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राजगीर खेल अकादमी में वेतन नहीं मिलने पर हड़ताल:राजगीर इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम के गेट नंबर एक पर जुटे 1000 मजदूर, बोले- 4 महीने सैलरी नहीं मिली




राजगीर इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम (स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स) के निर्माण में लगे करीब 1000 मजदूरों ने 4 माह से वेतन न मिलने के विरोध में मंगलवार को हड़ताल कर दी। मजदूरों ने स्टेडियम के गेट नंबर एक को जाम कर दिया और काम पूरी तरह से ठप कर दिया। मजदूरों का आरोप है कि निर्माण का जिम्मा संभाल रही शापूरजी पलोंजी कंपनी ने अप्रैल महीने के बाद से उन्हें कोई भुगतान नहीं किया है, जिसके कारण उनके सामने भुखमरी की नौबत आ गई है। उधर, मजदूरों के प्रोटेस्ट की जानकारी मिलने के बाद राजगीर एसडीओ सूर्य प्रकाश गुप्ता मौके पर पहुंचे और संबंधित एजेंसी के अधिकारियों से बात कर लेबर के पेमेंट को भुगतान करने की बात कही है, जिसके बाद प्रोटेस्ट कर रहे मजदूर हड़ताल से वापस कम पर लौट गए। 5 अगस्त तक कुछ पैसे का भुगतान जबकि 15 अगस्त तक 90% भुगतान के आश्वासन पर प्रोटेस्ट खत्म हुआ है। कंपनी के खिलाफ मनमानी का आरोप प्रदर्शन कर रहे मजदूरों ने बताया कि वे बिहार के गया, रोहतास, पूर्णिया और बेगूसराय के अलावा झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से यहां काम करने आए हैं। हेल्पर, फिटर और कारपेंटर का काम करने वाले इन मजदूरों का कहना है कि कंपनी द्वारा मनमाने ढंग से दिहाड़ी काटी जाती है। बारिश होने पर दो-तीन घंटे में ही काम बंद कराकर उन्हें वापस भेज दिया जाता है और उस दिन की पूरी दिहाड़ी काट ली जाती है। इसके अलावा 20 दिन काम करने पर केवल 10 दिन का पीएफ दिया जाता है और रविवार की छुट्टी का पैसा भी नहीं मिलता। आठ घंटे की ड्यूटी के लिए मात्र 360-370 रुपए दिए जा रहे हैं, जो अन्य जिलों के मुकाबले काफी कम है। ठेकेदार भी हुए परेशान बेगूसराय से आए मजदूर दीपक कुमार सिंह ने बताया कि कंपनी की ओर से ठेकेदारों को भी पैसे का भुगतान नहीं किया जा रहा है। इतने महीनों से ठेकेदार कर्ज लेकर मजदूरों के खाने-पीने का इंतजाम कर रहे थे, लेकिन अब उन्होंने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। मजदूरों का कहना है कि कंपनी का कोई भी प्रतिनिधि उनसे बात करने या उनकी समस्या सुनने के लिए आगे नहीं आ रहा है, जिससे उनका आक्रोश और बढ़ गया है। परिवार का पेट पालना हुआ मुश्किल वेतन न मिलने से मजदूरों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है। कामगारों का कहना है कि वे दूर-दराज से अपने परिवार की उम्मीदें लेकर यहां दो पैसे कमाने आए थे। पैसे के अभाव में घर पर उनके बच्चों के स्कूलों से नाम काटे जा रहे हैं। मजदूरों ने कहा कि भोजन के लिए प्रति सप्ताह एक हजार रुपए का खर्च है, लेकिन गुजारे के लिए उन्हें बमुश्किल 500 रुपए ही मिल पा रहे हैं। हड़ताल पर बैठे मजदूरों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक उनका बकाया भुगतान नहीं किया जाता और मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक काम पूरी तरह से ठप रहेगा।



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