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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आज लोक सेवा आवास स्थित ‘संकल्प’ सभागार में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक की। बैठक में राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षकों की उपलब्धता, विद्यार्थियों की उपस्थिति और स्कूलों में मिलने वाली सुविधाओं की विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि वे आगे की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी बेहतर तरीके से तैयार हो सकें। मॉडल स्कूलों की नियमित निगरानी के निर्देश बैठक में राज्य में संचालित मॉडल स्कूलों, खासकर सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूलों की व्यवस्था पर विशेष चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन स्कूलों का संचालन बेहतर और प्रभावी तरीके से किया जाए। यहां की शैक्षणिक व्यवस्था और सुविधाएं ऐसी हों, जिससे ये स्कूल अपने आप में अलग पहचान बना सकें। उन्होंने मॉडल स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता, विद्यार्थियों की उपस्थिति और पढ़ाई की गुणवत्ता की नियमित समीक्षा करने का निर्देश दिया। साथ ही अधिकारियों को स्कूलों का निरीक्षण भी नियमित रूप से करने को कहा गया। ‘एक अधिकारी-एक मॉडल स्कूल’ व्यवस्था लागू करने का निर्देश मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ‘एक अधिकारी-एक मॉडल स्कूल’ की व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू की जाए। इसका उद्देश्य यह है कि अधिकारी सीधे स्कूलों से जुड़े रहें और वहां आने वाली समस्याओं का समय पर समाधान हो सके। उन्होंने कहा कि स्कूलों का औचक निरीक्षण भी कराया जाए। स्कूल में होने वाली शैक्षणिक गतिविधियों और हर दिन किए जाने वाले कार्यों की रिपोर्ट मुख्यालय और जिला स्तर पर नियमित रूप से उपलब्ध कराई जाए। हर तीन महीने में होगी अभिभावक-शिक्षक बैठक मुख्यमंत्री ने मॉडल स्कूलों में हर तीन महीने पर अभिभावक-शिक्षक बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया। बैठक का उद्देश्य बच्चों की पढ़ाई और उनकी जरूरतों को समझना है। इस दौरान अभिभावकों और शिक्षकों के बीच बच्चों की शैक्षणिक प्रगति को लेकर नियमित बातचीत होगी। इससे यह पता चल सकेगा कि बच्चे पढ़ाई में कहां बेहतर कर रहे हैं और किन विषयों में उन्हें अतिरिक्त मदद की जरूरत है। पूर्व छात्रों से भी जोड़ा जाएगा संवाद मुख्यमंत्री ने मॉडल स्कूलों के पूर्व विद्यार्थियों से संवाद बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन स्कूलों से पढ़कर आगे बढ़ चुके विद्यार्थियों की उपलब्धियों और अनुभवों का लाभ वर्तमान छात्रों को मिलना चाहिए। इसके लिए पूर्व छात्रों के साथ नियमित बैठक और मार्गदर्शन की व्यवस्था विकसित करने का निर्देश दिया गया। इससे वर्तमान विद्यार्थियों को पढ़ाई, करियर और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर बेहतर जानकारी और मार्गदर्शन मिल सकेगा। JEE-NEET की तैयारी के लिए बेहतर मार्गदर्शन मुख्यमंत्री ने राज्य के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर मार्गदर्शन और जरूरी शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी देश की प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल करने के लिए गुणवत्तापूर्ण तैयारी का अवसर मिलना चाहिए। इसके लिए उन्हें अच्छे अध्ययन संसाधन, विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और जरूरी शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। ई-लर्निंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म को मजबूत करने पर जोर बैठक में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के ई-लर्निंग और 24×7 इंटरैक्टिव डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने इस प्लेटफॉर्म को और प्रभावी बनाने का निर्देश दिया, ताकि ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थी इससे जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों का अधिक से अधिक इस्तेमाल कर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री, विषय विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और आधुनिक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। डिजिटल सुविधाओं का लाभ हर विद्यार्थी तक पहुंचे मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि डिजिटल माध्यमों के जरिए दी जा रही सुविधाओं का वास्तविक लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि संसाधनों की कमी किसी भी स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में बाधा नहीं बननी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्कूल की गुणवत्ता केवल अच्छी बिल्डिंग और आधारभूत सुविधाओं से तय नहीं होती। इसके लिए बेहतर पढ़ाई, अनुशासन, विद्यार्थियों की उपस्थिति और उनके सर्वांगीण विकास पर भी ध्यान देना जरूरी है।
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CM सम्राट ने की शिक्षा विभाग की समीक्षा:हर 3 महीने में पेरेंट्स-टीचर बैठक का निर्देश, अधिकारी करेंगे स्कूलों का औचक निरीक्षण
