नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले
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दिल्ली में लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में लगातार दूसरे साल राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल नहीं हुए।
इस पर भाजपा ने कहा कि राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष बनने के योग्य नहीं हैं। राहुल गांधी की सोच ‘दिमागी नक्सल’ इकोसिस्टम जैसी है।
भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने X पर लिखा- राहुल लाल किले पर मौजूद रहने से बचते हैं। क्या कोई देशभक्त नेता प्रतिपक्ष या सार्वजनिक पद पर बैठा व्यक्ति जानबूझकर ऐसा कर सकता है? राहुल गांधी का समारोह में नहीं आने का फैसला वंदे मातरम के प्रति उनकी नफरत दिखाता है।
रक्षा मंत्रालय ने राहुल और खड़गे को स्वतंत्रता दिवस समारोह का औपचारिक निमंत्रण भेजा था। हालांकि, दोनों कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। इसके पीछे 2024 का विवाद बताया जा रहा है। उस समय राहुल गांधी ने समारोह में अपनी सीटिंग व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई थी।

2024 में राहुल गांधी को 5वीं लाइन में बैठाया गया था।
2024 में पीछे की लाइन में बैठाने पर हुआ था विवाद
2024 में राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बने थे। इस साल स्वतंत्रता दिवस समारोह में उन्हें लाल किले पर 5वीं पंक्ति में बैठाया गया था। कांग्रेस ने इस व्यवस्था की कड़ी आलोचना की थी और आरोप लगाया था कि सरकार ने राहुल को पीछे की सीट देकर नेता प्रतिपक्ष के पद का अपमान किया है।
हालांकि इन आरोपों पर जवाब देते हुए रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि समारोह में पहुंचे ओलंपिक खिलाड़ियों को विशेष सम्मान देने और आगे बैठाने के कारण उस साल बैठने के क्रम में यह बदलाव करना पड़ा था।
कैबिनेट मंत्री के साथ बैठते हैं विपक्ष के नेता
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष के बैठने की जगह ‘टेबल ऑफ प्रेसिडेंस’ (ToP) के नियमों के आधार पर तय की जाती है। राष्ट्रपति सचिवालय के नियमों के मुताबिक लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की रैंक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के समकक्ष होती है और बैठने की व्यवस्था इसी के हिसाब से की जाती है।
खबर को लगातार अपडेट किया जा रहा है।

