरा पैदा करती है। घायल सैनिकों को भी इन्हीं रास्तों से बाहर निकाला जाता है। मोर्चे पर मारे गए सैनिकों के शव भी इन पाइपलाइनों के जरिए बाहर लाए जाते हैं। थर्मल इमेजिंग की वजह से पकड़े जाना आसान ड्रोन और थर्मल इमेजिंग तकनीक ने खुले मैदान में सैनिकों की आवाजाही को बेहद खतरनाक बना दिया है। थर्मल इमेजिंग की मदद से ड्रोन जमीन पर मौजूद लोगों के शरीर की गर्मी पहचान सकते हैं। ऐसे में सैनिकों के लिए छिपकर आगे बढ़ना भी आसान नहीं रह गया है। इसी वजह से यूक्रेन अपनी सेना के ठिकानों, निगरानी चौकियों और सामान रखने वाले केंद्रों को आपस में जोड़ने के लिए भूमिगत सुरंगों का नेटवर्क बनाने की संभावनाएं तलाश रहा है।



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