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महिलाएं कर रही शराब तस्करी, 4 महीने में 67 अरेस्ट:नालंदा में सुबह-शाम ड्रोन से निगरानी कर रही एक्साइज, पढ़िए कैसे महिलाओं को कैरियर बना रहे माफिया




नालंदा में मई 2026 से अगस्त 2026 के बीच कुल 67 महिलाओं को अवैध शराब के निर्माण, भंडारण के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। महिलाएं मुख्य रूप से अवैध देशी और चुलाई शराब के निर्माण और खुदरा कारोबार में लिप्त पाई गई हैं। मई में देशी शराब के मामले में 14 महिलाओं को गिरफ्तार किया गया था, जिनके पास से 61 लीटर शराब जब्त हुई थी, जबकि विदेशी शराब के मामले में भी 1 महिला की गिरफ्तारी 9.750 लीटर शराब के साथ हुई। इसके बाद जून में 11 महिलाओं को 39.800 लीटर देशी शराब के साथ दबोचा गया। जुलाई और अगस्त के महीनों में ये संख्या थमने के बजाय और तेजी से बढ़ी। जुलाई 2026 में 19 महिलाओं को 88.050 लीटर देशी शराब के साथ पकड़ा गया, जबकि अगस्त में आंकड़ा बढ़कर 22 महिलाओं तक पहुंच गया, जिनके कब्जे से रिकॉर्ड 138.200 लीटर देशी शराब बरामद की गई। इन चार महीनों के दौरान महिलाओं के पास से कुल 327.050 लीटर देशी शराब और 9.750 लीटर विदेशी शराब बरामद की गई है। मई से अगस्त के बीच कुल 196 पुरुष गिरफ्तार हुए, जिनमें देशी शराब के मामले में 136 और विदेशी शराब के मामले में 60 पुरुष शामिल थे। ड्रोन से निगरानी की 2 तस्वीरें देखिए जनवरी से सितंबर तक 53 हजार से अधिक छापे जिले में जनवरी से सितंबर 2026 तक शराब माफिया के खिलाफ मद्यनिषेध विभाग की ओर से चलाए गए अभियान की रिपोर्ट के मुताबिक, शहरी और ग्रामीण इलाकों में 53,162 छापेमारी अभियान चलाए गए। इस दौरान अलग-अलग धाराओं में 1,699 मामले दर्ज किए गए और 2,039 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया। गिरफ्तार किए गए लोगों में 1,541 व्यक्ति शराब का सेवन करने वाले यानी आदतन शराबी पाए गए, जबकि 498 आरोपी शराब बेचने, चुलाई करने, भंडारण करने और होम डिलीवरी जैसे अवैध कृत्यों में सीधे संलिप्त थे। कार्रवाई के दौरान विभाग ने भारी मात्रा में शराब की खेप भी नष्ट और जब्त की है। कुल जब्ती का आंकड़ा 48,142.330 लीटर तक जा पहुंचा है। इसमें 43,314.515 लीटर अवैध देशी व चुलाई शराब तथा 4,827.815 लीटर विदेशी शराब व बीयर शामिल है। इसके अलावा तस्करी में प्रयुक्त होने वाले 64 छोटे-बड़े वाहनों को भी जब्त किया गया है। मई के महीने में विभाग ने सर्वाधिक 10,159 ठिकानों पर दबिश दी थी, जबकि जून में 6,740 लीटर से अधिक शराब जब्त कर 294 धंधेबाजों को पकड़ा गया था। जागरूकता के साथ ड्रोन और डॉग स्क्वायड से पहरा नालंदा के मद्यनिषेध अधीक्षक संजय कुमार चौधरी ने बताया कि जिले में शराबबंदी कानून को पूरी सख्ती और प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विभाग चौबीसों घंटे पूरी मुस्तैदी से काम कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग आम जनता के बीच लगातार जागरूकता अभियान भी चला रहा है ताकि लोग शराब के दुष्प्रभावों को समझें और इसके अवैध धंधे से पूरी तरह दूरी बनाएं। उन्होंने कहा कि