14 मिनट पहले
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अमेजन ने मंगलवार को अपनी क्लाउड सर्विस को नाटो के सभी 32 सदस्य देशों के लिए उपलब्ध करा दिया है। इस पहल का मकसद सदस्य देशों के बीच संवेदनशील सरकारी और रक्षा दस्तावेजों को आसानी से शेयर करने और सैन्य योजना पर मिलकर काम करने की सुविधा देना है।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और सेना के क्लाउड कंप्यूटिंग सिस्टम में अमेजन की पहले से बड़ी भूमिका रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर खुफिया एनालिसिस, सैन्य लॉजिस्टिक्स और डिफेंस प्लानिंग के लिए सुरक्षित क्लाउड फैसिलिटी एक प्राथमिक जरूरत है।
इंटेलिजेंस शेयरिंग की चुनौती दूर होगी
अब तक नाटो देशों में अलग-अलग सुरक्षा मानकों के कारण खुफिया जानकारी शेयर करने में काफी दिक्कत आती थी। हालांकि, अब सभी 32 देशों द्वारा अप्रूव्ड कॉमर्शियल क्लाउड सॉल्यूशन का इस्तेमाल करने से समय के साथ सूचनाओं का तेजी से आदान-प्रदान और संयुक्त योजना बनाना आसान हो जाएगा।
यह नई व्यवस्था सभी सहयोगी देशों को ‘नाटो रिस्ट्रिक्टेड’ स्तर की सामग्री पर काम करने की अनुमति देती है। यह नाटो के वर्गीकरण का सबसे निचला स्तर है।
क्या बोले अधिकारी?
नाटो की कम्युनिकेशंस एंड इंफॉर्मेशन एजेंसी के प्रमुख डायलन ब्राउन ने कहा कि यह कदम नाटो की सुरक्षा बनाए रखते हुए आधुनिक तकनीकों को अपनाने की क्षमता को तेज करेगा।
वहीं, अमेजन वेब सर्विसेज (AWS) के उपाध्यक्ष डेविड अपील ने कहा कि नाटो सहयोगियों को अब वही इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा जो प्राइवेट सेक्टर में नवाचार को बढ़ावा दे रहा है।
फिलहाल टॉप-सीक्रेट डेटा शेयर नहीं होगा
नाटो में सैन्य अभियानों की योजना ‘रिस्ट्रिक्टेड’ से कहीं ज्यादा उच्च स्तर (सीक्रेट और टॉप-सीक्रेट) पर तैयार की जाती है। इसलिए, सबसे संवेदनशील कामों के लिए तुरंत क्लाउड सेवाएं उपलब्ध नहीं होंगी।
हालांकि, अमेजन का कहना है कि सभी 32 सदस्यों द्वारा सबसे निचले स्तर पर इसे मंजूरी मिलने के बाद, अब देशों के लिए क्लाउड पर अधिक वर्गीकृत (Classified) जानकारी को संभालने के लिए मान्यता प्राप्त करना आसान हो जाएगा।
क्या है NATO और इसकी डेटा सुरक्षा की चुनौती?
नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (NATO): यह 32 पश्चिमी देशों का एक सैन्य गठबंधन है, जिसकी स्थापना 1949 में हुई थी।
डेटा शेयरिंग की दिक्कत: सभी 32 देशों के अपने-अपने सुरक्षा और आईटी स्टैंडर्ड्स यानी नियम हैं। किसी एक देश का डेटा सिस्टम दूसरे देश के सिस्टम से सीधे बात नहीं कर पाता था, जिससे आपात स्थिति में फैसले लेने में देरी होती थी।
कॉमर्शियल क्लाउड का फायदा: टेक कंपनियों जैसे- AWS का इस्तेमाल करने से सभी देशों को अलग से इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बनाना पड़ेगा और एक ही कॉमन प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित तरीके से फाइलें शेयर हो सकेंगी।

