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अक्टूबर-नवंबर में संभावित बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव को लेकर निशांत कुमार एक्टिव हो गए हैं। वह लगातार बैठकें कर रणनीति बना रहे हैं। नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद एक MLC सीट (भोजपुर-बक्सर) हार चुकी JDU के लिए यह चुनाव जीतना जरूरी है। निशांत कुमार के लिए जीत क्यों जरूरी है, JDU हारी तो क्या होगा, पार्टी की जीत का प्लान क्या है, समझेंगे; बूझे की नाही में…। कितनी सीटों पर चुनाव, कब तक बिहार विधान परिषद की 8 सीटों का कार्यकाल 16 नवंबर 2026 को खत्म हो रहा है। संभव है कि अक्टूबर के आखिरी या नवंबर के पहले सप्ताह में वोटिंग होगी। 8 में से 4 सीटों पर जनता दल यूनाइटेड (JDU) चुनाव लड़ेगी। हालांकि, इसका आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। लेकिन कैंडिडेट ने तैयारी शुरू कर दी है। JDU किन-किन सीटों पर लड़ेगी, कैंडिडेट्स कौन होंगे JDU स्नातक कोटे की तिरहुत और पटना, शिक्षक कोटे की सारण और दरभंगा सीट पर लड़ने की तैयारी कर रही है। हालांकि, अब तक औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है। पटना स्नातक सीट से मौजूदा MLC नीरज कुमार का चुनाव लड़ना लगभग तय है। अभिषेक झा की उम्मीदवारी की घोषणा खुद निशांत कुमार ने अपने मुजफ्फरपुर दौरे के दौरान की थी। बिहार सरकार के मंत्री और JDU के सीनियर नेता अशोक चौधरी ने सारण में पुष्कर आनंद के नाम की घोषणा की थी। अभी तक सिर्फ दरभंगा शिक्षक सीट पर ही कैंडिडेट को लेकर JDU ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन दिलीप चौधरी रेस में आगे बताए जा रहे हैं। हालांकि, JDU ने आधिकारिक रूप से किसी भी सीट पर कैंडिडेट के नाम का ऐलान नहीं किया है। निशांत कुमार के लिए जीतना क्यों जरूरी, 4 कारण 1. पटना हारे तो पूरे राज्य में बिगड़ेगा परसेप्शन JDU विधायक अनंत सिंह ने पटना स्नातक से JDU कैंडिडेट नीरज कुमार का खुलकर विरोध किया है। इससे सीट फंस गई है। अनंत सिंह के साथ 7 सिंतबर को JDU के सीनियर नेताओं की बैठक बेनतीजा रही। इसके बाद 16 सिंतबर को निशांत कुमार ने खुद इस सीट का मोर्चा संभाला है। निशांत ने एरिया के विधायकों, सांसदों और बडे़ नेताओं के साथ बैठक की। रणनीति बनाई। दरअसल, पटना स्नातक सीट JDU के नाक की लड़ाई की सीट है। क्योंकि… 2. उत्तराधिकार की बहस खत्म नहीं होगी नीतीश कुमार के बिहार से दिल्ली जाने के बाद उनकी विरासत को लेकर अंदरखाने बहुत खींचतान है। समय-समय पर राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा उनकी विरासत पर दावा करते हैं। नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद CM बने सम्राट चौधरी स्वभाविक उत्तराधिकारी के तौर पर उभरे हैं। हालांकि, JDU नीतीश कुमार के बेटे निशांत को ही असली वारिस और उत्तराधिकारी बता रही है। 8 मार्च 2026 को JDU जॉइन करने वाले निशांत 7 मई को सम्राट कैबिनेट में स्वास्थ्य मंत्री बने। वह लगातार सरकारी हॉस्पिटलों का दौरा कर रहे हैं और सरकार की योजनाओं को जमीन पर उतारने में जुटे हैं। निशांत कुमार के पीछे धीरे-धीरे पार्टी एकजुट होती दिख रही है। पार्टी ने हाल में उनके मंत्री बनने के 100 दिन पूरा होने पर जश्न मनाया और उनके कामकाज की रिपोर्ट पेश की। यह एक तरह से लोगों को मैसेज था कि JDU के भविष्य निशांत कुमार ही हैं। 3. पार्टी वर्करों में भरोसा कम होगा किसी भी क्षेत्रीय दल की ताकत उसके जमीनी कार्यकर्ता होते हैं। वह अपने नेता के करिश्मे के सहारे अपना भविष्य देखते हैं। अगर नेता का करिश्मा जनता पर नहीं चलता है तो वह अपना रुख बदल लेते हैं। पॉलिटिकल एनालिस्ट संजय सिंह कहते हैं, ‘इस चुनाव में हार से JDU के जमीनी कैडर के बीच यह मैसेज जा सकता है कि शीर्ष नेतृत्व अपने सबसे प्रमुख उम्मीदवार को भी जिताने में सक्षम नहीं है। इससे उनका मनोबल टूटेगा।’ 