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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार, विश्वविद्यालयों और युवाओं के बीच जुड़ाव बढ़ाने की बात कही। उन्होंने कहा कि इससे नीतियां बनाने में नए और अलग तरह के विचार मिल सकते हैं। प्रधानमंत्री ने सचिवों के साथ तीसरी हाई लेवल बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कोरोना महामारी और पश्चिम एशिया संकट का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय अलग-अलग विभागों के अधिकारियों ने मिलकर काम किया था। प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान के मुताबिक, मोदी ने सरकार के विभागों, विश्वविद्यालयों और युवाओं के बीच ज्यादा जुड़ाव की जरूरत बताई, ताकि नीतियां बनाने में नए नजरिए शामिल किए जा सकें। यह बात ऐसे समय सामने आई है, जब पिछले महीने दिल्ली के जंतर-मंतर और देश के दूसरे हिस्सों में NEET पेपर लीक को लेकर छात्रों ने प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री ने कई बार सोशल मीडिया के जरिए छात्रों से संपर्क किया था। इन प्रदर्शनों के चलते धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था। मंत्रालयों के आगे के काम पर चर्चा मोदी ने X पर बताया कि सचिवों के साथ बैठक में उन्होंने बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी, सुरक्षा और विदेश मामलों से जुड़े मंत्रालयों और विभागों के आगे के काम पर चर्चा की। उन्होंने कहा, “डेटा और AI के प्रभावी इस्तेमाल, विश्वविद्यालयों के साथ ज्यादा जुड़ाव और सभी क्षेत्रों में रिसर्च व इनोवेशन पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत पर जोर दिया।” प्रधानमंत्री ने कहा कि सचिवों को तत्काल मुद्दों और आंकड़ों पर ध्यान देने के साथ देश के भविष्य को आकार देने के लिए लंबी अवधि के नजरिए से भी सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि विभागों के बीच अलग-अलग काम करने की प्रवृत्ति केवल संगठन की समस्या नहीं है, बल्कि सोच की भी समस्या है। मोदी ने अधिकारियों से अपनी जिम्मेदारियों की पूरी जिम्मेदारी लेने को कहा। डेटा और AI के इस्तेमाल पर जोर प्रधानमंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभावी इस्तेमाल की बात कही, लेकिन इसके साथ इंसानी दखल और फैसले की जरूरत भी बताई। उन्होंने डेटा को राष्ट्रीय संपत्ति और भविष्य के लिए संसाधन कहा। मोदी ने कहा कि अलग-अलग कामों के लिए डेटा जुटाने और संभालने के तरीके अलग हैं। उन्होंने ऐसे समाधान खोजने की बात कही, जिससे अलग-अलग प्रणालियां आपस में बेहतर तरीके से काम कर सकें। उन्होंने खासतौर पर रक्षा क्षेत्र में रिसर्च और इनोवेशन पर ज्यादा ध्यान देने को कहा, ताकि यह क्षेत्र वैश्विक स्तर पर ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सके। समुद्री क्षेत्र को मजबूत करने की योजना प्रधानमंत्री ने भारत के समुद्री क्षेत्र को मजबूत करने के लिए व्यापक योजना की जरूरत पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि जहाज निर्माण को बुनियादी ढांचे का दर्जा दिया गया है और यह जांचने को कहा कि इससे तय लक्ष्य पूरे हो रहे हैं या नहीं। मोदी ने भारत को बंदरगाहों के विकास से आगे बढ़ाकर बंदरगाह आधारित विकास की ओर ले जाने की जरूरत दोहराई। उन्होंने देश के समुद्री बुनियादी ढांचे का पूरा फायदा उठाने के लिए मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और निर्यात पर काम करने वाली यूनिट्स के बीच बेहतर कनेक्टिविटी पर जोर दिया। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से जूनियर सहयोगियों के साथ ज्यादा व्यक्तिगत और अनौपचारिक जुड़ाव बनाने को कहा। साथ ही, कैडर और विभागों के बीच मजबूत नेटवर्क तैयार करने की बात कही। बैठक में सचिवों ने अलग-अलग क्षेत्रों की प्राथमिकताओं, उभरती चुनौतियों और योजनाओं को लागू करने से जुड़ी समस्याओं पर अपने अनुभव साझा किए।
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पीएम मोदी की केंद्रीय सचिवों के साथ बैठक:कहा- युवाओं से जुड़ें, ताकि नीतियां बनाने में नए आइडिया मिल सकें
