लंदन/रियाद26 मिनट पहले
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ब्रिटेन ने अपने टाइफून लड़ाकू विमान सऊदी अरब भेजने का ऐलान किया है। ये विमान हूती विद्रोहियों के ड्रोन और मिसाइल हमलों से सऊदी शहरों और तेल ठिकानों की रक्षा करेंगे।
ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को यह भी साफ कहा कि वे यमन में हूती ठिकानों पर हमला नहीं करेंगे। बीते 2 महीने से हूती और सऊदी के बीच संघर्ष शुरू हो गया है।
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ सीधे अमेरिकी सैन्य हमले की मांग की थी, लेकिन ट्रम्प ने इससे इनकार कर दिया। अब ब्रिटेन सऊदी की मदद के लिए आगे आया है।

4 यूरोपीय देशों ने मिलकर बनाया टायफून विमान
टाइफून केवल हमला करने वाला लड़ाकू विमान नहीं है। यह दुश्मन के विमानों को रोकने, हवाई क्षेत्र की सुरक्षा करने और जरूरत पड़ने पर जमीन पर हमला करने में सक्षम है।
इसका रडार दूर से दूसरे विमानों का पता लगाने में मदद करता है। जरूरत पड़ने पर यह उनका पीछा कर सकता है और हवा में मिसाइल से उन्हें निशाना बना सकता है।
इसे यूरोप के चार देशों- ब्रिटेन, जर्मनी, इटली और स्पेन के सहयोग से विकसित किया गया था। इसका निर्माण किसी एक देश का अकेला प्रोजेक्ट नहीं है।

ब्रिटेन ने सऊदी की मदद का फैसला क्यों लिया?
ब्रिटेन के रक्षा मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने कहा कि सऊदी अरब पर हूतियों के लगातार हमले बेहद निंदनीय हैं। खास तौर पर रियाद के एयरपोर्ट को निशाना बनाया जाना दिखाता है कि हूती क्षेत्र में तनाव बढ़ाने के लिए किस हद तक जा रहे हैं।
उन्होंने कहा,
इसी वजह से मैंने आज ब्रिटेन की ओर से और सैन्य मदद को मंजूरी दी है। रॉयल एयर फोर्स के टाइफून विमान ड्रोन और मिसाइलों से सऊदी हवाई क्षेत्र की रक्षा के लिए उड़ान भरेंगे।

स्ट्रीटिंग ने कहा कि हूतियों के हमलों से पश्चिम एशिया में स्थिरता को खतरा है। इससे ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक रास्ते भी प्रभावित हो सकते हैं। इसका असर ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
पहले भी मदद दे चुका है ब्रिटेन
सऊदी अरब सरकार के अनुरोध पर ब्रिटेन सितंबर में भी सैन्य सहायता देने पर सहमत हुआ था। हालांकि तब उसने रॉयल एयर फोर्स का वॉयेजर विमान देने की घोषणा की थी।
इस विमान का इस्तेमाल हवा में दूसरे विमानों में ईंधन भरने के लिए किया जाता है। अब ब्रिटेन टायफून के अलावा एटलस A400M परिवहन विमान और सैन्य सलाहकार भी भेजेगा।
परिवहन विमान का इस्तेमाल सऊदी अरब के भीतर सैन्य उपकरण पहुंचाने के लिए किया जाएगा। ब्रिटिश सैन्य सलाहकार सऊदी अधिकारियों की मदद करेंगे।
ट्रम्प सरकार ने हूती विद्रोहियों से सीक्रेट डील की
16 सितंबर की एक्सिओस की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने यमन के हूती विद्रोहियों के साथ सीक्रेट डील की है।
इस डील के तहत हूतियों ने अमेरिका को भरोसा दिया है कि वे लाल सागर में अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे।
यह डील पिछले महीने ओमान की राजधानी मस्कट के अमेरिकी दूतावास में हुई थी। इसमें हूती प्रतिनिधियों ने भरोसा दिया था कि वे सऊदी अरब के अलावा दूसरे जहाजों को बाब-अल-मंदेब से गुजरने देंगे।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी कहा था कि अमेरिका हूतियों के साथ सीधे बातचीत कर रहा है। हालांकि, किसी औपचारिक गुप्त समझौते की सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई थी।

पाकिस्तान ने भी सऊदी की मदद से इनकार किया
यरुशलम पोस्ट की पिछले महीने की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी ने मक्का डिफेंस अलायंस के साथी पाकिस्तान से मदद मांगी थी। लेकिन पाकिस्तान ने यमन में लड़ने के लिए अपनी सेना या सैन्य संसाधन भेजने से इनकार कर दिया है।
पाकिस्तान ने कहा कि उसकी सेना सऊदी अरब की जमीन की रक्षा के लिए तैनात की जा सकती है, लेकिन वह किसी दूसरे देश की जमीन पर युद्ध में शामिल नहीं होगी।
‘एक पर हमला, मतलब तीनों पर हमला।’ इसी सिद्धांत के साथ पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने 7 अगस्त को ‘मक्का जॉइंट डिफेंस पैक्ट’ पर साइन किया था।
तीनों देशों के बीच इस समझौते को कई जानकारों ने ‘मुस्लिम नाटो’ की दिशा में एक अहम कदम माना था।
———————– यह खबर भी पढ़ें… सऊदी अरब हूतियों को क्यों नहीं हरा पा रहा:अमेरिकी इंटेलिजेंस और एडवांस हथियार भी बेअसर

सऊदी अरब के पास दुनिया के सबसे आधुनिक हथियारों में शामिल लड़ाकू विमान और मिसाइलें हैं। अमेरिका भी उसे हथियार और खुफिया जानकारी देकर मदद करता रहा है। इसके बावजूद सऊदी अरब यमन के हूती विद्रोहियों को हरा नहीं पाया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

