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नई दिल्ली की स्पेशल NIA कोर्ट ने यासीन मलिक समेत 7 आरोपियों के खिलाफ PMLA के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि आरोपियों ने पाकिस्तान और अन्य आतंकी संगठनों से अलग-अलग माध्यमों से पैसा लिया। मामले में ₹8.94 करोड़ की अपराध से अर्जित रकम जुटाने और आरोपियों तक पहुंचाने का आरोप है। अन्य आरोपियों में जहूर अहमद शाह वटाली, अब्दुल राशिद शेख, शबीर अहमद शाह, नवल किशोर कपूर, ट्रिसन फार्म्स एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और मसरत आलम भट शामिल हैं। यह मामला 2017 में NIA की ओर से दर्ज केस पर आधारित है। ED ने अपराध से अर्जित रकम का पता लगाने के लिए 14 जून 2017 को शिकायत दर्ज की थी। जम्मू-कश्मीर में हिंसा के लिए पैसे का इस्तेमाल किया गया विशेष NIA जज प्रशांत शर्मा ने रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री के आधार पर सातों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सामग्री है, जिससे उन पर मजबूत संदेह होता है। ED के मुताबिक, इस पैसे का इस्तेमाल अलगाववादी गतिविधियों और जम्मू-कश्मीर में हिंसा बढ़ाने के लिए किया गया। जांच के अनुसार, पैसे को कैश कूरियर समेत कई माध्यमों से पहुंचाया गया। आरोप है कि पाकिस्तान हाई कमीशन, नई दिल्ली से रकम जुटाकर हुर्रियत नेताओं तक पहुंचाई गई, जिसमें यासीन मलिक भी शामिल था मलिक ने फंड जुटाने के लिए नेटवर्क तैयार किया था ED के मुताबिक, यासीन मलिक जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) का प्रमुख था। संगठन 1990 के दशक से जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों और हिंसा में शामिल रहा है। यासीन मलिक ने दुनियाभर से फंड जुटाने के लिए एक नेटवर्क तैयार किया था। जहूर अहमद शाह वटाली के यहां से जब्त दस्तावेजों में विदेशी फंडिंग की जानकारी मिली थी। इनके मुताबिक, वित्त वर्ष 2015-16 में जहूर अहमद शाह वटाली के जरिए यासीन मलिक, शबीर अहमद शाह और मसरत आलम को विदेशी रकम मिली थी।
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ED का आरोप-यासीन मलिक समेत 7 को पाकिस्तान से फंडिंग:हवाला के जरिए करीब 9 करोड़ आए; NIA कोर्ट बोली- सभी पर आरोप तय हों
