Headlines

Delhi High Court Summons CJP & Abhijeet Dipke in Gaurav Bhatia Defamation Case


  • Hindi News
  • National
  • Delhi High Court Summons CJP & Abhijeet Dipke In Gaurav Bhatia Defamation Case

7 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

भाजपा नेता और सीनियर एडवोकेट गौरव भाटिया की मानहानि याचिका पर गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने CJP के सौरव दास और आशुतोष रांका से पूछा कि क्या वे विवादित सोशल मीडिया पोस्ट खुद हटाने को तैयार हैं। दोनों ने पोस्ट हटाने पर सहमति जताई।

भाटिया ने CJP नेताओं के खिलाफ ₹2 करोड़ की मानहानि का केस दायर किया है। मामला एक AI से बने ग्राफिक से जुड़ा है, जिसमें भाटिया की तस्वीर के साथ स्वतंत्र भारद्वाज को लेकर बयान उनके नाम से शेयर किया गया था। भाटिया ने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया।

कोर्ट बोला- विरोध के कई तरीके, बिना जांचे हमला करना सही नहीं

जस्टिस तुषार राव गेडेला ने सुनवाई के दौरान कहा कि विरोध करने के कई तरीके होते हैं। उन्होंने दास और रांका के वकीलों से पूछा कि क्या वे विवादित पोस्ट स्वेच्छा से हटा सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि अगर वे खुद पोस्ट हटा देते हैं तो फिलहाल अदालत की ओर से हटाने का आदेश देने की जरूरत नहीं होगी।

कोर्ट ने कहा कि अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है, लेकिन बिना सत्यापन के इस तरह हमला करना सही नहीं है। जज ने कहा कि अपनी बात को ज्यादा स्पष्ट और बेहतर तरीके से रखा जाना चाहिए, ताकि उसका मकसद सही तरीके से सामने आए।

दास ने कहा- एक पोस्ट पहले ही डिलीट कर दी

सौरव दास की ओर से पेश वकील ने बताया कि विवादित ट्वीट पहले ही डिलीट किया जा चुका है। इस पर कोर्ट ने कहा कि एक और पोस्ट भी डाली गई थी। इसके बाद दोनों पक्षों के वकीलों को अपने मुवक्किलों से निर्देश लेने को कहा गया।

कोर्ट ने यह भी कहा कि इन युवाओं के सामने पढ़ाई और दूसरे काम हैं, फिर उन्हें अदालत में मुकदमेबाजी में अपना समय क्यों लगाना चाहिए।

अभिजीत दीपके को पक्षकार बनाने पर सवाल

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने CJP नेता अभिजीत दीपके को मामले में पक्षकार बनाए जाने पर भी सवाल उठाया। दीपके की ओर से वकील ने कहा कि विवादित मामले से जुड़ा उनका कोई ट्वीट नहीं है और उनके खिलाफ कोई ऐसी सामग्री भी नहीं है, जिसे मानहानि का आधार बनाया गया हो।

कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया दीपके के खिलाफ कुछ नहीं दिख रहा है और संकेत दिया कि उन्हें मामले से हटाया जा सकता है।

भाटिया ने बताया कि मुकदमे की प्रति सोशल मीडिया मंच एक्स को भी दी गई है। कोर्ट ने दोहराया कि तत्काल आरोप मुख्य रूप से सौरव दास और आशुतोष रांका के खिलाफ हैं।

भाटिया बोले- मेरी तस्वीर के साथ फर्जी बयान लगाया

भाटिया खुद कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने कहा कि मामला गंभीर मानहानि का है और विवादित सामग्री इंटरनेट पर नहीं रहनी चाहिए, क्योंकि इसे बड़ी संख्या में लोगों ने देखा है। उनके मुताबिक, पोस्ट से उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचा है।

भाटिया ने आरोप लगाया कि उनकी तस्वीर के साथ एक गढ़ा हुआ बयान जोड़ा गया और ग्राफिक में एक समाचार एजेंसी का लोगो भी लगाया गया। इससे पोस्ट को वास्तविक और विश्वसनीय दिखाने की कोशिश हुई। याचिका के मुताबिक, पोस्ट को 1.32 लाख से ज्यादा लोगों ने देखा था और आपत्ति के बाद इसे हटा दिया गया।

उन्होंने अदालत से ₹2 करोड़ हर्जाने के अलावा विवादित सामग्री को दोबारा प्रकाशित या साझा करने पर रोक लगाने की मांग की है।

क्या था विवादित पोस्ट?

विवाद की शुरुआत CJP की ओर से स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर चल रहे अभियान के बीच हुई। सौरव दास ने एक ग्राफिक शेयर किया था, जिसमें गौरव भाटिया की तस्वीर के साथ उनके नाम से यह दावा किया गया कि स्वतंत्र भारद्वाज “दिमागी नक्सल” हैं, उनमें जातिवाद का जहर है और भाजपा का उनसे कोई संबंध नहीं है।

भाटिया ने तुरंत इस बयान से इनकार किया और दास को पोस्ट हटाने और बिना शर्त माफी मांगने का अल्टीमेटम दिया था। दास ने बाद में पोस्ट डिलीट कर दी और कहा कि ग्राफिक एआई से बनाया गया था।

हालांकि, दास ने पोस्ट हटाने के साथ भाजपा पर सवाल भी उठाए थे। उन्होंने कहा था कि भाजपा के सहयोगी चिराग पासवान ने स्वतंत्र भारद्वाज से खुद को अलग करते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। उन्होंने पूछा था कि भाजपा इस मामले पर चुप क्यों है और क्या पार्टी ऐसे लोगों का समर्थन कर रही है।

CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका पर आरोप है कि उन्होंने दास के पोस्ट को दोबारा साझा कर उसे आगे बढ़ाया था।

स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़ा मामला क्या है?

यह विवाद CJP कार्यकर्ता नीशू आजाद के पिता संजय कुमार पर कथित हमले से जुड़ा है। 23 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान संजय कुमार की कुछ लोगों से झड़प हुई थी। CJP का आरोप है कि स्वतंत्र भारद्वाज और अन्य लोगों ने उनके साथ मारपीट की।

इसी मामले को लेकर CJP ने स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई और एफआईआर की मांग करते हुए प्रदर्शन किया था। भारद्वाज ने कथित तौर पर संजय कुमार की “खोपड़ी तोड़ने” का दावा किया था, हालांकि बाद में उन्होंने इस बयान से इनकार कर दिया।

इसी विवाद के बीच भाटिया के नाम से कथित फर्जी बयान वाला एआई ग्राफिक सोशल मीडिया पर शेयर किया गया, जिसके बाद उन्होंने मानहानि का मुकदमा दायर किया। गुरुवार की सुनवाई में कोर्ट ने दास और रांका को पोस्ट हटाने पर निर्देश लेने को कहा और मामले की सुनवाई आगे जारी रखने का फैसला किया।

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

    OpenBuk Bharat (ओपनबुक भारत) आपका भरोसेमंद डिजिटल न्यूज़ पोर्टल है। हम राष्ट्रीय, प्रादेशिक (बिहार), वाणिज्य, और मनोरंजन जगत की हर बड़ी खबर निष्पक्षता और सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।