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नालंदा में रोजगार मेला, 22 कंपनियां आईं:युवाओं को मिला नियुक्ति पत्र, 500 से अधिक ने ऑनलाइन कराया रजिस्ट्रेशन




बिहारशरीफ स्थित जिला नियोजनालय में मंगलवार को एक दिवसीय रोजगार मेले का आयोजन किया गया। युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग (श्रम संसाधन विभाग) के तत्वावधान में आयोजित इस मेले का शुभारंभ ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार और नालंदा सांसद कौशलेंद्र कुमार ने संयुक्त रूप से किया। अतिथियों ने चयनित युवाओं को मौके पर ही नियुक्ति पत्र भी बांटे। ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि विभाग की ओर से लगातार रोजगार के क्षेत्र में ऐसे मेलों का आयोजन किया जा रहा है। 2023 से लेकर अब तक 5,500 से ज्यादा युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जा चुका है, जबकि 18,000 से अधिक नौजवानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। उन्होंने कहा कि इसके बहुत बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं। बिहार और नालंदा के नौजवानों को बड़ी-बड़ी कंपनियां काम दे रही हैं। मुझे इन बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए बेहद प्रसन्नता हो रही है। मेले में देश भर की 22 निजी कंपनियों को आमंत्रित की गई है, जो कुल लगभग 1000 रिक्तियों के साथ यहां आई हैं। उन्होंने बताया कि नेशनल करियर सर्विस के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से 500 से अधिक युवाओं ने दोपहर तक रजिस्ट्रेशन करा लिया था और शाम तक यह आंकड़ा 1000 के पार पहुंचने की उम्मीद है। नीतीश कुमार के रास्ते पर चल रही है सरकार- सांसद नालंदा सांसद कौशलेंद्र कुमार ने कहा कि सरकार नीतीश कुमार के नेतृत्व में लगातार रोजगार सृजन के प्रयास कर रही है और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी उसी दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज के मेले में नालंदा के कई युवा साथियों का सिलेक्शन हुआ है, जो पूरे जिले के लिए खुशी की बात है। नालंदा के जिला नियोजन पदाधिकारी मो. आकिफ वक्कास ने रोजगार मेले के तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस मेले का मुख्य उद्देश्य युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। प्राइवेट सेक्टर ही सही, बेरोजगारी तो दूर हो रही है मेले में नामी कंपनी एलएंडटी की तरफ से ऑफर लेटर पाने वाले बिहारशरीफ प्रखंड के डुमरावां गांव निवासी सूरज कुमार ने अपनी खुशी जाहिर की। सूरज ने कहा कि मुझे LT से नियुक्ति पत्र मिला है और अब कंपनी की ओर से निर्धारित तिथि पर मैं ट्रेनिंग के लिए जाऊंगा। मैं फिलहाल बहुत खुश हूं और सरकार को धन्यवाद देता हूं कि सरकारी न सही, कम से कम प्राइवेट सेक्टर के जरिए ही सही, वे युवाओं की बेरोजगारी दूर करने का प्रयास तो कर रहे हैं।



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