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मोतिहारी में जिला विधिक संघ और चाणक्य विद्यापति समाज अधिवक्ता प्रकोष्ठ ने मंगलवार को व्यवहार न्यायालय परिसर में बैठक की। इस दौरान अधिवक्ताओं ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा से इस्तीफे की मांग का कड़ा विरोध किया। अधिवक्ताओं ने बीसीआई पर कथित हमले और अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा से कुछ लोगों द्वारा राजनीतिक दुर्भावना से इस्तीफा मांगे जाने के मामले पर आपत्ति जताई। उन्होंने एक स्वर में निंदा प्रस्ताव पारित कर इस कार्रवाई की निंदा की। कार्रवाई का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध बैठक में अधिवक्ताओं ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया अधिवक्ता समाज की सर्वोच्च संस्था है। इसकी स्वतंत्रता, गरिमा और अधिकारों की रक्षा करना पूरे अधिवक्ता समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी संस्था या उसके पदाधिकारी के खिलाफ राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित कार्रवाई स्वीकार्य नहीं है। अधिवक्ता समाज ऐसी किसी भी कार्रवाई का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेगा। निंदा प्रस्ताव का समर्थन जिला विधिक संघ के महासचिव राजीव कुमार द्विवेदी उर्फ पप्पू दुबे, पूर्व महासचिव नरेंद्र देव, चाणक्य विद्यापति समाज के ईश्वर चंद्र दुबे, नरेंद्र मिश्रा, अरविंद पाठक, मनोज कुमार तिवारी, जन्मेजय कुमार मिश्रा और अभिषेक कुमार दुबे उर्फ प्रीत दुबे सहित सैकड़ों अधिवक्ताओं ने ध्वनि मत से किया। “अधिवक्ता एकता जिंदाबाद” और “मनन मिश्रा जिंदाबाद” के नारे अधिवक्ताओं ने बीसीआई की स्वतंत्रता और गरिमा बनाए रखने के साथ-साथ अधिवक्ता हितों की रक्षा के लिए एकजुट रहने का संकल्प लिया। बैठक के दौरान अधिवक्ताओं में उत्साह दिखा और “अधिवक्ता एकता जिंदाबाद” तथा “मनन मिश्रा जिंदाबाद” के नारे लगाए गए। उन्होंने कहा कि देश में न्याय व्यवस्था को मजबूत करने में अधिवक्ता समाज की महत्वपूर्ण भूमिका है, इसलिए सर्वोच्च संस्था की स्वायत्तता और सम्मान से समझौता नहीं किया जा सकता। मौजूद अधिवक्ताओं ने अधिवक्ता समाज के हितों और बीसीआई की गरिमा की रक्षा के लिए आवश्यकता पड़ने पर सामूहिक रूप से आवाज उठाने की बात कही। उन्होंने पूरे अधिवक्ता समाज से एकजुट होकर संस्था की स्वतंत्रता एवं सम्मान की रक्षा करने की अपील की।
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BCI अध्यक्ष से इस्तीफे की मांग का किया विरोध:मोतिहारी में वकीलों ने सिविल कोर्ट परिसर में मीटिंग कर जताई नाराजगी