4. पार्टी के पुराने नेताओं की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी मीडिया रिपोर्ट और अंदरखाने की चर्चा की मानें तो JDU में फिलहाल सब ठीक नहीं चल रहा है। कुछ सीनियर नेताओं में आपसी टकराव की बातें सामने आ रही है। अगर निशांत कुमार के नेतृत्व में JDU विधान परिषद चुनाव जीत जाती है तो ज्यादा संभव है कि ये टकराव खत्म हो जाएगा और पार्टी की पूरी कमान निशांत के हाथों में आ जाएगी। हालांकि, अगर रिजल्ट JDU के खिलाफ गए तो टकराव तेजी से बढ़ सकता है। धीरे-धीरे किनारे किए जा रहे नेताओं की भूमिका बढ़ सकती है। …तो फिर जीतने के लिए JDU क्या कर रही सूत्रों के मुताबिक, JDU अपने सभी 4 विधान परिषद की सीटों को जीतने के लिए 3 तरह की रणनीति पर काम कर रही है। 1. सांसद-विधायकों को मिली जिम्मेदारी पार्टी चुनाव की तारीख के ऐलान से पहले ही चुनावी क्षेत्र में एक्टिव हो गई है। सीनियर नेता अलग-अलग बैठक कर जिला अध्यक्ष से लेकर विधायक, सांसद और विधान पर्षदों की जिम्मेदारी तय कर रहे हैं। 16 सिंतबर को निशांत कुमार ने पटना स्नातक एरिया के विधायकों, सांसदों, विधान पार्षदों के साथ बैठक कर उनकी जिम्मेदारी तय की। उनके फीडबैक लिए। साथ ही उनसे सीधे कहा गया कि आप पूरे क्षेत्र में घूमने के बजाय सिर्फ अपने एरिया पर फोकस करें। अपने-अपने एरिया के वोटर के घर-घर तक पहुंचे। उन्हें पार्टी के अब तक के कामों को बताए और अपने से जोड़े। 2. नेताओं के आपसी मनमुटाव को दूर करने का प्रयास सूत्रों के मुताबिक, पार्टी चुनाव से पहले नेताओं के आपसी मनमुटाव को दूर करने का प्रयास कर रही है। अभी पार्टी के सामने सबसे बड़ी समस्या पटना स्नातक सीट पर ही दिख रही है। इसलिए बात बिगड़ने से पहले ही पार्टी ने तुरंत पहल की। पार्टी के कैंडिडेट के विरोध का ऐलान कर चुके बाहुबली विधायक अनंत सिंह के साथ बैठक की गई। उनसे सपोर्ट मांगा गया। हालांकि, बैठक में बात नहीं बनी। लेकिन पार्टी को अब भी उम्मीद है कि आगे बात बन जाएगी। यही कारण है कि सीनियर नेता अभी तक इस पर कुछ भी खुलकर नहीं बोल रहे हैं। बस उम्मीद जता रहे हैं। पार्टी ने यही रणनीति तिरहुत स्नातक और सारण शिक्षक कोटे की सीट पर भी अपनाया है। वहां के अलग-अलग नेताओं के साथ सीनियर नेता लगातार टच में हैं। 3. काडर में JDU खत्म नहीं होने का भरोसा जगाना सूत्रों के मुताबिक, पार्टी की पुरजोर कोशिश है कि काडर और लोगों के बीच सीधा मैसेज जाए कि JDU नीतीश कुमार के बाद भी खत्म नहीं होगी। मजबूती से अपनी स्वतंत्र विचारधारा के आधार पर चुनाव लड़ती रहेगी। लोगों में यह भरोसा जगाने के लिए ही पार्टी ने फिलहाल 2 बड़े काम किए हैं। पहला- पार्टी ने बांग्लादेश जल संधि को खत्म करने के लिए 12 जिलों में नीतीश संवाद कार्यक्रम किया। इसका नेतृत्व राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने किया। उन्होंने लोगों के बीच साफ कहा कि हम बिहार की लड़ाई लड़ते रहेंगे। भले सत्ता ही क्यों न चली जाए। संजय झा का यह बयान पार्टी के काडर में भरोसा जगाने के लिए था, कि पार्टी अपनी शर्तों पर राजनीति करती रहेगी। दूसरा- JDU ने भाजपा से बिहार विधान परिषद की सभापति का पद अपने खाते में मांगा है। अभी यह पद BJP के पास है। अवधेश नारायण सिंह सभापति हैं। बताया जा रहा है कि JDU ने सभापति पद पर दावा ठोकते हुए तर्क दिया है कि विधानसभा अध्यक्ष और विधान परिषद सभापति, दोनों संवैधानिक पद BJP के पास है। इसलिए इसमें से एक पद हमें चाहिए। पार्टी यह डिमांड कर लोगों और अपने काडर को मैसेज दे रही है कि हम BJP के साथ बराबरी के साझीदार हैं।
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MLC चुनाव: निशांत कुमार के लिए जीत क्यों जरूरी:हारे तो 4 बड़े संकट, जीते तो बदलेगा JDU का मिजाज; अंदरखाने के 3 मेगा प्लान
