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समस्तीपुर जेल में शुक्रवार को रक्षाबंधन मनाया गया। इस अवसर पर जेल में बंद करीब 900 कैदियों की कलाई पर उनकी बहनों ने राखी बांधी। लंबे समय बाद अपने भाइयों से मिलकर कई बहनें भावुक हो गईं। भाइयों के चेहरों पर भी खुशी साफ दिखाई दी। बहनों ने भाइयों का माथा चंदन से सजाया और मिठाई खिलाकर उनकी लंबी उम्र की कामना की। जेल प्रशासन ने रक्षाबंधन के लिए विशेष व्यवस्था की थी। सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक बहनों को जेल में प्रवेश कर अपने भाइयों को राखी बांधने की अनुमति दी गई। मुलाकात के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी गई थी, ताकि कोई भी बहन अपने भाई को राखी बांधे बिना वापस न लौटे। सिलौत गांव की सविता देवी भी अपने भाइयों भोला सहनी और पंकज सहनी को राखी बांधने जेल पहुंची थीं। दोनों भाई लगभग 6 महीने से मारपीट के एक मामले में जेल में बंद हैं। सविता देवी ने दोनों भाइयों की कलाई पर राखी बांधी, उन्हें मिठाई खिलाई और उनके स्वस्थ जीवन की कामना की। 6 महीने से पत्नी की हत्या के आरोप में जेल में बंद भाई लाटबसेपुरा गांव की चंदन चांदनी कुमारी अपने भाई चंदन कुमार को राखी बांधने जेल पहुंचीं। चंदन कुमार करीब 6 महीने से पत्नी की हत्या के आरोप में जेल में बंद हैं। बहन ने भाई की कलाई पर राखी बांधी, माथे पर चंदन का तिलक लगाया और मिठाई खिलाई। भाई से मुलाकात के बाद उनकी आंखों में भावुकता साफ दिखाई दी।
इसी तरह राखी कुमारी, अनामिका कुमारी, मोनिका कुमारी और सुजाता कुमारी समेत बड़ी संख्या में बहनें अपने कैदी भाइयों से मिलने पहुंचीं।
महिला कैदियों के लिए भी राखी-मिठाई की व्यवस्था
जेल अधीक्षक प्रशांत कुमार ओझा ने बताया कि रक्षाबंधन को लेकर जेल में विशेष व्यवस्था की गई थी। सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक बहनों को कैदी भाइयों से मिलकर राखी बांधने की सुविधा दी गई। राखी बांधने के लिए जेल पहुंचने वाली किसी भी बहन को निराश होकर वापस नहीं लौटाया जाएगा। उन्होंने बताया कि महिला कैदियों के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। जेल प्रशासन की ओर से महिला बंदियों के लिए राखी और मिठाई की व्यवस्था की गई। यदि उनके भाई उनसे मिलने पहुंचते हैं तो महिला कैदियां भी अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी।
रक्षाबंधन के अवसर पर कैदियों के खान-पान का भी विशेष इंतजाम हैं।
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समस्तीपुर जेल में 900 कैदी भाइयों को बांधी राखी:शाम 5 बजे तक बहनों को मिलेगी एंट्री, एक-दूसरे से मिलकर भावुक हुए भाई-बहन
