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सरकार ने आयात की गई कच्ची चीनी को प्रोसेस कर घरेलू बाजार में बेचने की समयसीमा बदल दी है। अब चीनी कारोबारियों को इसकी एंट्री की तारीख से दो महीने के अंदर इसे सफेद या रिफाइंड चीनी में बदलकर बेचना होगा। सरकार ने यह फैसला उद्योग की उस चिंता के बाद लिया है, जिसमें जहाजों की देरी और ब्राजील के बंदरगाहों पर जाम का मुद्दा उठाया गया था। पहले सरकार ने इम्पोर्टर्स को 31 अक्टूबर तक कच्ची चीनी को प्रोसेस कर घरेलू बाजार में बेचने को कहा था। 31 अक्टूबर की तय समयसीमा हटाई सरकार ने घरेलू सप्लाई बढ़ाने और चीनी की कीमतों पर काबू पाने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी थी। इसके बाद कारोबारियों को इसे प्रोसेस कर 31 अक्टूबर तक घरेलू बाजार में बेचने की समयसीमा दी गई थी। हाल ही में हुई बैठक में उद्योग ने संबंधित मंत्रालयों से कहा कि यह समयसीमा पूरी करना संभव नहीं होगा। उद्योग ने बताया कि ब्राजील के बंदरगाहों पर जाम है और मात्रा मंजूर होने के बाद माल को भारत पहुंचने में 40 दिन लगते हैं। इन बातों को ध्यान में रखते हुए डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड यानी DGFT ने 24 अगस्त को 20 अगस्त की अधिसूचना में सुधार जारी किया। इसमें आयात की गई कच्ची चीनी को प्रोसेस करने और बेचने की समयसीमा बढ़ाई गई है। बिल ऑफ एंट्री दाखिल होने से दो महीने का समय सुधार में कहा गया है, “टैरिफ-रेट कोटा के तहत आयात की गई कच्ची चीनी को आयात के बाद उचित समय में सफेद या रिफाइंड चीनी में बदला जाएगा। आयातक को बिल ऑफ एंट्री दाखिल करने की तारीख से दो महीने से ज्यादा समय के अंदर इसे सफेद या रिफाइंड चीनी में बदलकर घरेलू बाजार में बेचना होगा।” नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रकाश नाइकनवरे ने इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने इसे “सकारात्मक कदम” बताते हुए कहा कि इससे ज्यादा मिलों को आयात के लिए आवेदन करने का प्रोत्साहन मिलेगा। मिलों ने ऑनलाइन आवेदन शुरू किए मिलों ने डीजीएफटी पोर्टल के जरिए कच्ची चीनी के आयात के लिए ऑनलाइन आवेदन करना शुरू कर दिया है। डीजीएफटी को आवेदन प्रोसेस करने और मात्रा आवंटित करने में 2-3 दिन लग सकते हैं। इसके बाद मिलें सितंबर के मध्य तक आयात के कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर करेंगी। बंदरगाहों पर जाम की स्थिति के आधार पर आयात की गई चीनी अक्टूबर के तीसरे सप्ताह तक भारत पहुंचने की उम्मीद है। सरकार ने घरेलू सप्लाई बढ़ाने और खुदरा कीमतों पर काबू पाने के लिए चीनी आयात की अनुमति दी है। मंगलवार को चीनी की खुदरा कीमत करीब 64 रुपए प्रति किलो थी। सरकार के आयात की अनुमति देने और जमाखोरी व सट्टेबाजी रोकने के दूसरे कदमों के बाद हाल के दिनों में मिल से निकलने वाली चीनी की कीमतें कम हुई हैं। इसके बावजूद खुदरा कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।
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सरकार ने चीनी आयात की समयसीमा बदली:अब एंट्री के दो महीने में रिफाइंड चीनी बेचनी होगी, 31 अक्टूबर की तय डेडलाइन हटाई
