9 मिनट पहले
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पितरों के लिए विशेष धर्म-कर्म करने का उत्सव पितृ पक्ष शुरू हो गया है। आज आश्विन कृष्ण प्रतिपदा तिथि पर उन मृत लोगों के लिए श्राद्ध किया जाएगा, जिनकी मृत्यु प्रतिपदा तिथि पर हुई थी। कुटुंब के मृत लोगों को पितर देव माना जाता है। मान्यता है कि पितृ पक्ष में किए गए श्राद्ध कर्म, धूप-ध्यान से पितर देव प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा से घर-परिवार में खुशहाली बनी रहती है।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, पितृ पक्ष में पितरों के लिए श्राद्ध-तर्पण और दान-पुण्य खासतौर पर करना चाहिए। जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र, धन, जूते-चप्पल, छाता, ऊनी वस्त्र, खाना, पलंग आदि चीजें दान कर सकते हैं। इस शुभ काम से भी पितरों को तृप्ति मिलती है और पितरों के आशीर्वाद से परिवार में सुख-शांति आती है।
कब करें धूप-ध्यान?
शास्त्रों के अनुसार सुबह और शाम का समय देवी-देवताओं की पूजा के लिए शुभ माना गया है, जबकि पितरों के लिए धर्म-कर्म करने का सबसे अच्छा समय दोपहर करीब 12 बजे का रहता है। इस समय को कुतुप काल कहते हैं। कुतुप काल में ही पितरों के लिए धूप-ध्यान, तर्पण, पिंडदान आदि शुभ करना चाहिए।
धूप-ध्यान के लिए जरूरी चीजें
गाय के गोबर से बने कंडे, धूप देने के लिए हवन कुंड या अन्य कोई बर्तन, घी, काले तिल, चावल, गुड़, कर्पूर, जल से भरा तांबे का लोटा, फूल, बैठने के लिए आसन। अगर ये सभी चीजें उपलब्ध न हो, तो जल, तिल, कंडे के अंगारे और गुड़-घी से भी श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण करके धूप-ध्यान किया जा सकता है। आप चाहें तो खीर-पुड़ी भी बना सकते हैं। खीर-पुड़ी से भी धूप दिया जाता है।


