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जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने शुक्रवार को जमुई में स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर एनडीए सरकार,मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। जन सुराज समर्थित प्रत्याशी रजनीश रंजन के समर्थन में आयोजित जनसंवाद बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि 23 अक्टूबर को होने वाला चुनाव सरकार बनाने या गिराने के लिए नहीं, बल्कि सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए है। उन्होंने दावा किया कि इस चुनाव में जन सुराज सभी आठ सीटों पर एनडीए को हराएगा। प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में एनडीए के पास 202 विधायकों वाली मजबूत सरकार है,जो अगले चार साल तक चल सकती है। ऐसे में स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव सरकार बदलने के बजाय सत्ताधारी दल को जनता की नाराजगी का संदेश देने का अवसर है। ”भाजपा और जदयू के कार्यकर्ताओं में नाराजगी” उन्होंने भाजपा समर्थकों से अपील की कि यदि वे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को नेतृत्व के रूप में स्वीकार नहीं करते हैं तो भाजपा प्रत्याशी को हराकर अपना विरोध दर्ज कराएं। प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार के नाम पर वोट लेने के बाद उन्हें किनारे कर दिया गया। उन्होंने कहा कि एनडीए के चुनावी पोस्टर और नारों में अब नीतीश कुमार का चेहरा नजर नहीं आता, जबकि सम्राट चौधरी और अनंत सिंह जैसे नेताओं को प्रमुखता दी जा रही है। एनके यादव की हार होगी उन्होने कहा इससे भाजपा और जदयू के निचले स्तर के कार्यकर्ताओं में नाराजगी है और वे अंदर ही अंदर जन सुराज के प्रत्याशी की मदद कर रहे हैं। उन्होंने सम्राट चौधरी के कुछ बयानों को अहंकार का उदाहरण बताते हुए एनडीए नेतृत्व पर भी सवाल उठाए। कोसी क्षेत्र के चुनाव को लेकर प्रशांत किशोर ने दावा किया कि इस बार एनके यादव की हार होगी और रजनीश रंजन जीत दर्ज करेंगे। उन्होंने कहा कि जन सुराज की जीत से सत्ताधारी नेताओं को यह संदेश जाएगा कि जनता उन्हें चुनाव में हरा भी सकती है। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवाल उन्होंने वित्त रहित शिक्षकों को सातवां वेतनमान दिलाने का वादा करते हुए कहा कि यदि अगले लोकसभा चुनाव से पहले ऐसा नहीं कर पाए तो वे वोट मांगने नहीं आएंगे। साथ ही,रजनीश रंजन के जीतने पर कोसी क्षेत्र के 10 हजार पढ़े-लिखे युवाओं को निजी क्षेत्र में नौकरी दिलाने की जिम्मेदारी लेने की बात कही। प्रशांत किशोर ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग भाजपा की मदद कर रहा है। उनके मुताबिक, स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव शुक्रवार को कराने से मुस्लिम मतदाताओं की भागीदारी प्रभावित हो सकती है। गड़बड़ियों की जांच की मांग की उन्होंने चुनाव के लिए प्रचार अवधि कम रखने और मतदाता सूची में नाम जोड़ने-काटने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं को 10-10 हजार रुपये देकर प्रभावित किया गया, लेकिन चुनाव आयोग ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की। प्रशांत किशोर ने फॉर्म-6, फॉर्म-7 और एसआईआर प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को निष्पक्षता से काम करना चाहिए। हालांकि, चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों और चुनाव परिणामों को लेकर किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
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नीतीश को किनारे कर सम्राट-अनंत को बनाया चेहरा- प्रशांत किशोर:जमुई में NK यादव की हार का दावा, शिक्षकों-युवाओं से किए वादे
