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समस्तीपुर में 35 साल की मधुमाला देवी अन्न-पानी त्याग 2516 नुकीली कीलों से तैयार सेज पर लेटकर मां दुर्गा की आराधना कर रही हैं। सीने पर 3 किलो का कलश रखा है, जबकि बगल में त्रिशूल है। वो नवरात्र के पहले दिन से बिना अन्न-जल लिए तपस्या कर रही हैं। मधुमाला देवी की तपस्या के लिए लकड़ी का विशेष बेड तैयार कराया गया है। जो जमीन से करीब 15 इंच ऊंचा है। इसकी लंबाई करीब 6 फीट और चौड़ाई साढ़े 3 फीट है। बेड पर करीब 5 इंच लंबी कुल 2516 कीलें ठोकी गई हैं। परिवार के अनुसार, इन कीलों का कुल वजन करीब 32 किलोग्राम है। कीलों से तैयार इस सेज पर केवल एक पतली चादर बिछाई गई है। इसी पर मधुमाला देवी लेटी हुई हैं और मां दुर्गा की आराधना कर रही हैं। उनकी तपस्या देखने के लिए आसपास से लोग पहुंच रहे हैं। मधुमाला रोसड़ा के महादेवमठ वार्ड-12 स्थित चौरसिया टोला की रहने वाली है। ‘दो साल पहले सपने में हुए थे मां दुर्गा के दर्शन’ मधुमाला देवी के पति रंजीत चौरसिया के अनुसार, उनकी पत्नी की मां दुर्गा में गहरी आस्था है। करीब 2 साल पहले उसे सपने में मां दुर्गा के दर्शन हुए थे। इसके बाद उन्होंने पिछले साल नवरात्र के दौरान विधि-विधान से कलश स्थापित कर पूजा-अर्चना शुरू की। रंजीत के मुताबिक, पिछले साल नवमी के दिन उनकी पत्नी की मनोकामना पूरी हुई। इसी दिन घर में जमीन से मां दुर्गा की प्रतिमा प्रकट होने का परिवार ने दावा किया। इसके बाद परिवार ने प्रतिमा के लिए घर में ही मंदिर का निर्माण कराया। अब उसी मंदिर के सामने मधुमाला देवी कीलों की सेज पर लेटकर तपस्या कर रही हैं। 16 साल पहले हुई थी शादी, दो बच्चे हैं मधुमाला देवी की शादी करीब 16 साल पहले रंजीत चौरसिया से हुई थी। एक 14 साल का बेचा और 12 साल की बेटी है। रंजीत कपड़े की दुकान चलाते हैं। पति के अनुसार, शादी के बाद से ही मधुमाला देवी पूजा-पाठ में विशेष रुचि रखती हैं। इस नवरात्र में पत्नी की तपस्या के दौरान मैंने भी व्रत रखा है। मंदिर में पंडित की ओर से विधि-विधान से पूजा-अर्चना कराई जा रही है।
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समस्तीपुर में 2516 कीलों पर लेटकर मां की आराधना:सीने पर 3 किलो का कलश, नवरात्र के पहले दिन से छोड़ा अन्न-पानी
