उपचुनाव में जीत के बाद पहली बार औरंगाबाद पहुंचे जन सुराज के नेता एवं बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर ने गुरुवार को सरकार पर तीखा हमला बोला।
.
नागरिक अभिनंदन समारोह में उन्होंने कुटुंबा प्रखंड क्षेत्र में बालिका के साथ हुई दुष्कर्म की घटना को लेकर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि जिस राज्य के मुख्यमंत्री की छवि और चरित्र आपराधिक हो, वह राज्य कभी अपराधमुक्त नहीं हो सकता। ऐसे में दुष्कर्म, हत्या और अपहरण से मुक्त बिहार बनाने का दावा करना बेमानी है।
प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार लगातार दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर अपराध की घटनाएं लोगों के सामने हैं।
उन्होंने कहा कि जब सत्ता के शीर्ष पर ही आपराधिक छवि का सवाल उठता हो तो समाज को अपराधमुक्त बनाने की बात कैसे प्रभावी होगी। उन्होंने चुनावी राजनीति में अपराध के प्रभाव पर भी सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि चुनाव में जनता ने बालू माफिया, शराब माफिया और आपराधिक छवि वाले लोगों को भी मौका दिया है। जब राजनीति में अपराध का प्रभाव रहेगा तो अपराधमुक्त समाज की कल्पना करना मुश्किल है।
प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर की जीत उनके लिए केवल चुनावी सफलता नहीं है, बल्कि जनता की ओर से मिली बड़ी जिम्मेदारी है। इस जिम्मेदारी को पूरा करने में विफल रहने पर जीत का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा।

मंच पर मौजूद प्रशांत किशोर व अन्य
‘पांच किलो अनाज जरूरतमंद तक पहुंचे, तभी जीत का फायदा’
प्रशांत किशोर ने सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और जातीय राजनीति को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा निर्धारित पांच किलो अनाज जब तक वास्तविक जरूरतमंदों तक पूरी तरह नहीं पहुंचता, तब तक चुनाव जीतने का कोई फायदा नहीं है। उनके अनुसार, चुनावी जीत का वास्तविक मतलब तभी है, जब आम लोगों के जीवन में बदलाव दिखाई दे।
उन्होंने आरोप लगाया कि जाति के नाम पर वोट देने की राजनीति ने नेताओं को राज्य और समाज के हित से दूर कर दिया है। राजनीति जाति और बिहार के विकास के बजाय परिवार के हित तक सीमित हो गई है। उन्होंने कहा कि लोग यह नहीं पूछते कि उनकी जाति में सबसे योग्य व्यक्ति कौन है, बल्कि यह देखते हैं कि उनके परिवार का कौन व्यक्ति सत्ता में पहुंचे।
उन्होंने लोगों से जाति और दल की सीमाओं से ऊपर उठकर बिहार के बदलाव के लिए मतदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि बिहार को ऐसी राजनीति की जरूरत है, जिसमें योग्यता, शिक्षा और ईमानदारी को प्राथमिकता मिले। केवल जातीय समीकरण के आधार पर सरकार चुनने से राज्य की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सकता।
बिजली गुल होने से भाषण पूरा नहीं कर सके प्रशांत
नागरिक अभिनंदन समारोह के दौरान अचानक बिजली गुल हो गई। बिजली नहीं रहने के कारण प्रशांत किशोर अपना भाषण पूरा नहीं कर सके। इसके बाद उन्होंने सभा स्थल से बाहर मीडिया से बातचीत की और राजनीतिक एवं समसामयिक मुद्दों पर अपनी राय रखी।
‘गठबंधन नहीं, व्यवस्था बदलने आए हैं’
कांग्रेस को भविष्य में समर्थन देने अथवा किसी अन्य राजनीतिक दल के साथ गठबंधन के सवाल पर प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया कि वह विधायक या सांसद बनने के लिए राजनीति में नहीं आए हैं। उनका लक्ष्य बिहार की व्यवस्था में बदलाव लाना है। उन्होंने कहा कि बिहार की राजनीति में माफिया प्रभाव को समाप्त करना और पढ़े-लिखे लोगों की भागीदारी बढ़ाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि केवल गठबंधन बनाकर सत्ता हासिल करने से व्यवस्था में बदलाव नहीं आएगा। राजनीतिक दलों के बीच गठबंधन सरकार बनाने का रास्ता हो सकता है, लेकिन इससे बिहार की मूल समस्याओं का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य सत्ता में हिस्सेदारी हासिल करना नहीं, बल्कि बिहार की व्यवस्था को बदलना है।

राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरभ ने औरंगाबाद आगमन पर प्रशांत किशोर को तलवार भेंट कर किया स्वागत
आरक्षण के मुद्दे पर ओमप्रकाश राजभर और संतोष सुमन पर निशाना
एससी-एसटी आरक्षण की समीक्षा से संबंधित उत्तर प्रदेश के मंत्री ओमप्रकाश राजभर और बिहार के मंत्री संतोष कुमार सुमन के बयानों पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। प्रशांत किशोर ने कहा कि यदि दोनों नेता आरक्षण की समीक्षा की मांग को सही मानते हैं तो उन्हें पहले सरकार से इस्तीफा देना चाहिए और उसके बाद ऐसी मांग करनी चाहिए।
बोले- पहले पूंजी का पलायन रोकना होगा
बिहार से श्रमिकों के पलायन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि केवल मजदूरों को रोकने की बात करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सबसे पहले बिहार से पूंजी का पलायन रोकना होगा। पूंजी रुकेगी तो बुद्धि का पलायन रुकेगा और जब बुद्धि बिहार में रुकेगी तो श्रम का पलायन भी धीरे-धीरे थमेगा। बिहार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए पूंजी, प्रतिभा और रोजगार के अवसरों को राज्य में बनाए रखना जरूरी है।
डस्टबिन मामले में आईएएस की भूमिका की जांच की मांग
प्रशांत किशोर ने डस्टबिन मामले को लेकर भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में एक आईएएस अधिकारी की भूमिका संदिग्ध है। हालांकि, उन्होंने अधिकारी का नाम बताने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी तेजस्वी यादव और मंगल पांडेय के मंत्री कार्यकाल के दौरान संबंधित विभाग से जुड़ा रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि डस्टबिन मामले में दोनों नेताओं की भूमिका को लेकर एक-दूसरे की ओर से सवाल नहीं उठाए जा रहे हैं। ऐसे में संबंधित आईएएस अधिकारी की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार में निष्पक्ष जांच कराने की क्षमता नहीं है।
व्यवस्था परिवर्तन को राजनीति के केंद्र में रखने का दावा
प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में व्यवस्था परिवर्तन के लिए राजनीति को अपराध और माफिया के प्रभाव से बाहर निकालना होगा। इसके साथ ही शिक्षित और योग्य लोगों को राजनीति में आगे लाना होगा। उन्होंने कहा कि बिहार के लोगों को जाति और दल के बजाय राज्य के भविष्य को ध्यान में रखकर मतदान करना चाहिए।
औरंगाबाद में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कानून-व्यवस्था, जातीय राजनीति, भ्रष्टाचार, आरक्षण, पलायन और राजनीतिक गठबंधन जैसे कई मुद्दों को उठाकर सरकार को घेरा। उनके बयानों से साफ रहा कि जन सुराज आने वाले समय में बिहार में व्यवस्था परिवर्तन के मुद्दे को अपनी राजनीति के केंद्र में रखेगा।
