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दरभंगा में पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से पद्मश्री-पद्मभूषण से सम्मानित 70 वर्षीय पर्यावरणविद् डॉ. अनिल प्रकाश जोशी की अंतरराष्ट्रीय साइकिल यात्रा केवटी-रनवे बाजार पहुंची। दरभंगा से आज वे अपने साथियों के साथ निकले। यहां स्थानीय लोगों ने यात्रा में शामिल सभी सदस्यों का स्वागत किया। डॉ. जोशी के नेतृत्व में करीब 25 लोगों का जत्था साइकिल से रोज 60 से 70 किलोमीटर की दूरी तय कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहा है। केवटी इस यात्रा का दूसरा पड़ाव रहा। आज दरभंगा से यात्रा आगे बढ़ी। डॉ. जोशी ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर उनकी यह 5वीं साइकिल यात्रा है। इस बार यात्रा की शुरुआत जनकपुरधाम से 2 अक्टूबर को हुई। नेपाल से रवाना होने के दौरान टीम को वहां के राज्यपाल और एक मंत्री ने विदा किया। जनकपुरधाम से जयनगर होते हुए यात्रा मधुबनी के ककरौल पहुंची, जहां पहला पड़ाव रहा। इसके बाद साइकिल सवार केवटी पहुंचे। सात राज्यों से होकर उत्तराखंड में यात्रा समाप्त होगी।
मनुष्य ने प्रकृति को लगातार नकारा है केवटी में डॉ. जोशी ने कहा कि यह यात्रा मां जानकी की धरती से जंगल, मिट्टी, पानी और पर्यावरण के दूसरे महत्वपूर्ण घटकों के संरक्षण का संदेश लेकर शुरू हुई है। उनका उद्देश्य साइकिल से अधिक से अधिक लोगों के बीच पहुंचना और उन्हें प्रकृति की रक्षा के लिए जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि पिछले करीब 100 वर्षों में मनुष्य ने प्रकृति को लगातार नकारा है। हमने अपने आराम के लिए घर बनाए, सड़कें बनाईं, हवाई जहाज बनाए और विकास के तमाम साधन तैयार किए, लेकिन प्रकृति को सुरक्षित रखने के लिए उतनी गंभीर व्यवस्था नहीं की। अब इसका असर दिखाई देने लगा है और प्रकृति का संतुलन तेजी से बिगड़ रहा है। डॉ. जोशी ने कहा कि दुनिया ने पहले भी प्राकृतिक बदलाव देखे हैं, लेकिन इस बार प्रकृति में हो रहे बदलाव के पीछे मानव की गतिविधियां और गलतियां बड़ी वजह हैं। यदि समय रहते इसे नहीं समझा गया तो दुनिया प्रलय की ओर बढ़ सकती है।
खेत-खलिहान और नदी-तालाब नहीं बचेंगे तो मानव कैसे बचेगा कहा कि आज जरूरत प्रकृति को समझने और उसे संभालने की है। आने वाले समय में यदि खेत और खलिहान नहीं रहे, नदी और तालाब नहीं रहे, जल और वायु प्रदूषित होते गए तो मानव जीवन के सामने बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। पर्यावरण का संरक्षण केवल पेड़ लगाने तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि मिट्टी, पानी, जंगल, नदियों, हवा और पूरे प्राकृतिक तंत्र को सुरक्षित रखना जरूरी है।
डॉ. जोशी ने कहा कि मानव अपने पूर्वजों का श्राद्ध करता है और पितृपक्ष में उन्हें जल अर्पित करता है, लेकिन यदि प्रकृति इसी तरह नष्ट होती रही तो आने वाली पीढ़ियों के सामने अस्तित्व का संकट होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आने वाली पीढ़ी ही सुरक्षित नहीं रहेगी तो हमारे पितरों का श्राद्ध और तर्पण करने वाला कौन बचेगा। इसलिए मानव को बचाने के लिए पर्यावरण की सुरक्षा जरूरी है। साइकिल यात्रा से स्वास्थ्य और जागरूकता दोनों का संदेश
उन्होंने कहा कि साइकिल से यात्रा करने के पीछे दो उद्देश्य हैं। एक ओर इससे स्वास्थ्य बेहतर रहता है, वहीं दूसरी ओर रास्ते में अलग-अलग जगहों पर रुककर आम लोगों से सीधे संवाद किया जा सकता है। साइकिल यात्रा के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश गांव, कस्बे और शहर तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इस यात्रा में स्कूल और कॉलेज से लेकर विश्वविद्यालय स्तर के छात्र-छात्राएं भी शामिल हैं। अलग-अलग राज्यों के युवा और पर्यावरण से जुड़े लोग भी जत्थे का हिस्सा हैं।
सात राज्यों से होकर उत्तराखंड में समाप्त होगी यात्रा जनकपुरधाम से शुरू हुई यह साइकिल यात्रा बिहार के बाद उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड समेत सात राज्यों से होकर गुजरेगी। यात्रा का मार्ग पटना, लखनऊ, दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा होते हुए उत्तराखंड तक निर्धारित है। कई किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद यात्रा उत्तराखंड में समाप्त होगी। यात्रा में अनिल डंगवाल, मनमोहन जोशी, दीपेश कोठारी, प्रमोद जोशी, रमन कुमार मिश्रा, अनिल जोशी, मेघा, ज्योति, तनुजा और रंजना सहित बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई लोग शामिल हैं। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर स्थानीय लोगों, विद्यार्थियों और सामाजिक संगठनों के साथ संवाद कर पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
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नेपाल से उत्तराखंड साइकिल यात्रा पर निकले डॉ. अनिल:पद्मश्री-पद्मभूषण जोशी की यात्रा दरभंगा पहुंची, 25 लोगों के जत्थे के साथ रोज कर रहे 60-70 KM सफर
