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गयाजी में राम-भरत मिलन की भव्य शोभायात्रा निकली:ऊंट-घोड़ों संग उमड़ा जनसैलाब; ड्रोन से पुष्पवर्षा, छप्पन भोग और महाआरती हुई




गयाजी शहर में बुधवार को भगवान श्रीराम और उनके अनुज भरत का मिलन हुआ। गाजे-बाजे, ऊंट-घोड़ों और आकर्षक झांकियों के साथ भरत मिलाप की शोभायात्रा निकाली गई। जीबी रोड स्थित कोतवाली थाना चौक पर श्रीराम और भरत के मिलन का दृश्य देखकर कई श्रद्धालु भावुक हो गए। श्री आदर्श लीला समिति की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम पिछले 57 वर्षों से गयाजी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बना हुआ है। बिसार तालाब में पूजा, महाआरती और छप्पन भोग भरत मिलाप के अवसर पर बिसार तालाब स्थित आयोजन स्थल पर कार्यक्रम हुआ। भगवान श्रीराम और अन्य देवी-देवताओं के स्वरूप में सजे कलाकार आकर्षण का केंद्र रहे। रामभक्तों पर ड्रोन से पुष्पवर्षा की गई। इसके बाद पुरोहितों ने विधि-विधान से पूजा कराई और भगवान श्रीराम की महाआरती हुई। श्रद्धालुओं ने दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। भगवान श्रीराम को छप्पन भोग अर्पित किया गया। पूजा के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद बांटा गया। मेयर और पूर्व डिप्टी मेयर ने किया उद्घाटन कार्यक्रम का उद्घाटन गयाजी नगर निगम के मेयर डॉ. वीरेंद्र कुमार उर्फ गणेश पासवान, पूर्व डिप्टी मेयर डॉ. अखौरी ओंकार नाथ उर्फ मोहन श्रीवास्तव, पार्षद सारिका वर्मा और आयोजनकर्ता कुमार गौरव उर्फ गौरव सिन्हा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। समिति के अध्यक्ष कुमार गौरव सिन्हा ने अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ और भगवान श्रीराम का प्रतीक चिह्न देकर किया। कार्यक्रम में शहर के चिकित्सकों, समाजसेवियों और अन्य गणमान्य लोगों को सम्मानित किया गया। आयोजन समिति के सदस्यों और अतिथियों ने धार्मिक परंपराओं के संरक्षण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की महत्ता पर जोर दिया। बिसार तालाब से निकली शोभायात्रा, कोतवाली चौक पर हुआ मिलन पूजा-अर्चना, महाआरती, सम्मान समारोह और छप्पन भोग के बाद बिसार तालाब रोड से शोभायात्रा निकाली गई। इसमें गाजे-बाजे, ऊंट-घोड़े और भगवान श्रीराम सहित अन्य देवी-देवताओं के स्वरूप में सजे कलाकार शामिल हुए। शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरती शोभायात्रा को देखने के लिए जगह-जगह लोग जुटे रहे। जीबी रोड स्थित कोतवाली थाना चौक पर भगवान श्रीराम और भरत का मिलन हुआ। इस दौरान श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के नारे लगाए। रामायण के इस प्रसंग में भरत का अपने बड़े भाई श्रीराम के प्रति प्रेम और निष्ठा दिखाई देती है। यह प्रसंग परिवार में प्रेम, सम्मान, त्याग और समर्पण का संदेश देता है। 57 वर्षों से हो रहा भरत मिलाप का आयोजन: गौरव सिन्हा श्री आदर्श लीला समिति के अध्यक्ष कुमार गौरव उर्फ गौरव सिन्हा ने कहा कि उनकी संस्था पिछले 57 वर्षों से लगातार भरत मिलाप का आयोजन कर रही है। स्थानीय लोगों के सहयोग और भागीदारी से हर साल यह कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अयोध्या से आए कलाकारों के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। स्थानीय कलाकारों ने भी अपने मंचन से दर्शकों का मन मोह लिया। उन्होंने कहा कि भरत मिलाप केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग, भाईचारे और पारिवारिक एकता का संदेश देने वाला पर्व है। इससे नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है। भारतीय संस्कृति और पारिवारिक प्रेम का प्रतीक: मेयर मेयर डॉ. वीरेंद्र कुमार उर्फ गणेश पासवान ने कहा कि भरत मिलाप भारतीय संस्कृति, पारिवारिक प्रेम और त्याग की भावना का प्रतीक है। भगवान श्रीराम और भरत का मिलन रिश्तों में प्रेम, सम्मान और समर्पण का महत्व बताता है। उन्होंने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन परंपराओं को जीवंत बनाए रखते हैं। ऐसे कार्यक्रमों से नई पीढ़ी अपनी संस्कृति और संस्कारों से जुड़ती है। शहरवासियों की भागीदारी सामाजिक एकता और आपसी सद्भाव को मजबूत करती है। त्याग और समर्पण का संदेश देता है भरत मिलाप: मोहन श्रीवास्तव पूर्व डिप्टी मेयर और नगर निगम सशक्त स्थायी समिति के सदस्य डॉ. अखौरी ओंकार नाथ उर्फ मोहन श्रीवास्तव ने कहा कि भगवान श्रीराम और भरत का मिलन त्याग, प्रेम, मर्यादा और भाईचारे का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भरत ने राजसुख का त्याग कर बड़े भाई के प्रति निष्ठा दिखाई। यह आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। ऐसे आयोजनों से गयाजी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान मजबूत होती है तथा समाज में आपसी प्रेम और सद्भाव को बढ़ावा मिलता है। शहर के गणमान्य लोग रहे मौजूद कार्यक्रम में व्यवसायी अशोक लाल, उद्योगपति गौतम कुमार, डॉ. कनिष्क, डॉ. कुमार अनुपम, डॉ. गुंजन, समाजसेवी राखी अग्रवाल, ममता कुमारी, अनु कुमारी, प्रियदर्शिनी भारती, पार्षद गजेंद्र सिंह और श्री दशहरा कमेटी के अजय तरवे सहित रामलीला समिति के सदस्य और शहर के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। धार्मिक आस्था के साथ आयोजित भरत मिलाप ने सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का संदेश दिया। 57 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी लोगों को प्रेम, त्याग, विश्वास और पारिवारिक मूल्यों की याद दिलाती है।



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