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पटना में बजा आपातकालीन सायरन, 3 किमी तक फैली आवाज:इमरजेंसी में सतर्क रहने के दिए संदेश, अलग-अलग आवाजों से समझाए आपात स्थिति के संकेत




पटना में मंगलवार को दोपहर आपातकालीन सायरन का तकनीकी परीक्षण किया गया। ऑपरेशन सिंदूर के बाद देश में आपात स्थिति बनी थी। इसी को देखते हुए लोगों को आपातकालीन परिस्थितियों में अलर्ट करने के लिए सायरन बजाया गया। इस दौरान लोगों को बताया गया कि आपात स्थिति में किस तरह सतर्क रहना है और उससे निपटने के लिए क्या सावधानियां बरतनी हैं। प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई कि सायरन की आवाज सुनकर किसी भी तरह घबराने की जरूरत नहीं है। नागरिक सुरक्षा की ओर से लोगों को अलग-अलग तरह के सायरन के संकेत और आपात स्थिति में उनके अर्थ के बारे में जानकारी दी गई। सायरन की आवाज 3 किमी तक फैली। नागरिक सुरक्षा नियंत्रण कक्ष से टेस्टिंग नागरिक सुरक्षा निदेशालय की ओर से सायरन सिस्टम की तकनीकी कार्यक्षमता जांचने के लिए यह परीक्षण हुआ। यह परीक्षण न्यू पुनाईचक स्थित नागरिक सुरक्षा नियंत्रण कक्ष से किया गया। प्रशासन ने साफ किया है कि सायरन बजने का किसी तरह के वास्तविक खतरे या आपात स्थिति से कोई संबंध नहीं है। ‘आपात स्थिति में प्रतिक्रिया के बारे में बताया’ नागरिक सुरक्षा के डीआईजी मृत्युंजय चौधरी ने कहा कि अलग-अलग तरह के सायरन के जरिए लोगों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि आपात स्थिति में किस तरह प्रतिक्रिया देनी है। उन्होंने कहा कि सायरन की आवाज सुनकर लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सतर्क रहना है। पटना में नागरिक सुरक्षा की ओर से सायरन बजाए जाने के दौरान कुछ देर के लिए लोग असमंजस में नजर आए, हालांकि प्रशासन ने पहले ही इसे लेकर लोगों से नहीं घबराने की अपील की थी।
मई में ब्लैक आउट हुआ था इससे पहले मई में मॉक ड्रिल हुई थी। पटना समेत बिहार के 6 जिलों में आज सायरन बजते ही अंधेरा छा गया था। शाम 7 बजे सायरन की आवाज के साथ ही बिजली सप्लाई रोक दी गई थी। 7 बजकर 15 मिनट पर इसे फिर से बहाल कर दिया गया था। इस दौरान लोगों ने घरों, दुकानों और ऑफिस की लाइटें बंद कर दी थी। शहरों में अंधेरा छा गया था। सड़कों पर भी लोग गाड़ियों को बंद कर के खड़े हो गए थे। पटना के अलावा पूर्णिया, बेगूसराय, कटिहार, किशनगंज और अररिया में भी ब्लैकआउट किया गया था। 6 शहरों में भारत सरकार के निर्देश पर ये सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल की गई। राज्य सरकार के मुताबिक, ये किसी खतरे की स्थिति नहीं बल्कि नागरिक सुरक्षा व्यवस्था, आपदा प्रबंधन क्षमता और प्रशासनिक तैयारियों को परखने के लिए की जा रही प्रैक्टिस थी।



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