Headlines

'मेरा बेटा पढ़ा-लिखा है, पढ़ाई करने वाले पथराव नहीं करते':पुलिस पर पथराव में गिरफ्तार लड़के की मां बोली; कांग्रेस नेता ने कहा-मैं दरभंगा में नहीं था




‘मेरे भाई का कोई ऐसा बैकग्राउंड भी नहीं है कि वो पहले किसी प्रदर्शन में शामिल हुआ हो। मेरा भाई बेकसूर है, वो प्रदर्शन के दौरान फंस गया होगा, बाइक गिर गई होगी, भागा होगा तो पुलिस ने पकड़ लिया होगा। मेरे भाई के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कर ली गई है, मेरे भाई का करियर खराब हो जाएगा, उसे जल्द रिहा किया जाना चाहिए।’ इरशाद, पकड़े गए इरफान का भाई ‘प्रशासन निष्पक्ष तरीके से जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करे, जबकि निर्दोष लोगों को जल्द से जल्द छोड़े। किसी का नाबालिग बच्चा जेल चला जाए,उसके परिवार की क्या स्थिति होगी। अब तो देश में ट्रेंड भी चल रहा है कि नाम पूछकर पकड़ा जाता है, कोई मुसलमान है, तो ऐसा मामलों में उसे पकड़ लिया जाता है।’ फिरोज आलम,समाजसेवी दरभंगा में 23 जुलाई को हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ओर से कानून-व्यवस्था भंग करने, पथराव, तोड़फोड़ और हिंसा के आरोप में दरभंगा की डिप्टी मेयर समेत 54 लोगों को नामजद, करीब 500 अज्ञात के खिलाफ FIR, जबकि 33 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसमें कोतवाली थाना क्षेत्र के सकमापुल का इरफान भी शामिल है। गिरफ्तार किए गए युवकों के परिजनों का पक्ष जानने के लिए भास्कर की टीम शहर के विभिन्न इलाकों में पहुंची। इस दौरान कई परिवारों ने कैमरे पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया, जबकि कुछ लोगों ने ऑफ कैमरा अपनी पीड़ा साझा की। पढ़िए, पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले दरभंगा में विरोध प्रदर्शन की 3 तस्वीरें देखिए अब सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए पूरी रिपोर्ट गिरफ्तार युवकों के परिवार ने कैमरे पर बातचीत से इनकार किया सबसे पहले भास्कर की टीम कोतवाली थाना क्षेत्र के सकमापुल स्थित मो इरफान के घर पहुंची। इसके बाद टीम लहेरियासराय थाना क्षेत्र के बाकरगंज मुहल्ला पहुंची, जहां ऑटो चालक अली इमाम के बेटे सलीम और मोहम्मद कलाम के बेटे अकबर के परिजनों से बातचीत की गई। सलामी और अकबर चचेरे भाई हैं। सलीम ऑटो मरम्मत, जबकि अकबर एक पेट्रोल पंप पर काम करता है। हालांकि, परिवार के लोगों ने कैमरे पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
इसके बाद भास्कर की टीम नगर थाना क्षेत्र के बाजितपुर तरौनी स्थित मो एजाज उर्फ मुन्ना टेलर के घर पहुंची। उनके बेटे तोहिद को भी पुलिस ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। घर पर उस समय कोई पुरुष सदस्य मौजूद नहीं था। तोहिद के पिता पेशे से दर्जी हैं। मां ने ऑफ कैमरा बताया कि वे जेल में बेटे से मिलने गए थे। उनके अनुसार तोहिद का हाथ टूटा हुआ है और उसे समुचित इलाज नहीं मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि उनका बेटा दर्द से परेशान है। हालांकि उन्होंने कैमरे पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया। भास्कर की टीम आखिर में कोतवाली थाना क्षेत्र के सकमापुल पहुंची, जहां मो अजहर अली के परिवार से मुलाकात की। अजहर अली मोटरसाइकिल गैरेज चलाते हैं। उनके बेटे मोहम्मद इरफान को भी पुलिस ने जेल भेज दिया है। परिवार ने बताया कि इरफान मिल्लत कॉलेज से मैथ ऑनर्स से ग्रेजुएट है और वर्तमान में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। परिवार में माता-पिता के अलावा दो भाई और एक बहन हैं। बड़ा भाई बीटेक करने के बाद दूसरे प्रदेश में नौकरी करता है, जबकि छोटी बहन सीतामढ़ी में बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई कर रही है।
