![]()
मुजफ्फरपुर एसपी कार्यालय के करीब 16 साल पुराने पुलिस वेतन घोटाले में दोषी करार दी गई महिला सिपाही बेबी कुमारी की सजा पर 26 अक्टूबर को सुनवाई होगी। विशेष निगरानी कोर्ट-2 के न्यायाधीश सुमन कुमार दिवाकर ने बेबी कुमारी को आय से अधिक संपत्ति और सरकारी राशि में हेरफेर से जुड़े मामले में दोषी करार देते हुए न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है। अब अदालत सजा की अवधि तय करेगी। यह मामला उस समय सामने आया था, जब एसपी कार्यालय में तैनात तत्कालीन अकाउंटेंट सुशील कुमार चौधरी पर पुलिसकर्मियों के वेतन, टीए और एरियर की सरकारी राशि में हेरफेर कर करीब 7 करोड़ रुपए दूसरे खातों में भेजने का आरोप लगा था। साल 2006 से सितंबर 2010 के बीच करीब चार साल तक यह गड़बड़ी चलने की बात जांच में सामने आई थी। वेतन की सीडी में खाता नंबर बदलकर भेजता था रकम जांच में सामने आया था कि पुलिसकर्मियों के वेतन और दूसरे भुगतान की प्रक्रिया के दौरान अकाउंटेंट सुशील कुमार चौधरी बाहरी बैंक कर्मी की मदद से वेतन भुगतान की सीडी तैयार करवाता था। इसमें पुलिसकर्मियों के नाम तो सही रखे जाते थे, लेकिन उनके बैंक खाता नंबर बदल दिए जाते थे। इसके बाद वेतन, टीए, एरियर और दूसरे मद की सरकारी राशि पुलिसकर्मियों के खातों में जाने के बजाय सुशील चौधरी, उसकी पत्नी अनिता चौधरी और महिला सिपाहियों शकुंतला देवी व बेबी कुमारी के खातों में पहुंचने लगी। स्थानीय पुलिस की जांच में इस तरीके से करीब सात करोड़ रुपए की सरकारी राशि के गबन की बात सामने आई थी। एक ही ATM से रोज मोटी निकासी ने खोला राज इस घोटाले का खुलासा भी काफी दिलचस्प तरीके से हुआ। जांच से जुड़े पुराने घटनाक्रम के अनुसार, सुशील कुमार चौधरी के बैंक खाते से समस्तीपुर में एक ही एटीएम से लंबे समय तक लगभग एक ही समय पर मोटी रकम निकाली जा रही थी। बैंक अधिकारियों को इस पर संदेह हुआ। इसके बाद एसबीआई के अधिकारी ने तत्कालीन मुजफ्फरपुर एसपी को गोपनीय पत्र भेजकर इसकी जानकारी दी। एसपी कार्यालय में मामला पहुंचने के बाद जांच शुरू हुई। इसके बाद अकाउंटेंट और उससे जुड़े लोगों के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। छापेमारी में घरों से मिली लाखों की नकदी छापेमारी के दौरान आरोपियों के घरों से बड़ी मात्रा में नकदी, जेवरात और जमीन व निवेश से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए थे। जांच के अनुसार, शकुंतला देवी के घर से 53 लाख रुपए नकद, जबकि बेबी कुमारी के घर से 2.40 लाख रुपए नकद मिले थे। इसके अलावा जेवरात और जमीन में निवेश से संबंधित कागजात भी बरामद किए गए थे। वहीं, तत्कालीन अकाउंटेंट सुशील कुमार चौधरी के पास से 84 लाख रुपए नकद मिलने की बात जांच में सामने आई थी। नकदी इतनी अधिक थी कि नोट गिनने के लिए मशीन तक मंगवानी पड़ी थी। 2010 में दर्ज हुआ था केस गड़बड़ी सामने आने के बाद तत्कालीन डीएसपी हेडक्वार्टर के आवेदन पर 1 अक्टूबर 2010 को नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। स्थानीय पुलिस ने जांच के बाद आरोपपत्र दाखिल किया। बाद में बेबी कुमारी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले की अलग से निगरानी जांच शुरू हुई। निगरानी की जांच में बेबी कुमारी के पास आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति का मामला सामने आया। इसी आधार पर निगरानी थाना में अलग मामला दर्ज कर अनुसंधान किया गया और आरोप पत्र दाखिल किया गया। 22.42 लाख की असंतोषजनक संपत्ति का आधिकारिक आरोप निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बेबी कुमारी के खिलाफ 22 लाख 42 हजार 552 रुपए की असंतोषजनक संपत्ति के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। वहीं, मामले की विस्तृत जांच में आय से अधिक संपत्ति की राशि को लेकर अलग-अलग आकलन सामने आए हैं। निगरानी के अनुसार, बेबी कुमारी के खाते में सरकारी राशि ट्रांसफर किए जाने की भी जांच हुई थी। अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के साथ भारतीय दंड संहिता की जालसाजी, धोखाधड़ी, सरकारी राशि के गबन और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित धाराओं में उन्हें दोषी पाया है। अब 26 अक्टूबर को तय होगा कितनी सजा दोषी करार दिए जाने के बाद बेबी कुमारी को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है। अब 26 अक्टूबर को सजा के बिंदु पर सुनवाई होगी। इसी दिन अदालत यह तय करेगी कि दोष सिद्ध धाराओं में उन्हें कितनी सजा दी जाए। इस मामले में तत्कालीन अकाउंटेंट सुशील कुमार चौधरी और अन्य आरोपितों की भूमिका को लेकर भी अलग न्यायिक प्रक्रिया चल रही है। पुलिस वेतन और एरियर की राशि में हेरफेर कर सरकारी खाते से करोड़ों रुपए दूसरे खातों तक पहुंचाने का यह मामला मुजफ्फरपुर पुलिस के सबसे पुराने चर्चित वित्तीय मामलों में शामिल रहा है।
Source link
7 करोड़ के वेतन घोटाले में महिला सिपाही दोषी:अकाउंटेंट ने पत्नी और दो सिपाहियों के खातों में भेजी थी रकम; रोज एक ही ATM से निकलते थे लाखों