खासकर उन बस्तियों और संवेदनशील इलाकों में विशेष काउंसलिंग सत्र और प्रचार-प्रसार किया जा रहा है जहां पारंपरिक रूप से शराब बनाने का काम होता रहा है। महिलाओं को आजीविका के वैकल्पिक साधनों से जोड़ने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है ताकि वे चंद रुपयों के लालच में किसी गैरकानूनी चक्रव्यूह में न फंसें। दूसरी ओर, जमीनी स्तर पर तस्करों पर शिकंजा कसने के लिए तकनीकी संसाधनों का भरपूर सहारा लिया जा रहा है। 82 सदस्यीय टीम के नेतृत्वकर्ता इंस्पेक्टर नीतीश कुमार ने बताया कि विभाग की विशेष टीमें दिन-रात शहर से लेकर दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों, नदी कछारों और दुर्गम बधारों में गश्त कर रही हैं। तस्करों की टोह लेने के लिए आधुनिक ड्रोन कैमरों और प्रशिक्षित डॉग स्क्वायड की मदद ली जा रही है। जहां इंसानी पहुंच मुश्किल होती है या धंधेबाज झाड़ियों, भूसे के ढेरों अथवा जमीन के भीतर शराब छुपाकर रखते हैं, वहां डॉग स्क्वायड सूंघकर सटीक सुराग दे देता है, जबकि ड्रोन के जरिए आसमान से संदिग्ध गतिविधियों पर 360 डिग्री नजर रखी जा रही है। अलग-अलग इलाकों में छापेमारी के लिए बनाई टीम जिले में अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई के लिए अलग-अलग टीम बनाई गई है। बिहार शरीफ सदर और राजगीर अनुमंडल क्षेत्र की सुरक्षा और निगरानी का जिम्मा 18 सिपाहियों और सीनियर पदाधिकारियों को दी गई है। वहीं, हिलसा अनुमंडल क्षेत्र में 6 कर्मियों की टीम तैनात की गई है। हर दिन सुबह दो अलग-अलग टीमें एक साथ निकलती हैं, जिनमें से एक टीम राजगीर के पहाड़ी, पर्यटन क्षेत्रों की ओर रुख करती है और दूसरी टीम बिहार शरीफ सदर के संवेदनशील शहरी व ग्रामीण इलाकों को खंगालती है। शाम को फिर से दो स्पेशल टीमें तलाशी और वाहन जांच के लिए निकलती हैं। इन अभियानों के दौरान 1 हाई-टेक ड्रोन और 1 विशेष डॉग स्क्वायड लगातार टीमों के साथ मूवमेंट में रहता है। जैसे ही किसी खेत-खलिहान, सुनसान खंडहर या ईंट-भट्ठे के पास शराब छिपाने या भट्टी सुलगने का अंदेशा होता है, पहले ड्रोन से हवाई रेकी की जाती है और फिर जमीन पर पुलिस बल डॉग स्क्वायड की अगुवाई में त्वरित छापेमारी की जाती है। सुरक्षा का ढाल बनीं महिलाएं तस्करों के जाल में कैसे उलझीं? पुलिसिया जांच के मुताबिक, शराब माफिया ने जांच एजेंसियों की मनोवैज्ञानिक सीमाओं का फायदा उठाना शुरू किया है। अमूमन चौराहों और नाकों पर सुरक्षा बल महिलाओं की सघन तलाशी लेने से कतराते हैं या उनके प्रति संवेदनशीलता बरतते हैं। माफिया इसी बात का अनुचित लाभ उठाकर महिलाओं को कैरियर या छोटे स्तर के खुदरा विक्रेता के रूप में इस्तेमाल करने लगे हैं। झोपड़पट्टियों और आर्थिक रूप से कमजोर तबकों की महिलाओं को आसान और तुरंत मिलने वाले मुनाफे का लालच देकर देशी शराब की चुलाई और बिक्री के काम में झोंक दिया जाता है। इसके अलावा कई मामलों में घर के पुरुष सदस्यों के पूर्व में जेल चले जाने के बाद परिवार चलाने के नाम पर भी महिलाएं उसी अवैध कारोबार की कमान संभाल लेती हैं।



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