बीजेपी के सीनियर लीडर आरके सिन्हा का निधन:नोएडा आवास पर अंतिम सांस ली, आज होगा अंतिम संस्कार




बिहार भाजपा के सीनियर नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद और पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल डॉ. रविन्द्र किशोर सिन्हा का निधन हो गया। आज उनका अंतिम संस्कार दीघा घाट पर होगा। SIS ग्रुप के संस्थापक और चेयरमैन डॉ. आरके सिन्हा ने शुक्रवार को नोएडा स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना से राजनीतिक और कारोबारी जगत में शोक की लहर है। आरके सिन्हा के निधन पर बिहार के सीएम सम्राट चौधरी ने शोक जताया। शुक्रवार की शाम नोएडा से डॉ. सिन्हा के पार्थिव शरीर को पटना लाया गया। पटना एयरपोर्ट से पार्थिव शरीर को पाटलिपुत्र कॉलोनी स्थित उनके आवास पर ले जाया गया। यहां शनिवार को लोग अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि देंगे। इसके बाद उनका दीघा घाट अंतिम संस्कार किया जाएगा। राजनीति और कारोबार में रही पहचान डॉ. आरके सिन्हा भाजपा के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे। उन्होंने राज्यसभा सांसद के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी निभाई। इसके साथ ही वे SIS ग्रुप के संस्थापक और चेयरमैन के तौर पर कारोबारी जगत में भी पहचान रखते थे। उनके निधन से बिहार के राजनीतिक और व्यावसायिक क्षेत्र में शोक का माहौल है। पत्रकारिता से शुरू किया था करियर आरके सिन्हा ने पत्रकारिता से अपने करियर की शुरुआत की थी। महज 250 रुपए महीने की नौकरी करने वाले सिन्हा ने आगे चलकर SIS ग्रुप की स्थापना की और उसे एक बड़े व्यावसायिक समूह के रूप में स्थापित किया। डॉ. सिन्हा भारतीय जनता पार्टी के पुराने नेताओं में शामिल थे। उन्होंने पार्टी के संगठन को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साल 2014 में भाजपा ने उन्हें बिहार से राज्यसभा भेजा था। वे 2020 तक राज्यसभा के सदस्य रहे। 250 रुपए महीने थी पहली सैलरी डॉ. आरके सिन्हा का जन्म 22 सितंबर 1951 को बिहार के बक्सर में हुआ था। उन्होंने पटना के एएन कॉलेज से राजनीति विज्ञान और कानून की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना करियर शुरू किया। शुरुआती दिनों में वे ‘द सर्चलाइट’ और ‘प्रदीप’ जैसे अखबारों के लिए काम करते थे। उस समय उन्हें हर महीने महज 250 रुपए वेतन मिलता था। वे साइकिल से घूमकर अपराध और राजनीतिक घटनाओं की रिपोर्टिंग करते थे। साल 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध को भी उन्होंने युद्ध संवाददाता के रूप में कवर किया था। पत्रकारिता से शुरू हुआ उनका सफर आगे चलकर कारोबार और राजनीति तक पहुंचा। उन्होंने अपने अनुभवों और प्रयासों के दम पर देश के प्रमुख निजी सुरक्षा सेवा समूहों में शामिल SIS ग्रुप की स्थापना की। जेपी की सलाह पर 1974 में शुरू की SIS कंपनी डॉ. आरके सिन्हा ने साल 1974 में पटना से सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (SIS) ग्रुप की शुरुआत की थी। कंपनी शुरू करने के पीछे पूर्व सैनिकों को रोजगार उपलब्ध कराने का विचार था। बताया जाता है कि 1971 के युद्ध के बाद बड़ी संख्या में सैनिक सेवानिवृत्त होकर अपने घर लौटे थे। उनके पुनर्वास और रोजगार की समस्या को देखते हुए लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने सिन्हा को पूर्व सैनिकों के लिए रोजगार के अवसर तैयार करने की सलाह दी थी। जेपी की सलाह से प्रेरित होकर उन्होंने पटना में एक छोटे से किराए के कमरे से कंपनी शुरू की। शुरुआती दौर में कंपनी में केवल दो लोग थे। धीरे-धीरे कारोबार का विस्तार हुआ और SIS ग्रुप ने निजी सुरक्षा सेवाओं के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। आज यह समूह भारत के साथ-साथ दूसरे देशों में भी अपनी सेवाएं देता है। कंपनी के विस्तार के साथ बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिला। जनसंघ से शुरू हुआ था राजनीतिक सफर डॉ. आरके सिन्हा का राजनीति से जुड़ाव भारतीय जनसंघ के दौर से था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 1966 में पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने उन्हें जनसंघ से जोड़ा था। बाद में वे भारतीय जनता पार्टी के पुराने नेताओं में शामिल हुए। भाजपा के शुरुआती दौर में उन्होंने पार्टी के संगठनात्मक कामों में योगदान दिया। राजनीति और कारोबार के साथ-साथ वे सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहे। वर्ष 2014 में भाजपा ने उन्हें बिहार से राज्यसभा का सदस्य बनाया। राज्यसभा में उनका कार्यकाल वर्ष 2020 तक रहा। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी भूमिका निभाई। शिक्षा और समाजसेवा में भी योगदान कारोबार और राजनीति के अलावा डॉ. सिन्हा शिक्षा के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे। उन्होंने देहरादून में द इंडियन पब्लिक स्कूल की स्थापना की। इसके अलावा अवसर ट्रस्ट के माध्यम से गरीब और मेधावी बच्चों की शिक्षा में सहयोग करने की पहल की। उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण पक्ष पूर्व सैनिकों के लिए रोजगार के अवसर तैयार करने और निजी सुरक्षा सेवा के क्षेत्र में एक बड़े कारोबारी समूह की स्थापना करना रहा।



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