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उत्तराखंड के देहरादून में भारत और नेपाल के बीच सीमा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर 14वीं संयुक्त कार्य समूह (JWG) की बैठक का पहला दिन पूरा हो गया। मसूरी रोड स्थित एक निजी होटल में चल रही दो दिन की बैठक में गुरुवार को तीन सत्रों में बातचीत हुई। अब शुक्रवार सुबह एक सत्र और होगा, जिसके बाद बैठक खत्म हो जाएगी। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच हुई बातचीत में सीमा विवाद, सीमा निर्धारण, सुरक्षा और व्यापारिक संबंधों समेत कई मुद्दे एजेंडे में हैं। हालांकि, पहले दिन की बैठक में किन मुद्दों पर क्या बातचीत हुई और कोई सहमति बनी या नहीं, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पौसुमी बसु कर रही हैं, जबकि नेपाल के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व नेपाल गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव आनंद काफ्ले कर रहे हैं। गृह मंत्रालय, आईटीबीपी, सेना और सर्वे ऑफ इंडिया के अधिकारी भी बैठक में शामिल हैं। PHOTOS देखिए ब्रिटिशकालीन नक्शों से सीमा विवाद सुलझाने की कोशिश सूत्रों के मुताबिक बैठक का अहम मुद्दा भारत-नेपाल के बीच चल रहा सीमा विवाद है। इसके समाधान के लिए सर्वे ऑफ इंडिया के पुराने रिकॉर्ड और ब्रिटिश शासनकालीन नक्शों का इस्तेमाल किया जाना है। दोनों देशों के अधिकारी इन दस्तावेजों को मौजूदा भौगोलिक स्थिति से मिलाकर विवादित सीमा क्षेत्रों पर सहमति बनाने की कोशिश करेंगे। सीमा पर जमीन और सीमा निर्धारण से जुड़े मामलों में पुराने अभिलेखों को महत्वपूर्ण माना जाता है। ब्रिटिशकालीन नक्शों के साथ दूसरे उपलब्ध दस्तावेजों और वर्तमान स्थिति का भी अध्ययन किया जाएगा। देहरादून में जुटे दोनों देशों के अधिकारी भारत-नेपाल संबंधों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को लेकर देहरादून में हो रही इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है। बुधवार देर शाम केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों का दल बैठक में शामिल होने के लिए होटल पहुंचा था। इसके साथ ही नेपाल के अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल भी देहरादून पहुंच गया था। बैठक में दोनों देशों के अधिकारी सीमा सुरक्षा और प्रबंधन से जुड़े मुद्दों के साथ आपसी समन्वय और संबंधों को बेहतर बनाने के तरीकों पर भी बातचीत कर रहे हैं। लखनऊ में ड्रोन सर्वे पर बनी थी सहमति इससे पहले 14 अगस्त को लखनऊ में भारत और नेपाल के सर्वे अधिकारियों की अहम बैठक हुई थी। इसमें सीमा पार जमीन, खेती और निर्माण से जुड़े मामलों की वास्तविक स्थिति पता लगाने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने पर सहमति बनी थी। प्रस्तावित सर्वे में ड्रोन से हवाई तस्वीरें लेने और जमीन से जुटाए गए आंकड़ों का दोनों देशों के अधिकारी संयुक्त रूप से अध्ययन करेंगे। माना जा रहा है कि देहरादून बैठक में भी इसी तकनीकी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी। उत्तराखंड के 3 जिले नेपाल सीमा से जुड़े भारत-नेपाल की करीब 1751 किलोमीटर लंबी सीमा भारत के पांच राज्यों से होकर गुजरती है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़, चंपावत और ऊधम सिंह नगर समेत कई क्षेत्र नेपाल से सीधे जुड़े हैं। इन इलाकों में दोनों देशों के लोगों के बीच लंबे समय से आवाजाही और व्यापार होता रहा है। वहीं, उत्तर प्रदेश के सात जिले भी नेपाल सीमा से जुड़े हैं। सीमा से जुड़े स्थानीय व्यापार और आवागमन पर किसी तरह का असर न पड़े, इसे लेकर भी दोनों देशों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत महसूस की जा रही है। ऐसे में देहरादून की बैठक में सीमा विवाद के साथ स्थानीय स्तर पर व्यापार और आवाजाही से जुड़े मुद्दे भी अहम रहेंगे। बालेंद्र सरकार के बाद व्यापारिक रिश्तों पर भी नजर नेपाल में प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की सरकार बनने के बाद भारत-नेपाल संबंधों और दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर नए समीकरण बने हैं। सीमा से जुड़े मुद्दों के साथ व्यापारिक संबंधों को बढ़ाने और आपसी सहयोग मजबूत करने पर भी बातचीत हो रही है। दोनों देशों के अधिकारी ऐसे रास्ते तलाश रहे हैं, जिससे सीमा विवादों का समाधान करते हुए व्यापार और स्थानीय स्तर पर होने वाली कारोबारी गतिविधियों को बेहतर बनाया जा सके। बैठक के दूसरे दिन इन मुद्दों पर आगे की चर्चा होगी। ————— ये खबर भी पढ़ें : नेपाल में एक रुपए के सिक्के से विवादित-नक्शा नहीं हटेगा: इसमें भारत के इलाकों को अपना दिखाया; नई डिजाइन का प्रस्ताव लौटाया नेपाल सरकार ने एक रुपए के सिक्के से विवादित राष्ट्रीय नक्शा हटाने का प्रस्ताव खारिज कर दिया है। इस नक्शे में भारत के लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया है। पढ़ें पूरी खबर…
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देहरादून में भारत-नेपाल की बैठक का पहला दिन पूरा:3 दौर की बातचीत हुई, कल आखिरी सत्र; अंग्रेजों के नक्शों से सीमा विवाद सुलझाने की कोशिश
