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Justice Abhay Oak Statement on Election Commissioner Appointment


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नई दिल्ली13 मिनट पहले

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जस्टिस अभय 31 अगस्त 2021 से सुप्रीम कोर्ट में बतौर जज रहे, और 24 मई 2025 को रिटायर हुए। - Dainik Bhaskar

जस्टिस अभय 31 अगस्त 2021 से सुप्रीम कोर्ट में बतौर जज रहे, और 24 मई 2025 को रिटायर हुए।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अभय ओका ने कहा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राजनीतिक दबदबे से मुक्त रहनी चाहिए। इसके लिए मजबूत कानूनी व्यवस्था और स्वतंत्र संस्थाओं की सुरक्षा का ढांचा जरूरी है।

जस्टिस अभय रविवार को ठाणे में ‘फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड अस’ विषय पर व्याख्यान दे रहे थे। उन्होंने संवैधानिक पदों पर नियुक्ति में जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद हैं। साथ ही, बोलने की आजादी हर नागरिक का मौलिक अधिकार है और किसी तर्क का जवाब शारीरिक ताकत से नहीं, दूसरे तर्क से दिया जाना चाहिए।

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर सवाल

जस्टिस ओका ने कहा कि ऐसी व्यवस्था और कानूनी प्रावधान होना जरूरी है, जिससे चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राजनीतिक दबदबे से तय न हो।

उन्होंने कहा कि पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने करीब 14 साल पहले कॉलेजियम व्यवस्था का प्रस्ताव दिया था। इसमें प्रधानमंत्री, लॉ मिनिस्टर, लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के नेता तथा चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया शामिल होते।

उनके मुताबिक, इस व्यवस्था का मकसद चुनाव आयुक्तों के चयन की प्रक्रिया को वास्तव में स्वतंत्र बनाना था।

बोलने की आजादी लोकतंत्र के लिए जरूरी

अभय ओका ने कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए बोलने की आजादी की रक्षा करनी होगी। इसके बिना जीवन अपना सार्थक अर्थ खो देता है।

उन्होंने कहा कि हर नागरिक को अपने विचार और नजरिए रखने का मौलिक अधिकार है। किसी बहस का जवाब बहस से दिया जाना चाहिए, शारीरिक बल से नहीं।



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