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गुरुवार को सीतामढ़ी स्थित श्री राधा कृष्ण गोयनका महाविद्यालय में शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने प्रस्तावित विश्वविद्यालय विधेयक-2026 के विरोध में प्रदर्शन किया। बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के राज्यव्यापी आह्वान पर यह विरोध दर्ज कराया गया। शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार के नेतृत्व में शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने कहा कि प्रस्तावित विश्वविद्यालय विधेयक उच्च शिक्षा की स्वायत्तता और विश्वविद्यालयों की स्वतंत्र कार्यप्रणाली के लिए हानिकारक है। उन्होंने सरकार से इस विधेयक को तत्काल वापस लेने की मांग की। आंदोलन और तेज करने की चेतावनी शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि, “प्रस्तावित विश्वविद्यालय विधेयक-2026 उच्च शिक्षा की स्वायत्तता पर सीधा हमला है। यदि यह कानून लागू होता है, तो विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की स्वतंत्र पहचान तथा शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित होगी।” उन्होंने आगे कहा कि संयुक्त संघर्ष मोर्चा चरणबद्ध आंदोलन चला रहा है और सरकार से विधेयक वापस लेने की मांग करता है। यदि सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. मोहम्मद सनाउल्लाह ने कहा, “शिक्षक केवल अपने अधिकारों के लिए नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य और गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा की रक्षा के लिए आंदोलन कर रहे हैं।” शिक्षक और कर्मचारी काली पट्टी बांधकर विरोध जताएंगे ”यह प्रस्तावित विधेयक शिक्षा व्यवस्था पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है। इसलिए सभी शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और समाज के लोगों को इसके प्रति जागरूक होना चाहिए।” संघर्ष मोर्चा के कार्यक्रम के तहत 5 से 8 अगस्त तक शिक्षक एवं कर्मचारी काली पट्टी बांधकर विरोध जताएंगे। इसके बाद 10 अगस्त को विश्वविद्यालय मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। 11 से 23 अगस्त तक विभिन्न चरणों में जन-जागरूकता अभियान और प्रतिरोध कार्यक्रम चलाए जाएंगे। शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार प्रस्तावित विश्वविद्यालय विधेयक-2026 वापस नहीं लेती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
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विश्वविद्यालय विधेयक-2026 के विरोध में शिक्षक-कर्मचारियों का प्रोटेस्ट:सीतामढ़ी में काली पट्टी बांधकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी
