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गयाजी में गुरुवार को भाकपा माले ने पुलिस दमन और सामंती अत्याचार के खिलाफ प्रदर्शन किया। यह मार्च दलितों, महिलाओं, मुस्लिमों और कमजोर वर्गों पर हो रहे कथित अत्याचारों के विरोध में निकाला गया। इसमें ऐपवा, इंसाफ मंच और खेग्रामस के कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए घटनाओं की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने पटना के पुनपुन स्थित बेहरावां और मुसहर टोली में पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि शराबबंदी के नाम पर 32 महिलाओं को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। साथ ही, गिरफ्तारी से बचने के लिए पुनपुन नदी में कूदे दो लोगों की कथित तौर पर पुलिसकर्मियों की ओर से पत्थर मारकर डुबोने से मौत हो गई। नेताओं ने मछली बेचने वाले सुरेश महतो के परिवार के साथ मारपीट और अपमान का मामला भी उठाया। आरोप है कि झूठे शराब के आरोप में प्रताड़ित करने पर उनके बेटे रवि कुमार ने आत्महत्या कर ली। इसके अलावा, बेतिया के दिलशाद अंसारी की पुलिस हिरासत में मौत की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि बिहार में दलितों, मुस्लिमों, महिलाओं और गरीब तबकों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।
मांझी के गृह क्षेत्र में दलितों पर अत्याचार का आरोप
नेताओं ने केंद्रीय मंत्री और गया के सांसद जीतन राम मांझी के गृह क्षेत्र में हो रही घटनाओं पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब मजदूरों को दबंगों और ईंट-भट्ठा संचालकों के प्रभाव के कारण प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। सभा में खिजरसराय के पथरा में एक अधेड़ महिला के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या की घटना का उल्लेख किया गया। इसके साथ ही कुड़वा धर्मशाला निवासी अजय मांझी की पुलिस हाजत में मौत का मामला उठाते हुए नेताओं ने ईंट-भट्ठा संचालकों की कथित मिलीभगत की जांच की मांग की। नेताओं ने 9 अक्टूबर को 65 वर्षीय कांति देवी की हत्या का मामला भी उठाया। आरोप लगाया गया कि ईंट-भट्ठे पर जबरन काम करने से इनकार करने पर उनके सीने पर ईंट से हमला किया गया, जिससे उनकी मौत हो गई। प्रदर्शनकारियों ने इस मामले में दोषियों की गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की। आंदोलन तेज करने की चेतावनी सभा में माले जिला कमेटी सदस्य सुदामा राम, रामचंद्र प्रसाद, सिद्धनाथ सिंह, बच्चू सिंह, आर्यन राज, जीतू यादव, रामानंद सिंह, नवल किशोर यादव और बरती चौधरी समेत दर्जनों लोग शामिल हुए।
सभा के अंत में नेताओं ने कहा कि दलितों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों और गरीब मजदूरों पर कथित अत्याचार के खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सरकार से सभी मामलों की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और कमजोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
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