परिजनों के अनुसार, घटना वाले दिन इरफान दोपहर करीब दो बजे घर से निकला था। इसके बाद उसे पुलिस ने हिरासत में ले लिया और बाद में न्यायिक हिरासत में भेज दिया। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि उन्हें कोर्ट पर भरोसा है और सच्चाई सामने आने की उम्मीद है। ‘मैं मां हूं, बेटे से मिलवाने के लिए गिड़गिड़ाती रही, नहीं मिलने दिया’ इरफान की मां आयशा खातून ने बताया कि घटना वाले दिन मैं घर पर नहीं थी। रिश्तेदार के पास गई थी। रात को करीब 8 बजे इरफान के पिता मोहम्मद अजहर अली का कॉल आया, उन्होंने बताया कि अब तक इरफान घर नहीं आया है। इसके बाद मैं रिश्तेदार के पास से अपने घर लौटी। पति और आसपास के लोगों की मदद से अपने बेटे की काफी तलाश की। रात 2 बजे तक घर के दरवाजे पर बैठी रही कि इरफान आ जाएगा। देर रात को ही पता चला कि इरफान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। सुबह मैंने खाना तैयार किया कि जेल में बेटे को कुछ खिला दूंगी। जब थाना गई तो पुलिस ने बताया कि आपके बेटे को हम लोगों ने खाना खिला दिया है। मैंने कहा कि मेरे बेटे से मुझे मिलने दीजिए, लेकिन पुलिसवालों ने मिलने नहीं दिया। बाद में पता चला कि मेरा बेटा बिशनपुर थाना में है। मैं घर आ गई। दोपहर 3 बजे दोबारा थाना गई, लेकिन दोबारा पुलिस ने मेरे बेटे इरफान से मेरी मुलाकात नहीं कराई। ‘मेरा बेटा निर्दोष है, स्टूडेंट है, स्टूडेंट कभी मारपीट नहीं करते’ आयशा ने बताया कि मैंने पुलिस से काफी मिन्नत की, कहा कि मैं उसकी मां हूं, मुझे मिलने दीजिए, लेकिन पुलिस ने कहा कि किसी को मिलने नहीं दिया जाएगा। मैं काफी देर तक रोती रही, गिड़गिड़ाती रही लेकिन पुलिस वाले नहीं माने। उन्होंने बताया कि जब कोर्ट में इरफान को बयान के लिए ले जाया गया तो थोड़ी देर के लिए मेरी मुलाकात इरफान से हुई। मैंने पूछा कि क्या हुआ था, इरफान ने मुझे बताया कि पुलिसकर्मियों ने मेरा मोबाइल ले लिया है, उसे थाना में जमा नहीं कराया गया है। इतने में एक पुलिसकर्मी आया और उसने मुझे हटा इरफान के पास से हटा दिया। इसके बाद मैं चली आई। आयशा ने कहा कि मेरा बेटा पढ़ा लिखा है, करता कोई है और फंस कोई जाता है। मेरे बेटे को पुलिस जल्द रिहा करे। मेरा बेटा निर्दोष है, मेरा बेटा स्टूडेंट है, स्टूडेंट कभी मारपीट नहीं करता है। ‘आखिर मेरे बेटे की गलती क्या है, कोई बताने को तैयार नहीं है’ इरफान के पिता मोहम्मद अजहर अली ने बताया कि मेरा बेटा रिश्तेदार के घर गया था। मुझे नहीं पता कि वो प्रोटेस्ट के दौरान गया था या नहीं, लेकिन उसने मुझे बताया कि रिश्तेदार के घर से लौटने के दौरान पुलिसवालों ने मुझे पकड़ लिया। मेरे बेटे का कोई वीडियो नहीं है, जिसमें वो मारपीट करता दिख रहा है। प्रशासन से मांग है कि मेरे बेटे को छोड़ दिया जाए। वो निर्दोष है। मेरे बेटे से हमलोगों को मिलने भी नहीं दिया गया। कोर्ट में मुलाकात हुई तो बताया कि मोबाइल रख लिया गया है। इसके बाद पुलिसवालों ने मुझे बेटे के पास से हटा दिया। अजहर अली ने बताया कि मेरा बेटा झगड़ा करने वाला नहीं है,उसे फंसा दिया गया है। उसे गलत तरीके से पकड़ा गया है। थाना में अंदर ही नहीं घुसने दिया गया। कोई कुछ बताने के लिए तैयार नहीं है कि आखिर मेरे बेटे की गलती क्या है। ‘पुलिस हमें वो वीडियो नहीं दे रही, जिसमें मेरा भाई दिख रहा है’ इरफान के बड़े भाई इरशाद ने बताया कि मैं बीटेक के बाद जॉब कर रहा हूं। मैंने भाई की गिरफ्तारी की खबर सुनी तो वापस घर आया हूं। मैं खड़गपुर में था। रात 10 बजे जब घर पर कॉल किया तो मां ने बताया कि इरफान अब तक घर नहीं आया है। मां ने बताया कि इरफान लहेरियासराय में रिश्तेदार के घर गया था। मैंने इसके बाद इरफान के एक दोस्त को कॉल किया, उसने मुझे बताया कि मुझे कुछ नहीं पता है। फिर मैंने कहा कि तुम दूसरे दोस्तों को कॉल करके जानकारी जुटाओ। देर रात 11 बजे इरफान के दोस्त ने मुझे कॉल कर बताया कि आपका भाई रिश्तेदार के घर गया था, लेकिन वहां से लौटा नहीं है। इसके बाद मेरे पिता थाना गए, क्योंकि उस दिन प्रोटेस्ट भी था। पापा को लगा कि कुछ लोगों को पकड़ा गया है, हो सकता है कि उसमें मेरे बेटे को भी पकड़ लिया गया होगा। पापा देर रात थाना गए तो पुलिस ने मना कर दिया। पुलिसकर्मियों ने कहा कि इरफाइन नाम का लड़का पकड़ा गया है कि नहीं,इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है। पुलिसकर्मियों ने 24 जुलाई को बुलाया। 23 की ही रात को प्रोटेस्ट वाली जगह भाई की बाइक मिली। 24 को पापा दोबारा थाना गए। दोपहर करीब 12 बजे पापा को जानकारी मिली कि इरफान को पुलिस अस्पताल में उसका मेडिकल कराने ले गई है। जब मुझे इस की जानकारी हुई तो मैं तत्काल खड़गपुर से दरभंगा के लिए चला। ‘नाबालिग को नहीं पता कि क्या राष्ट्रहित में है और क्या राष्ट्र के खिलाफ है’ समाजसेवी फिरोज आलम ने बताया कि दरभंगा की राजनीति में एक्टिव कुछ राजनेता जब कुर्सी तक पहुंच जाते हैं, तो उन लोगों को लगता है कि राष्ट्रीय राजनीति में वो दस्तक देने के काबिल हो गए और इसमें दिल्ली में कुछ हरकत होती है तो उसको छोटे-छोटे शहरों में लेकर के खड़े हो जाते हैं, जिसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ता है। फिरोज ने बताया कि ये उन लोगों की गलती है, जो सड़कों पर भीड़ लेकर निकल जाते हैं। ऐसे लोगों को ही इस तरह के मामले में जवाब देना चाहिए। कोई ऑटो ड्राइवर का बेटा है, पिता दिनभर ऑटो चलाता है, उसका बेटा अपने काम से जा रहा था, उसे पकड़ लिया गया। जहां प्रदर्शन होना था, भीड़ वहां न जाकर दूसरे रोड से जा रही थी, उसी रास्ते पर ऑटो ड्राइवर का बेटा भी अपने काम से जा रहा था, उसकी क्या गलती थी। प्रशासन के हाथ जो भी लगा,उसे लेकर चले गए। अब ऑटो ड्राइवर के पास क्या रास्ता बचता है, वो कहां से वकील हायर करेगा। ‘मैं दरभंगा में नहीं था, फिर भी एफआईआर में मेरा नाम है’ विरोध-प्रदर्शन के बाद दर्ज एफआईआर में नाम शामिल किए जाने पर दरभंगा जिला कांग्रेस कमेटी (अर्बन) के जिलाध्यक्ष डॉ. जमाल हसन ने कहा कि मैं 23 जुलाई को दरभंगा में मौजूद ही नहीं था। उन्होंने कहा कि मैं 19 जुलाई से ही दरभंगा से बाहर था। हसन के अनुसार, 19 से 22 जुलाई तक मैं कोलकाता में था। इसके बाद 22 जुलाई की शाम 4:50 बजे सियालदह स्टेशन से नई दिल्ली के लिए ट्रेन से रवाना हुआ और 23 जुलाई की सुबह करीब 11:10 बजे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचा। वहां से रैपिडो से अपने भाई के घर पहुंचा। उन्होंने दावा किया कि अपनी यात्रा से जुड़े टिकट और अन्य साक्ष्य मीडिया को उपलब्ध करा दिए हैं। डॉ. जमाल हसन ने बिहार सरकार और जिला प्रशासन से मांग की कि उनके मोबाइल नंबर की सर्विलांस और लोकेशन की जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि घटना के समय वह दरभंगा में थे या नहीं। मेरा नाम एफआईआर में शामिल करने वाले संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। नहीं तो मैं कोर्ट की शरण में जाऊंगा। 500 अज्ञात समेत 54 नामजद पर केस, 33 गिरफ्तार; 113 संदिग्धों की पहचान जारी इस मामले में सदर एसडीपीओ राजीव कुमार ने कहा कि 23 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था भंग करने, पथराव, तोड़फोड़ और हिंसा से जुड़े मामलों में पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच जारी है और दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है। एसडीपीओ ने बताया कि इस मामले में के जिनकी पहचान की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने बताया कि अब तक पुलिस द्वारा 113 संदिग्धों की तस्वीरें जारी की गई हैं, जिनकी पहचान कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। लगातार छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है और अब तक 33 आरोपितों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। एसडीपीओ ने कहा कि शेष नामजद एवं चिन्हित आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए भी पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *